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म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इन्फेक्शन से पीड़ित मिले जिले के 5 मरीज
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गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण के दौर में स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी क्रम में कोविड सेंटर बनाए गए मीड्योर अस्पताल में उपचाराधीन पांच मरीज म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इन्फेक्शन (एमएफआई) से पीड़ित पाए गए हैं। सभी का अस्पताल में ही उपचार चल रहा है, जिनके स्वास्थ्य पर डॉक्टर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
अस्पताल के ही एक डॉक्टर ने बताया कि यह एक जानलेवा बीमारी है, जिसका प्रभाव कोरोना काल में बढ़ गया है। इसके चलते आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहा है जबकि इससे पीड़ित मरीज की मौत की आशंका भी सामान्य मरीजों के मुकाबले 50 फीसदी ज्यादा होती है। डॉक्टरों के मुताबिक वैसे तो एमएफआई से पीड़ित मरीजों का इलाज संभव है, लेकिन समय रहते पहचान जरूरी है।
म्यूकोरमाइकोसिस को पहले जाइगोमाइकोसिस कहा जाता था। यह एक गंभीर किस्म का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है, जो पर्यावरण में मौजूद म्यूकोरमाइसिटीस नाम के कोशिकाओं के समूह से होता है। म्यूकोरमाइकोसिस आमतौर पर उन लोगों को प्रभावित करता है, जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। ये कीटाणु रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं। किसी भी मरीज में यदि आंख और गाल में सूजन, नाक बंद होना, नाक में काला क्रस्ट जमा हो जाने जैसे लक्षण मिलते हैं, तो तुरंत बायोप्सी करवाकर उपचार शुरू करना बेहतर रहता है।
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अस्पताल के ही एक डॉक्टर ने बताया कि यह एक जानलेवा बीमारी है, जिसका प्रभाव कोरोना काल में बढ़ गया है। इसके चलते आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहा है जबकि इससे पीड़ित मरीज की मौत की आशंका भी सामान्य मरीजों के मुकाबले 50 फीसदी ज्यादा होती है। डॉक्टरों के मुताबिक वैसे तो एमएफआई से पीड़ित मरीजों का इलाज संभव है, लेकिन समय रहते पहचान जरूरी है।
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म्यूकोरमाइकोसिस को पहले जाइगोमाइकोसिस कहा जाता था। यह एक गंभीर किस्म का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है, जो पर्यावरण में मौजूद म्यूकोरमाइसिटीस नाम के कोशिकाओं के समूह से होता है। म्यूकोरमाइकोसिस आमतौर पर उन लोगों को प्रभावित करता है, जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। ये कीटाणु रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं। किसी भी मरीज में यदि आंख और गाल में सूजन, नाक बंद होना, नाक में काला क्रस्ट जमा हो जाने जैसे लक्षण मिलते हैं, तो तुरंत बायोप्सी करवाकर उपचार शुरू करना बेहतर रहता है।
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