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यहां लगेगी रावण की 1000 किलो की विशालकाय मूर्ति, नए साल में ही होगी स्थापना

Wed, 04 Jan 2017 11:12 AM IST
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 04 Jan 2017 11:12 AM IST
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Giant statue of Ravana goes here 1000kg, will be established in the new year
रावण का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

ग्रेटर नोएडा के बिसरख धाम में रावण के मंदिर में स्थापित होने वाली रावण की मूर्ति एक हजार किलोग्राम की होगी। इसकी स्थापना मार्च में की जाएगी। पहले यह स्थापना नए साल में होनी थी, लेकिन ग्रामीणों के कहने पर मूर्ति को विशालकाय बनाया जा रहा है।

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वेद पुराणों के अनुसार ऋषि विश्रवा उनकी तपोस्थली को शिव नगरी भी कहा जाता है। बिसरख गांव में ऋषि विश्रवा की तपोस्थली है। माना जाता है कि रावण का जन्म यहीं हुआ था। बताते हैं कि बिसरख धाम में रावण द्बारा स्थापित अष्टभुजी शिवलिंग विराजित हैं, जो कि विश्व में ऐसा शिवलिंग और दूसरा कहीं भी नहीं हैं।
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नए साल पर यहां रावण की 5.5 फीट ऊंची मूर्ति के अलावा 42 फीट ऊंचे शिवलिंग को स्थापित करने की तैयारी हो रही थी। रावण की मूर्ति जयपुर से बनवाई जा रही है। ग्रामीणों की मांग पर मूर्ति को विशालकाय बनाया जा रहा है। 

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जयपुर में नई मूर्ति बनवाई जा रही है

Giant statue of Ravana goes here 1000kg, will be established in the new year
रावण का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मंदिर के महंत अशोकानंद आर्या ने बताया कि इसकी ऊंचाई दो गुना कर दी गई है। साथ ही वजन एक हजार किलो के आसपास होगा। ऐसे में जिस मूर्ति की स्थापना जनवरी में होनी थी। वह अब मार्च में स्थापित की जाएगी।

दरअसल, मंदिर में 11 अगस्त 2016 को राम के साथ रावण की मूर्ति की स्थापना की जानी थी। लेकिन अराजक तत्वों द्वारा मंदिर में तोड़फोड़ कर रावण की मूर्ति को खंडित कर दिया गया।

जिसके बाद से जयपुर में नई मूर्ति बनवाई जा रही है। पहले यह मूर्ति दीवाली को स्थापित होनी थी। इसके बाद नए साल पर। अब मार्च में स्थापना के लिए बोला गया है। वजह मूर्ति के निर्माण में बदलाव का कारण बताया जा रहा है।

गाथाओं के मुताबिक बिसरख गांव में रावण मंदिर के साथ प्राचीन शिव मंदिर भी है। वहां के महंत रामदास बताते हैं कि रावण के पिता विश्रवा ब्राह्मण थे। जब पूरा देश अच्छाई की बुराई पर जीत के रूप में रावण के पुतले का दहन करता है, तब इस गांव में खुशी का माहौल नहीं होता है। बिसरख गांव के लोग न रामलीला आयोजित करते हैं और न कभी रावण का दहन करते हैं।

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