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Ghaziabad News: अटौर में बाढ़ में डूबने से महिला की मौत
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गाजियाबाद।
बाढ़ प्रभावित अटौर गांव में पानी में डूबकर मोनी (40) की मौत हो गई। जल स्तर कम होने के बाद मोनी घेर में जानवरों को देखने के लिए गई थी। आसपास के लोगों ने मोनी को डूबता देख उन्हें पानी से निकाला। परिजन उन्हें एमएमजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। बाढ़ से अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है।
मोनी के पति बलराज ने बताया कि उनके घर से कुछ दूर घेर है, जहां पर भैैंस और अन्य पशु बंधे रहते हैं। वह नदी के कुछ नजदीक है। जलस्तर कुछ कम होने पर उनकी पत्नी सुबह 11:00 बजे घेर में जानवरों को देखने गई थीं। वह मुंडेर पर चढ़कर जा रही थीं उसी दौरान उनका पैर फिसल गया और गड्ढे में गिर गई। आसपास के लोगों ने पानी में डूबते हुए देखा तो बचाने पहुंचे। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्राम प्रधान रणवीर सिंह ने बताया की महिला के घेर में तीन-चार दिनों से पानी भरा हुआ था। मंगलवार को उनको लगा कि कुछ पानी कम हो गया है इसलिए वह पशुओं को देखने गई थीं।
हिंडन में है 2700 क्यूसेक पानी
सोमवार को हिंडन नदी में 2800 क्यूसेक पानी था जो मंगलवार को घटकर 2700 क्यूसेक हो गया है। सिंचाई विभाग के एक्सइएन संजय सिंह जादौन ने बताया कि हिंडन नदी का जलस्तर घटा है। बारिश नहीं हुई तो जल स्तर और घटने के आसार हैं।
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पानी सूखने तक घर पर न जाने की अपील
प्रशासन की टीम लगातार लोगों से अपील कर रही है कि जब तक पानी सूख न जाए तब तक वह वापस घरों में ना जाएं। अटौर की घटना के बाद गांव में दोबारा से अपील कराई गई। आपदा प्रबंधन अधिकारी और एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के बाद पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की गई है कि ऐसे क्षेत्रों में पुलिस तैनात की जाए और सख्ती से लोगों को रोका जाए।
घर से न निकलने वालों को बांटा भोजन-दूध
एसडीएम सदर विनय कुमार सिंह ने बताया कि करहेड़ा में 15-20 परिवार ऐसे हैं जो घर छोड़कर नहीं जाना चाहते। उनको भोजन,पानी और दूध मुहैया कराया गया है। उनका कहना है कि वह अपने घर की ऊपरी मंजिल पर रह रहे हैं। उनको बस खाना-पीना मिलता रहे तो कोई असुविधा नहीं होगी।
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बाढ़ प्रभावित अटौर गांव में पानी में डूबकर मोनी (40) की मौत हो गई। जल स्तर कम होने के बाद मोनी घेर में जानवरों को देखने के लिए गई थी। आसपास के लोगों ने मोनी को डूबता देख उन्हें पानी से निकाला। परिजन उन्हें एमएमजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। बाढ़ से अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है।
मोनी के पति बलराज ने बताया कि उनके घर से कुछ दूर घेर है, जहां पर भैैंस और अन्य पशु बंधे रहते हैं। वह नदी के कुछ नजदीक है। जलस्तर कुछ कम होने पर उनकी पत्नी सुबह 11:00 बजे घेर में जानवरों को देखने गई थीं। वह मुंडेर पर चढ़कर जा रही थीं उसी दौरान उनका पैर फिसल गया और गड्ढे में गिर गई। आसपास के लोगों ने पानी में डूबते हुए देखा तो बचाने पहुंचे। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्राम प्रधान रणवीर सिंह ने बताया की महिला के घेर में तीन-चार दिनों से पानी भरा हुआ था। मंगलवार को उनको लगा कि कुछ पानी कम हो गया है इसलिए वह पशुओं को देखने गई थीं।
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हिंडन में है 2700 क्यूसेक पानी
सोमवार को हिंडन नदी में 2800 क्यूसेक पानी था जो मंगलवार को घटकर 2700 क्यूसेक हो गया है। सिंचाई विभाग के एक्सइएन संजय सिंह जादौन ने बताया कि हिंडन नदी का जलस्तर घटा है। बारिश नहीं हुई तो जल स्तर और घटने के आसार हैं।
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पानी सूखने तक घर पर न जाने की अपील
प्रशासन की टीम लगातार लोगों से अपील कर रही है कि जब तक पानी सूख न जाए तब तक वह वापस घरों में ना जाएं। अटौर की घटना के बाद गांव में दोबारा से अपील कराई गई। आपदा प्रबंधन अधिकारी और एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के बाद पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की गई है कि ऐसे क्षेत्रों में पुलिस तैनात की जाए और सख्ती से लोगों को रोका जाए।
घर से न निकलने वालों को बांटा भोजन-दूध
एसडीएम सदर विनय कुमार सिंह ने बताया कि करहेड़ा में 15-20 परिवार ऐसे हैं जो घर छोड़कर नहीं जाना चाहते। उनको भोजन,पानी और दूध मुहैया कराया गया है। उनका कहना है कि वह अपने घर की ऊपरी मंजिल पर रह रहे हैं। उनको बस खाना-पीना मिलता रहे तो कोई असुविधा नहीं होगी।