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UP: पिंक बूथ के बंद दरवाजे पर 40 मिनट तक तड़पती रही फरियाद, मदद मांगने आया युवक, महिला कर्मियों ने खोला न गेट

Tue, 14 Jul 2026 12:36 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 14 Jul 2026 12:36 PM IST
सार

गाजियाबाद से शर्मनाक खबर सामने आई है। पिंक बूथ के बंद दरवाजे पर 40 मिनट तक फरियाद तड़पती रही। खून अधिक बहने के बाद युवक की मौत हो गई। मदद मांगने के लिए युवक ने शीशा तोड़ने से दोनों हाथों की नसें कट गईं। आरोप है कि महिला पुलिसकर्मियों ने दरवाजा नहीं खोला। 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची तो उसमें फर्स्ट एड भी नहीं मिला।

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UP Crime 22-Year-Old Dies After Pleading for Help Outside Locked Pink Police Booth in Ghaziabad
ghaziabad youth death - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गाजियाबाद के थानों में फरियादियों के साथ मित्रवत और संवेदनशील व्यवहार का दावा करने वाली कमिश्नरेट पुलिस की कार्यप्रणाली पर रविवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। ऑटो चालक से विवाद के बाद जान बचाने की गुहार लेकर संजयनगर सेक्टर-23 स्थित पिंक बूथ पर पहुंचे 22 वर्षीय राजकुमार को मुख्य गेट बंद मिला। 
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आरोप है कि महिला पुलिसकर्मियों ने कार्यालय का दरवाजा नहीं खोला। घबराहट में उन्होंने दरवाजे के शीशे पर दोनों हाथ दे मारे। कांच टूटकर हाथों में धंसने से घायल राजकुमार 40 मिनट तक तड़पते रहे और अस्पताल में उनकी जान चली गई।
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बिहार के सीवान जिले के गांव बढुलिया निवासी राजकुमार संजयनगर सेक्टर-23 में किराये पर रहकर कार मैकेनिक का काम करते थे। उनके भाई ने बताया कि रविवार दोपहर ऑटो का किराया देने को लेकर उनकी चालक से कहासुनी और धक्कामुक्की हो गई। विवाद के बाद वह भागकर नजदीकी पिंक बूथ पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट बंद मिला। 

शीशा टूटते ही कांच हाथों में धंस गया
लोहे का गेट नहीं खुलने पर वह दूसरे रास्ते से परिसर में पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। उनका आरोप है कि बूथ इंचार्ज के एयरकंडीशनर लगे कार्यालय में मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने दरवाजा नहीं खोला। इसी दौरान राजकुमार ने दोनों हाथों से शीशे पर जोरदार प्रहार किया। शीशा टूटते ही कांच उसके हाथों में धंस गया और दोनों हाथों की नसें कट गईं। देखते ही देखते वह लहूलुहान हो गए।

 
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आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने तत्काल उपचार कराने के बजाय पहले अधिकारियों को सूचना दी। बाद में चौकी इंचार्ज के निर्देश पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस बुलाई गई, लेकिन उसमें भी फर्स्ट एड की सुविधा नहीं थी।

एंबुलेंस में तैनात कर्मचारी पास ही स्थित मेडिकल स्टोर से बैंडेज लेकर आए, जिसे राजकुमार के जख्मी हाथों पर बांधकर उनको एमएमजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। आशंका है कि अत्यधिक खून बहने से उनकी जान गई।

परिसर से सड़क तक बिखरा खून बयां कर रहा लापरवाही
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना दोपहर करीब ढाई बजे हुई। घायल राजकुमार पहले पिंक बूथ परिसर में बैठकर मदद मांगते रहे। राहत नहीं मिलने पर वह सड़क पर आए और चीख-पुकार करने लगे। कुछ देर बाद वह बेहोश होकर गिर पड़े।
 

लोगों का दावा है कि घटना के करीब 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची। घटनास्थल पर बूथ परिसर से लेकर सड़क तक खून बिखरा मिला, जो पुलिसकर्मियों की लापरवाही बयां कर रहा था। वहीं, घटना के कुछ देर बाद ही पुलिस अधिकारियों ने बूथ के टूटे शीशे बदलवा दिए।

डीसीपी बोले, जांच के बाद होगी कार्रवाई
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने कहा कि फरियादी ने शराब पी रखी थी। हालांकि, पुलिसकर्मियों को उसकी बात सुननी चाहिए थी। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। परिजनों की तहरीर और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

दाह संस्कार के बाद पिंक बूथ पहुंचे लोग, पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर किया हंगामा
मेडिकल परीक्षण के बाद राजकुमार के शव का भट्ठा नंबर पांच स्थित वाल्मीकि श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आक्रोशित लोग सेक्टर-23 स्थित पिंक बूथ पहुंचे और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए घेराव कर दिया। मृतक के भाई अजय ने आरोप लगाया कि चार-पांच युवक ऑटो से उनके भाई का पीछा कर रहे थे। 

 

अजय का आरोप है कि घायल राजकुमार को समय पर उपचार नहीं मिला, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। उन्होंने घटना के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। पिंक बूथ के घेराव की सूचना पर मधुबन बापूधाम थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया। अजय ने बताया कि राजकुमार की पत्नी गुड़िया आठ माह की गर्भवती है। पति की मौत के सदमे से उनकी तबीयत भी खराब हो गई है।

 

वीडियो बनाते रहे पुलिसकर्मी और राहगीर
घटना के बाद राजकुमार करीब सड़क पर घायल अवस्था में पड़े रहे। आरोप है कि उनकी मदद करने के बजाय पुलिसकर्मी और राहगीर वीडियो बनाते रहे। कुछ लोगों ने तो फेसबुक लाइव तक कर दिया।
 
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