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कश्यप-निषाद समाज को मजबूत करने के लिए गांव स्तर तक संगठन सक्रिय करना होगा : नरेंद्र कश्यप
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गाजियाबाद। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप ने कहा कि कश्यप-निषाद समाज को मजबूत करने के लिए केवल बड़े आयोजनों तक सीमित रहने के बजाय हर जिले, तहसील और गांव स्तर तक संगठन को सक्रिय और प्रभावी बनाना होगा। जातिगत जनगणना जैसे विषयों को गंभीरता से उठाते हुए समाज की वास्तविक संख्या और स्थिति के आंकड़े सामने लाना जरूरी है, ताकि पात्र लोगों को उनके अधिकार और सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके।
रविवार को हिंदी भवन में कश्यप-निषाद समाज को सामाजिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने पदाधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ संगठन का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसे संगठन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में जातिगत जनगणना और संगठन विस्तार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया।
कार्यशाला की शुरुआत भगवान कश्यप की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना और भारत माता के जयघोष के साथ हुई। मंच पर उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। वक्ताओं ने कहा कि जब तक संगठन गांव स्तर तक मजबूत नहीं होगा, तब तक समाज की आवाज प्रभावी रूप से शासन-प्रशासन तक नहीं पहुंचेगी।
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जातिगत जनगणना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जिसमें समाज की वास्तविक स्थिति के आंकड़े सामने लाने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि सही आंकड़े आने से ही आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं में हिस्सेदारी तय होगी।
संगठन विस्तार और एकजुटता का संकल्प
कार्यशाला में हर जिले, तहसील और क्षेत्र में संगठन की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की चुनौतियों को रखा और गांव से जिला स्तर तक संगठन को मजबूत कर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर सहमति बनी। अंत में सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
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रविवार को हिंदी भवन में कश्यप-निषाद समाज को सामाजिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने पदाधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ संगठन का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसे संगठन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में जातिगत जनगणना और संगठन विस्तार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया।
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कार्यशाला की शुरुआत भगवान कश्यप की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना और भारत माता के जयघोष के साथ हुई। मंच पर उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। वक्ताओं ने कहा कि जब तक संगठन गांव स्तर तक मजबूत नहीं होगा, तब तक समाज की आवाज प्रभावी रूप से शासन-प्रशासन तक नहीं पहुंचेगी।
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जातिगत जनगणना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जिसमें समाज की वास्तविक स्थिति के आंकड़े सामने लाने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि सही आंकड़े आने से ही आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं में हिस्सेदारी तय होगी।
संगठन विस्तार और एकजुटता का संकल्प
कार्यशाला में हर जिले, तहसील और क्षेत्र में संगठन की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की चुनौतियों को रखा और गांव से जिला स्तर तक संगठन को मजबूत कर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर सहमति बनी। अंत में सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का संकल्प लिया।