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जमा पूंजी भी काम न आई..मदद के रुपयों से चिता जलाई
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Wed, 30 Nov 2016 01:06 AM IST
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मुन्ना लाल
- फोटो : अमर उजाला
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जीवन भर अपनी जिस कमाई को ट्यूबवेल ऑपरेटर मुन्ना लाल बैंक में सहेजकर रखते रहे, नोटबंदी के चलते वह रकम उनके अंतिम संस्कार में भी काम नहीं आ सकी। मंगलवार सुबह हुई मुन्ना लाल की मौत के बाद उनकी पोती अंतिम संस्कार के लिए बैंक से 24 हजार रुपये निकालने पहुंची, मगर बैंक में कैश ही नहीं था।
लोगों ने हंगामा किया तो बैंक मैनेजर ने अपने पास से सात हजार और एक ठेकेदार ने दस हजार रुपयों से मदद की। इसके बाद ही मुन्ना लाल का अंतिम संस्कार हो सका। आर्यनगर में रहने वाले मुन्ना लाल ट्यूबवेल ऑपरेटर की नौकरी करते थे।
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मुन्ना लाल की परेशानी तब से ज्यादा बढ़ गई थी, जब से 1000-500 के नोट केंद्र सरकार ने बंद कर दिए। बैंकों में कैश की किल्लत होने के चलते वह अपने ही खाते से इलाज के लिए पर्याप्त रकम नहीं निकाल पा रहे थे।
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सोमवार को मुन्ना लाल अपनी पोती नेहा शर्मा को साथ लेकर बैंक पहुंचे और कैश की मांग की, मगर मैनेजर ने कैश न होने की बात बताई और अगले दिन आने को कहा। इस पर मुन्ना लाल ने बैंक मैनेजर से कहा कि उपकी तबीयत ठीक नहीं है, ऐसे में उनकी पोती ही कैश लेने आएगी।
मंगलवार को मुन्ना लाल की पोती नेहा नवयुग मार्केट स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पहुंची और बताया कि सुबह हीदादा की मौत हो चुकी है। घर में अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं हैं। ऐसे में उनका 24 हजार रुपयों का चेक कैश कर दिया जाए।
बैंक मैनेजर ने यह कहते हुए कैश देने से इंकार कर दिया कि एक तो बैंक में कैश है ही नहीं, दूसरे चूंकि खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में उसके एकाउंट से अब रकम नहीं निकाली जा सकती।
इसके बाद नेहा और उसके परिजनों ने बैंक के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया। समाजसेवी वंदना चौधरी और संध्या त्यागी समेत कई महिलाएं भी वहां पहुंच गईं। जिसने भी इस परिवार की व्यथा सुनी, वह उन्हीं की तरफदारी करने लगा।
कुछ लोगों का तो यहां तक कहना था कि बैंक के पास कैश आए या न आए यह ग्राहक का सिरदर्द नहीं है। बैंक प्रबंधन कहीं से भी कैश का इंतजाम करे। हंगामा बढ़ा तो बैंक मैनेजर एके जैन ने अपने पास से सात हजार और एक अन्य ग्राहक नवीन गुप्ता से 10 हजार रुपये नेहा को दिलवाए।
इसके बाद ही मुन्ना लाल के शव का अंतिम संस्कार हो सका। बैंक मैनेजर एके जैन ने बताया कि शुक्रवार तक बैंक से कैश वितरित किया गया। इसके बाद करेंसी चेस्ट से कैश आया ही नहीं। यदि कैश रोजाना आता रहे तो दिक्कत नहीं होगी।
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लोगों ने हंगामा किया तो बैंक मैनेजर ने अपने पास से सात हजार और एक ठेकेदार ने दस हजार रुपयों से मदद की। इसके बाद ही मुन्ना लाल का अंतिम संस्कार हो सका। आर्यनगर में रहने वाले मुन्ना लाल ट्यूबवेल ऑपरेटर की नौकरी करते थे।
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कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मुन्ना लाल की परेशानी तब से ज्यादा बढ़ गई थी, जब से 1000-500 के नोट केंद्र सरकार ने बंद कर दिए। बैंकों में कैश की किल्लत होने के चलते वह अपने ही खाते से इलाज के लिए पर्याप्त रकम नहीं निकाल पा रहे थे।
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सोमवार को मुन्ना लाल अपनी पोती नेहा शर्मा को साथ लेकर बैंक पहुंचे और कैश की मांग की, मगर मैनेजर ने कैश न होने की बात बताई और अगले दिन आने को कहा। इस पर मुन्ना लाल ने बैंक मैनेजर से कहा कि उपकी तबीयत ठीक नहीं है, ऐसे में उनकी पोती ही कैश लेने आएगी।
मंगलवार को मुन्ना लाल की पोती नेहा नवयुग मार्केट स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पहुंची और बताया कि सुबह हीदादा की मौत हो चुकी है। घर में अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं हैं। ऐसे में उनका 24 हजार रुपयों का चेक कैश कर दिया जाए।
बैंक मैनेजर ने यह कहते हुए कैश देने से इंकार कर दिया कि एक तो बैंक में कैश है ही नहीं, दूसरे चूंकि खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में उसके एकाउंट से अब रकम नहीं निकाली जा सकती।
इसके बाद नेहा और उसके परिजनों ने बैंक के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया। समाजसेवी वंदना चौधरी और संध्या त्यागी समेत कई महिलाएं भी वहां पहुंच गईं। जिसने भी इस परिवार की व्यथा सुनी, वह उन्हीं की तरफदारी करने लगा।
कुछ लोगों का तो यहां तक कहना था कि बैंक के पास कैश आए या न आए यह ग्राहक का सिरदर्द नहीं है। बैंक प्रबंधन कहीं से भी कैश का इंतजाम करे। हंगामा बढ़ा तो बैंक मैनेजर एके जैन ने अपने पास से सात हजार और एक अन्य ग्राहक नवीन गुप्ता से 10 हजार रुपये नेहा को दिलवाए।
इसके बाद ही मुन्ना लाल के शव का अंतिम संस्कार हो सका। बैंक मैनेजर एके जैन ने बताया कि शुक्रवार तक बैंक से कैश वितरित किया गया। इसके बाद करेंसी चेस्ट से कैश आया ही नहीं। यदि कैश रोजाना आता रहे तो दिक्कत नहीं होगी।