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Ghaziabad News: सर्जन छुट्टी पर, संयुक्त अस्पताल में सामान्य ऑपरेशन बंद
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गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों को डॉक्टरों की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। संजयनगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में एकमात्र सर्जन के अवकाश पर जाने से सामान्य ऑपरेशन बंद हो गए हैं। हर्निया और पथरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिले के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल संयुक्त जिला अस्पताल में सर्जरी की जिम्मेदारी एक ही सर्जन डॉ. मनीष मित्तल के कंधों पर है। उनके अवकाश पर जाने से सामान्य ऑपरेशन की सुविधा प्रभावित हो गई है। अस्पताल में आमतौर पर सप्ताह में पांच से छह मरीजों की सर्जरी की जाती थी। अब ऑपरेशन के लिए पहुंचने वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी जा रही है।
एमएमजी अस्पताल पर बढ़ेगा दबाव
सर्जन की अनुपलब्धता के चलते संयुक्त जिला अस्पताल से सर्जरी की आवश्यकता वाले मरीजों को जिला एमएमजी अस्पताल रेफर किया जा रहा है। एमएमजी अस्पताल में पहले से मरीजों की संख्या अधिक रहती है। वहां मरीजों को आठ से दस दिन बाद की तारीख मिल रही है। ऐसे में गंभीर मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यहां सामान्य ऑपरेशन कराने पर भी 20 से 30 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास
सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि सर्जन 30 अक्तूबर तक अवकाश पर हैं। उनके स्थान पर किसी अन्य डॉक्टर को संबद्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल, गंभीर मरीजों को जिला एमएमजी अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
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जिले के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल संयुक्त जिला अस्पताल में सर्जरी की जिम्मेदारी एक ही सर्जन डॉ. मनीष मित्तल के कंधों पर है। उनके अवकाश पर जाने से सामान्य ऑपरेशन की सुविधा प्रभावित हो गई है। अस्पताल में आमतौर पर सप्ताह में पांच से छह मरीजों की सर्जरी की जाती थी। अब ऑपरेशन के लिए पहुंचने वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी जा रही है।
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एमएमजी अस्पताल पर बढ़ेगा दबाव
सर्जन की अनुपलब्धता के चलते संयुक्त जिला अस्पताल से सर्जरी की आवश्यकता वाले मरीजों को जिला एमएमजी अस्पताल रेफर किया जा रहा है। एमएमजी अस्पताल में पहले से मरीजों की संख्या अधिक रहती है। वहां मरीजों को आठ से दस दिन बाद की तारीख मिल रही है। ऐसे में गंभीर मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यहां सामान्य ऑपरेशन कराने पर भी 20 से 30 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास
सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि सर्जन 30 अक्तूबर तक अवकाश पर हैं। उनके स्थान पर किसी अन्य डॉक्टर को संबद्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल, गंभीर मरीजों को जिला एमएमजी अस्पताल रेफर किया जा रहा है।