Israel-Iran Conflict: 'हवाई हमले के समय बंकर में छिपकर बचाते जान', हापुड़ के शाहबुद्दीन ने बयां की आंखों देखी
देश से इस्राइल गए कामगारों की परिवारों को चिंता सता रही है। परिजन वहां मौजूद लोगों से वीडियो कॉल पर हालचाल ले रहे। हापुड़ जिले से करीब 10 लोग इस्राइल में मौजूद हैं।
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इस्राइल, ईरान और लेबनान के बीच टकराव अब तेज हो गया है। इस्राइल पर भी चौतरफे हमले हो रहे हैं। ऐसे में देश से इस्राइल गए कामगारों के परिवार चिंता में हैं। हापुड़ जिले से 10 लोग इस्राइल में हैं। लगातार हो रहे हवाई हमलों के दौरान ये लोग बंकरों में छिपकर जान बचाते हैं। उनकी सलामती के लिए लगातार परिवार की ओर से लगातार दुआएं कर रहे हैं।
हापुड़ के मोहल्ला मजीदपुरा गली नंबर चार निवासी शाहबुद्दीन (35) पुत्र रामजानी राज मिस्त्री हैं। रमजानी भी पूर्व सभासद रह चुके हैं। ईद से दो दिन पहले अप्रैल माह में शाहबुद्दीन जिले से इस्राइल गए थे। शाहबुद्दीन के भाई रियाजुद्दीन ने बताया कि वह वहां इस्राइल के यरुशलम में हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में स्थिति ठीक रही, लेकिन हालात कुछ बदल गए हैं।
शाहबुद्दीन दिन में करीब आठ घंटे के काम करते हैं और फिर होटल में रहने चले जाते हैं। परिजनों ने बताया कि जहां वे रह रहे हैं, वहां भी बमबारी हो रही है। ऐसे में उन्हें पहले अलर्ट कर दिया जाता है। सायरन बजता है और वे आसपास बनी बंकर में चले जाते हैं। काम करने के दौरान दूर दराज के इलाकों से कभी भी बम गिरने की आवाजे भी आती हैं जो दहशत में डालती रहती हैं। उन्होंने बताया कि अल्र्ट के दौरान करीब एक दो घंटे बंकर में रहने के बाद दोबारा उनका कार्य शुरू हो जाता है।
परिजनों ने बताया कि शाहबुद्दीन से अब दिन में करीब तीन बार व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हैं। इस दौरान पूरा परिवार एक साथ उनसे बात करता है। वहां की गिरी हुई इमारतें भी उन्हें कई बार वीडियो कॉल पर दिखाई हैं। ऐसे में उन्हें देखकर काफी दहशत होती है। ऐसे में परिवार के लोग एक साथ उनकी सलामती के लिए दुआ करते हैं। शाहबुद्दीन की पत्नी अपने चार बच्चे के साथ यहीं रहती हैं। जिनमें तीन लड़कियां शामिल हैं।
एक महीने में मिले हैं 1.37 लाख रुपये
परिजनों ने बताया कि वे शुरुआत में वहां जाने के लिए मना कर रहे थे। लेकिन दो साल के लिए अच्छी तनख्वाह मिलने पर उन्होंने हामी भर दी। परिजनों का कहना है कि वहां रहने और खाने की व्यवस्थाएं काफी बेहतर हैं और अधिकतर समय किसी प्रकार की दिक्कत नहीं रही है। उनका कहना है कि लौटकर वे बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं।