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Ghaziabad News: होली अवकाश के बीच आधे दिन चली ओपीडी, मरीज परेशान
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गाजियाबाद। होली के सार्वजनिक अवकाश पर सरकारी अस्पतालों में सोमवार को केवल आधे दिन ओपीडी संचालित हुई। सुबह आठ बजे से 11 बजे तक ही पर्ची बनी, उन्हीं मरीजों को इलाज मिल पाया, जिनकी पर्ची बनी थी। इसके बाद उपचार के लिए आने वाले लोगों को इमरजेंसी का रुख करना पड़ा। इससे इमरजेंसी वार्ड में भी भीड़ बढ़ गई और मरीजों को इंतजार करना पड़ा। ओपीडी जल्दी बंद होने से काफी संख्या में मरीज बिना इलाज के ही वापस लौट गए।
सबसे अधिक दबाव एमएमजी अस्पताल में देखने को मिला। रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को यहां सामान्य रूप से भी मरीजों की संख्या अधिक रहती है। सोमवार को कुल 1327 मरीज ओपीडी में उपचार कराने पहुंचे। हालांकि कई मरीज ऐसे भी रहे जो ग्यारह बजे के बाद अस्पताल पहुंचे और उन्हें जानकारी मिली कि ओपीडी बंद हो चुकी है। ऐसे मरीजों को इमरजेंसी में जाना पड़ा। इमरजेंसी में 112 मरीजों को देखा गया, जिनमें से कई गंभीर हालत में थे और उन्हें भर्ती करना पड़ा। इसी तरह की स्थिति संयुक्त अस्पताल में भी रही। यहां 400 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचे। दोपहर तक 52 मरीजों को इमरजेंसी में उपचार दिया गया। डॉक्टरों और स्टाफ को अतिरिक्त दबाव में काम करना पड़ा।
केस:1
ओपीडी बंद, इमरजेंसी से किया रेफर
विजयनगर निवासी 58 वर्षीय रामेश्वर सिंह सुबह 11 बजे एमएमजी अस्पताल पहुंचे। उन्हें कई दिनों से सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत थी। परिजन उन्हें लेकर ओपीडी पहुंचे, लेकिन पर्ची काउंटर बंद हो चुका था। स्टाफ ने उन्हें इमरजेंसी में जाने की सलाह दी। इमरजेंसी में पहले से मौजूद मरीजों की भीड़ के कारण उन्हें लगभग चालीस मिनट इंतजार करना पड़ा। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें हृदय संबंधी परेशानी बता रेफर कर दिया।
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केस: 2
ओपीडी बंद, इमरजेंसी में करना पड़ा इंतजार
गोंविदपुरम निवासी 32 वर्षीय शबाना अपने पांच वर्षीय बेटे साहिल को लेकर 12 बजे संयुक्त अस्पताल पहुंचीं। बच्चे को तेज बुखार और उल्टी की शिकायत थी। वहां उन्हें पता चला कि ओपीडी 11 बजे तक ही चली थी। परेशान मां बच्चे को लेकर इमरजेंसी पहुंचीं, वहां पहले से कई मरीज उपचार का इंतजार कर रहे थे। करीब आधे घंटे बाद बच्चे को दिखाया गया और दवा दी गई। शबाना ने बताया कि त्योहार के कारण समय में बदलाव की जानकारी उन्हें नहीं थी।
इमरजेंसी में इलाज कराने का दावा
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि ओपीडी बंद होने के बाद इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों को उपचार मुहैया कराया गया। होली को देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है और गंभीर मरीजों की भर्ती तथा जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि अवकाश के दौरान भी आवश्यक सेवाएं पूरी तरह संचालित हैं ताकि किसी मरीज को असुविधा न हो।
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सबसे अधिक दबाव एमएमजी अस्पताल में देखने को मिला। रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को यहां सामान्य रूप से भी मरीजों की संख्या अधिक रहती है। सोमवार को कुल 1327 मरीज ओपीडी में उपचार कराने पहुंचे। हालांकि कई मरीज ऐसे भी रहे जो ग्यारह बजे के बाद अस्पताल पहुंचे और उन्हें जानकारी मिली कि ओपीडी बंद हो चुकी है। ऐसे मरीजों को इमरजेंसी में जाना पड़ा। इमरजेंसी में 112 मरीजों को देखा गया, जिनमें से कई गंभीर हालत में थे और उन्हें भर्ती करना पड़ा। इसी तरह की स्थिति संयुक्त अस्पताल में भी रही। यहां 400 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचे। दोपहर तक 52 मरीजों को इमरजेंसी में उपचार दिया गया। डॉक्टरों और स्टाफ को अतिरिक्त दबाव में काम करना पड़ा।
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केस:1
ओपीडी बंद, इमरजेंसी से किया रेफर
विजयनगर निवासी 58 वर्षीय रामेश्वर सिंह सुबह 11 बजे एमएमजी अस्पताल पहुंचे। उन्हें कई दिनों से सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत थी। परिजन उन्हें लेकर ओपीडी पहुंचे, लेकिन पर्ची काउंटर बंद हो चुका था। स्टाफ ने उन्हें इमरजेंसी में जाने की सलाह दी। इमरजेंसी में पहले से मौजूद मरीजों की भीड़ के कारण उन्हें लगभग चालीस मिनट इंतजार करना पड़ा। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें हृदय संबंधी परेशानी बता रेफर कर दिया।
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केस: 2
ओपीडी बंद, इमरजेंसी में करना पड़ा इंतजार
गोंविदपुरम निवासी 32 वर्षीय शबाना अपने पांच वर्षीय बेटे साहिल को लेकर 12 बजे संयुक्त अस्पताल पहुंचीं। बच्चे को तेज बुखार और उल्टी की शिकायत थी। वहां उन्हें पता चला कि ओपीडी 11 बजे तक ही चली थी। परेशान मां बच्चे को लेकर इमरजेंसी पहुंचीं, वहां पहले से कई मरीज उपचार का इंतजार कर रहे थे। करीब आधे घंटे बाद बच्चे को दिखाया गया और दवा दी गई। शबाना ने बताया कि त्योहार के कारण समय में बदलाव की जानकारी उन्हें नहीं थी।
इमरजेंसी में इलाज कराने का दावा
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि ओपीडी बंद होने के बाद इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों को उपचार मुहैया कराया गया। होली को देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है और गंभीर मरीजों की भर्ती तथा जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि अवकाश के दौरान भी आवश्यक सेवाएं पूरी तरह संचालित हैं ताकि किसी मरीज को असुविधा न हो।
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