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Ghaziabad News: नौ समिति के पदाधिकारियों ने किया आविप कार्यालय का घेराव
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साहिबाबाद। आवास विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार योजना की 12 समितियों पर एक वर्ष पूर्व 170 करोड़ का समायोजन शुल्क लगाकर नोटिस भेजा गया था। इसके साथ ही समितियों का कार्य आविप की ओर से रुकवा दिया है और समितियों का नक्शा तक पास नहीं किया जा रहा। इससे नाराज नौ समिति पदाधिकारियों ने बुधवार को वसुंधरा आवास विकास परिषद कार्यालय का करीब तीन घंटे तक घेराव किया। बाद में अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर समस्या का समाधान निकालने की मांग रखी।
शताब्दी सहकारी समिति के सचिव पीके शर्मा का कहना है कि विभाग 25 वर्ष से समितियों का शोषण कर रहा है। वर्ष 2016 में विभाग के बीच हुए समझौते के तहत समितियां सभी शुल्क जमा कर चुकी हैं। वहीं वर्ष 2022 में विभाग ने शासनादेश के तहत समायोजन शुल्क के नाम पर 170 करोड़ रुपये जमा करने को कहा है, जो कि अनुचित है। विभाग ने जब समझौता किया तब शासनादेश क्यों नहीं देखा या फिर अब शासनादेश के तहत पैसा मांग रहा है तो पूर्व में समितियों द्वारा जमा धनराशि वापस लौटाए। समिति पदाधिकारियों ने जल्द मांग पूरा न होने पर सभी लोग आमरण अनशन करेंगे। वहीं इस मामले में अधीक्षण अभियंता राकेश चंद्रा ने कुछ भी कहने से इन्कार किया और कहा कि यह शासन स्तर का मामला है। वह समितियों द्वारा दिया गया ज्ञापन लखनऊ भेज देंगे।
इनसेट
क्या है पूरा मामला
सिद्धार्थ विहार में समितियों ने वर्ष 1988-92 में किसानों से जमीनें खरीदी थी। आवास विकास परिषद ने समितियों और किसानों की जमीन को सिद्धार्थ विहार योजना में समायोजित कर लिया। समितियों की भूमि समायोजित कर बिना आंतरिक विकास किए बल्क में समायोजित जमीन के बदले महज 50 फीसदी जमीन उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद समितियों को दिया। आरोप है कि आविप ने जो 50 फीसदी जमीन समितियों से ली उसके बदले कोई शुल्क भी नहीं दिया। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि 50 फीसदी जमीन पर आविप को डेढ़ गुना विकास शुल्क, लीज रेंट, फ्री होल्ड चार्ज के नाम पर पहले ही करोड़ों रुपये जमा कर दिया गया। बावजूद इसके वर्ष 2022 में आविप की ओर से समायोजन शुल्क लगाया गया है। उस पर 18 फीसदी ब्याज लग रहा है।
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इनसेट
समितियां जिन्हें नोटिस भेजा
- उतर प्रदेश दूरसंचार सहकारी आवास समिति
- काफमी सहकारी आवास समिति
- आदर्श सहकारी आवास समिति
- लोकसभा कर्मचारी सहकारी आवास समिति
- पंचशील सहकारी आवास समिति
- फ्रेंड्स रेलवे सहकारी आवास समिति
- एनआर कर्मचारी सहकारी आवास समिति
- केंद्रीय जल आयोग सहकारी समिति
- शताब्दी सहकारी आवास समिति
- न्यू जागृति एंक्लेव आवास समिति
- आदर्श प्रगतिशील सहकारी गृह निर्माण समिति
इनसेट
समितियों की यह है मांग
- समायोजन शुल्क के नाम पर की जा रही मांग को निरस्त कर समिति और आविप के बीच हुए समझौते पर ही विभाग कायम रहे
- समायोजन शुल्क की वजह से विभाग समितियों के नक्शे पास करने का काम न रोके
- लोकसभा सहकारी आवास समिति, जिनके सदस्यों ने अपने स्वयं के धन से बहुमंजिले भवन निर्मित किए
हैं, उनकी भूमि की रजिस्ट्री करें।
- पंचशील सहकारी आवास समिति को भी शेष समितियों की तरह कम से कम 24 मीटर चौड़ी सड़क पर भूखंड उपलब्ध कराया जाए।
- समिति एवं बिल्डर के बीच प्रस्तावित अनुबंध की शर्तों को लागू कराएं
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शताब्दी सहकारी समिति के सचिव पीके शर्मा का कहना है कि विभाग 25 वर्ष से समितियों का शोषण कर रहा है। वर्ष 2016 में विभाग के बीच हुए समझौते के तहत समितियां सभी शुल्क जमा कर चुकी हैं। वहीं वर्ष 2022 में विभाग ने शासनादेश के तहत समायोजन शुल्क के नाम पर 170 करोड़ रुपये जमा करने को कहा है, जो कि अनुचित है। विभाग ने जब समझौता किया तब शासनादेश क्यों नहीं देखा या फिर अब शासनादेश के तहत पैसा मांग रहा है तो पूर्व में समितियों द्वारा जमा धनराशि वापस लौटाए। समिति पदाधिकारियों ने जल्द मांग पूरा न होने पर सभी लोग आमरण अनशन करेंगे। वहीं इस मामले में अधीक्षण अभियंता राकेश चंद्रा ने कुछ भी कहने से इन्कार किया और कहा कि यह शासन स्तर का मामला है। वह समितियों द्वारा दिया गया ज्ञापन लखनऊ भेज देंगे।
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क्या है पूरा मामला
सिद्धार्थ विहार में समितियों ने वर्ष 1988-92 में किसानों से जमीनें खरीदी थी। आवास विकास परिषद ने समितियों और किसानों की जमीन को सिद्धार्थ विहार योजना में समायोजित कर लिया। समितियों की भूमि समायोजित कर बिना आंतरिक विकास किए बल्क में समायोजित जमीन के बदले महज 50 फीसदी जमीन उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद समितियों को दिया। आरोप है कि आविप ने जो 50 फीसदी जमीन समितियों से ली उसके बदले कोई शुल्क भी नहीं दिया। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि 50 फीसदी जमीन पर आविप को डेढ़ गुना विकास शुल्क, लीज रेंट, फ्री होल्ड चार्ज के नाम पर पहले ही करोड़ों रुपये जमा कर दिया गया। बावजूद इसके वर्ष 2022 में आविप की ओर से समायोजन शुल्क लगाया गया है। उस पर 18 फीसदी ब्याज लग रहा है।
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समितियां जिन्हें नोटिस भेजा
- उतर प्रदेश दूरसंचार सहकारी आवास समिति
- काफमी सहकारी आवास समिति
- आदर्श सहकारी आवास समिति
- लोकसभा कर्मचारी सहकारी आवास समिति
- पंचशील सहकारी आवास समिति
- फ्रेंड्स रेलवे सहकारी आवास समिति
- एनआर कर्मचारी सहकारी आवास समिति
- केंद्रीय जल आयोग सहकारी समिति
- शताब्दी सहकारी आवास समिति
- न्यू जागृति एंक्लेव आवास समिति
- आदर्श प्रगतिशील सहकारी गृह निर्माण समिति
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समितियों की यह है मांग
- समायोजन शुल्क के नाम पर की जा रही मांग को निरस्त कर समिति और आविप के बीच हुए समझौते पर ही विभाग कायम रहे
- समायोजन शुल्क की वजह से विभाग समितियों के नक्शे पास करने का काम न रोके
- लोकसभा सहकारी आवास समिति, जिनके सदस्यों ने अपने स्वयं के धन से बहुमंजिले भवन निर्मित किए
हैं, उनकी भूमि की रजिस्ट्री करें।
- पंचशील सहकारी आवास समिति को भी शेष समितियों की तरह कम से कम 24 मीटर चौड़ी सड़क पर भूखंड उपलब्ध कराया जाए।
- समिति एवं बिल्डर के बीच प्रस्तावित अनुबंध की शर्तों को लागू कराएं