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Ghaziabad News: एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से टीबी मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
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सीएमओ कार्यालय में धरना प्रदर्शन करते स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
- फोटो : Archive
गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा अब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी टीबी मरीजों को हो रही है। जिले में 18 हजार से अधिक मरीजों का इलाज चल रहा है, लेकिन हड़ताल के कारण टीबी यूनिटों पर दवाओं का वितरण प्रभावित हो रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के सामने इलाज जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है। बाहर से दवाएं खरीदना सभी मरीजों के लिए संभव नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण समेत कई अन्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा हिस्सा एनएचएम के संविदा कर्मचारियों के जिम्मे है। इनके हड़ताल पर जाने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर कामकाज प्रभावित हो रहा है। सीएचसी और पीएचसी पर नियमित टीकाकरण की व्यवस्था बाधित होने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बिना टीका लगवाए लौटना पड़ रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल पर सूचनाएं अपडेट करने का काम भी लंबित है। कर्मचारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में दिक्कत आ रही है।
संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश संयोजक संजय यादव ने बताया कि हड़ताल के कारण टीकाकरण से लेकर टीबी मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने तक का काम प्रभावित हो रहा है। संजय का कहना है कि प्रदेश सरकार की हठधर्मिता से कर्मचारियों की कमी से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही है।
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नियमितीकरण और समान वेतन की मांग
जिले के करीब 1500 संविदा कर्मचारी नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ की सचिव डॉ. चेतन वर्मा ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो समान वेतन मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा सुनिश्चित है। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी एक सप्ताह से आंदोलनरत हैं। इनमें से 350 से अधिक कर्मचारी लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे हैं।
शासन स्तर पर चल रही बातचीत
सीएमओ डॉ. सचिव वैश्य ने बताया कि हड़ताल समाप्त कराने के लिए शासन स्तर पर कर्मचारियों से बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही समाधान निकल आएगा और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकेंगी।
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जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा हिस्सा एनएचएम के संविदा कर्मचारियों के जिम्मे है। इनके हड़ताल पर जाने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर कामकाज प्रभावित हो रहा है। सीएचसी और पीएचसी पर नियमित टीकाकरण की व्यवस्था बाधित होने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बिना टीका लगवाए लौटना पड़ रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल पर सूचनाएं अपडेट करने का काम भी लंबित है। कर्मचारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में दिक्कत आ रही है।
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संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश संयोजक संजय यादव ने बताया कि हड़ताल के कारण टीकाकरण से लेकर टीबी मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने तक का काम प्रभावित हो रहा है। संजय का कहना है कि प्रदेश सरकार की हठधर्मिता से कर्मचारियों की कमी से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही है।
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नियमितीकरण और समान वेतन की मांग
जिले के करीब 1500 संविदा कर्मचारी नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ की सचिव डॉ. चेतन वर्मा ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो समान वेतन मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा सुनिश्चित है। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी एक सप्ताह से आंदोलनरत हैं। इनमें से 350 से अधिक कर्मचारी लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे हैं।
शासन स्तर पर चल रही बातचीत
सीएमओ डॉ. सचिव वैश्य ने बताया कि हड़ताल समाप्त कराने के लिए शासन स्तर पर कर्मचारियों से बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही समाधान निकल आएगा और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकेंगी।