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Ghaziabad News: हत्या, लूट छोड़ लोगों के खातों से निकालने लगे रकम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jul 2023 12:51 AM IST
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Money started withdrawing money from people's accounts except murder, loot
गाजियाबाद। लूट, हत्या, अपहरण और वाहन चोरी जैसे संगीन अपराधों को छोड़कर दिल्ली-एनसीआर में एटीएम बूथ में लोगों की मदद करने के बहाने डेबिट कार्ड बदलकर खातों से रकम निकालने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिरों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। पूछताछ में शातिरों ने बताया कि इस अपराध में कम मेहनत और पकड़े जाने की भी कम संभावना से उन्होंने लोगों को फंसाना शुरू किया। पिछले दो साल में 200 से ज्यादा लोगों को फंसाकर उनके खातों से रकम निकाल चुके हैं।
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एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि पकड़े गए शातिर दिल्ली चांदबाग निवासी सतीश उर्फ काकू और बागपत के चांदीनगर के गांव खैला निवासी सुनील हैं। सतीश मूल रूप से हापुड़ के हाफिजपुर का रहने वाला है। इनके पास से 20 डेबिट कार्ड, एक तमंचा और एक चाकू बरामद किया है। पूछताछ में सतीश ने बताया कि वह सातवीं पास है। पहले वह कार मैकेनिक था। ज्यादा कमाई के लिए उसने वाहन चोरी करना शुरू कर दिया। वाहन चोरी के मामले में जेल गया था। जेल से आने के बाद वह लोनी के आरिफ के संपर्क में आया और फिर एटीएम फ्रॉड करना सीखा। वह गाजियाबाद और बागपत से जेल जा चुका है। एडीसीपी ने बताया कि सतीश के खिलाफ दिल्ली में सात, राजस्थान में एक बागपत में तीन और गाजियाबाद में 11 मुकदमे, जबकि सुनील के खिलाफ दिल्ली में दो, गौतमबुद्धनगर में एक, बागपत में एक और गाजियाबाद में 11 मुकदमे दर्ज हैं। गिरोह के अन्य शातिरों की तलाश की जा रही है।
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अंकित खैला का गुर्गा था सुनील

सुनील ने पूछताछ में बताया कि वह 10वीं पास है और खेती व दूध बेचने का काम करता था। ज्यादा कमाई के लिए वह बागपत के अंकित खैला के संपर्क में आया और लूट, हत्या, अपहरण करने लगा। इन मामलों में वह पुलिस मुठभेड़ में जेल जा चुका है। अंकित की 2021 में तिहाड़ जेल में हत्या हो गई थी। जेल से बाहर आने के बाद वह गांव में ही रहने लगा। इसी दौरान वह सतीश के संपर्क में आया और कम मेहनत और कम जोखिम होने से उसने एटीएम फ्रॉड करना शुरू कर दिया। दिल्ली-एनसीआर समेत राजस्थान, मध्यप्रदेश में वह एटीएम फ्रॉड करने लगा।
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ऐसे फंसाते थे

पूछताछ में शातिरों ने बताया कि सुनसान इलाके वाले एटीएम बूथ पर रुपये निकालने आने वाले लोगों पर नजर रखते हैं। उनका एक साथी एटीएम बूथ में खड़ा रहता है। रुपये निकालने आने वाले की मदद करने के बहाने कार्ड बदल देते हैं। फिर दूसरा कार्ड से जब वह व्यक्ति रुपये निकालने की कोशिश करता है तो उसका पिन कोड देख लेते हैं और फिर दूसरे एटीएम में जाकर रकम निकाल लेते हैं।
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