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Ghaziabad News: बाहरी उम्मीदवारों पर जमकर लुटाया प्यार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2024 01:16 AM IST
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Love lavished on external candidates
गाजियाबाद। विधानसभा चुनाव में भले ही राजनीतिक दलों और मतदाताओं ने स्थानीय नेताओं को तरजीह दी, लेकिन लोकसभा चुनाव में हापुड़-गाजियाबाद सीट से बाहरी नेताओं को ज्यादा मौका मिला। लोकसभा चुनाव में बाहरी और स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा कई बार उठा, लेकिन गाजियाबादियों और हापुड़ के लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। राजनीतिक दलों की लहर में उन्होंने बाहरी लोगों को भी जिताकर संसद भेजने में कंजूसी नहीं की।
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1957 से 2019 तक 16 बार हुए लोकसभा चुनाव में 12 बार सांसदों के चेहरे बदले। इनमें भाजपा के रमेश चंद तोमर लगातार चार बार और वीके सिंह लगातार दो बार चुनाव जीते हैं। सांसद बनकर हापुड़-गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले 12 लोगों में सात बाहरी थे, महज पांच सांसद ऐसे रहे जो गाजियाबाद या हापुड़ क्षेत्र के रहने वाले थे। पांच स्थानीय लोगों के सांसद चुने जाने के बाद अब वर्ष 2009 से गाजियाबाद के मतदाता बाहरी नेताओं को जीत दिलाकर संसद तक पहुंचाते रहे हैं। उम्मीद है कि एक बार फिर बाहरी नेता के सिर गाजियाबाद के सांसद का ताज सज सकता है।
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हापुड़-गाजियाबाद लोकसभा सीट पर जीते सांसद
वर्ष सांसद जीते मूल निवासी
1957 : कृष्ण चंद्र शर्मा (कांग्रेस) सहारनपुर

1962 : कमला चौधरी (कांग्रेस) लखनऊ

1967 : प्रकाश वीर शास्त्री ( निर्दलीय ) रहरा, अमरोहा

1971 : बुद्ध प्रिय मौर्य (कांग्रेस) खैर, अलीगढ़
1977 : कुंवर महमूद अली खान (जनता पार्टी) जोगीपुरा, मेरठ
1980 : अनवर अहमद (जनता पार्टी -सेक्युलर) गाजियाबाद

1984 : केदारनाथ सिंह (कांग्रेस) चकिया
1989 : किशन चंद त्यागी (जनता दल) गाजियाबाद

1991 से 2004 : रमेश चंद तोमर (भाजपा) गाजियाबाद
2004 : सुरेंद्र प्रकाश गोयल (कांग्रेस) गाजियाबाद
गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र

2009 : राजनाथ सिंह (भाजपा) चंदौली

2014 व 2019: वीके सिंह (भाजपा) भिवानी, हरियाणा
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बाहरी नेताओं ने हार का भी किया सामना
गाजियाबाद के मतदाताओं ने कई बार बाहरी लोगों को अपना नेता चुनकर संसद भेजा तो कई बाहरियों को नकार भी दिया। इनमें अभिनेता और फिरोजाबाद से सांसद रह चुके राजबब्बर, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी रीटा सिंह और संघ प्रिय गौतम समेत कई अन्य नाम भी शामिल हैं। संघप्रिय गौतम ने 1984 में, रीटा सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर 1996 में और राजबब्बर ने भी कांग्रेस के टिकट पर 2014 में चुनाव लड़ा था। इन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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