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अब दर्द बढ़ाने लगीं लंबी कतारें
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sat, 10 Dec 2016 12:22 AM IST
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बैंक के बाहर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लगीं लंबी कतारें अब लोगों की पीड़ा बढ़ाने लगी हैं। 31वें दिन भी कैश की किल्लत बरकरार है। लोग सुबह चार-पांच बजे से ही लाइन में लग जाते हैं इसके बावजूद कैश नहीं मिलता। निराश होकर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।
कैश की कमी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि साहिबाबाद, लाइनपार के लोग 10 किलोमीटर दूर पुराने गाजियाबाद की बैंकों में लाइन में लगे हुए हैं।
महिलाओं को बच्चों की फीस के साथ घर चलाने की टेंशन है तो लोग मकान का किराया, दूध, परचून के सामान सहित अन्य खर्चों के लिए कैश जुटाने की जुगत में लगे हुए हैं। मजदूरी में पुराने नोट मिलने से मजदूर भी काम पर जाने की बजाय घर खर्च के लिए बैंकों की लाइन में लगे हुए हैं।
कहां से भरें फीस, कैसे चलाएं घर खर्च
1. नेहरूनगर निवासी लतिका गोसाईं ने कहा कि चार दिन से कैश निकालने के लिए लाइन में लगी हूं मगर नंबर आते-आते पैसा खत्म हो जाता है। घर पर खाने-पीने के सामान के साथ जरूरी बिल का भुगतान सबसे बड़ी टेंशन बना हुआ है। सीनियर सिटीजन लेडीज के लिए भी अलग लाइन लगाई जानी चाहिए।
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2. विजयनगर से नवयुग मार्केट के एटीएम की लाइन में लगीं सीमा देवी कहती हैं कि लाइनपार के अधिकांश एटीएम कई दिनों से खाली पड़े हुए हैं। बच्चों की फीस और घर के जरूरी खर्चों के लिए रोज घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।
3. कल्लूपुरा निवासी रमा भंडारी कहती हैं कि तीन बच्चों की तीन महीने की फीस बकाया है। ऊपर से मकान का किराया भी देना है। एक दिन में एटीएम से केवल दो हजार रुपये निकलने से कैसे घर चलाएं ।
घंटों लाइन में लग रहे सीनियर सिटीजन का छलका दर्द
1. कविनगर के रहने वाले सीनियर सिटीजन एके गुप्ता कहते हैं कि वे तीन दिन से पैसे निकालने के लिए पीएनबी ब्रांच की लाइन में लगे हुए हैं। बेटे के जॉब पर जाने की वजह से उन्हें ही पैसे निकालने आना पड़ता है मगर घंटों लाइन में लगने के बावजूद उन्हें कैश ही नहीं मिल पा रहा है।
2. राजनगर एक्सटेंशन से नेहरूनगर पीएनबी ब्रांच पहुंचे जितेंद्र आनंद कहते हैं कि पैसे निकालने नहीं बल्कि चेकबुक और पे-आर्डर के लिए तीन दिन से आ रहा हूं। रोज तीन से चार घंटे लाइन में लगने के बावजूद निराश होकर लौटना पड़ता है।
3. राजेंद्र नगर से नवयुग मार्केट एसबीआई ब्रांच पहुंचे राजेश प्रसाद का कहना है कि साहिबाबाद क्षेत्र के अधिकांश एटीएम में कई दिनों से कैश नहीं है। इसलिए यहां आना पड़ रहा है। सुबह 11 बजे से लाइन में लगे हुए अब दोपहर का एक बज गया। रोज केवल 2000 के लिए चार से पांच घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है।
मजदूरी में मिल रहे पुराने नोट, छोड़ा काम
1. चमन कालोनी के रहने वाले रहीस कहते हैं कि मजदूरी में भी पुराने नोट मिलने के कारण अभी काम छोड़ रखा है। घर का खर्चा चलाने के लिए वे अपने भाई के साथ एटीएम की लाइन में लगे हुए हैं।
2. घूकना के रहने वाले मुकेश कुमार का कहना है कि वे सूरजपुर ग्रेटर नोएडा की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। कंपनी में पुराने नोट मिलने से पहले वे उन्हें जमा करने के लिए लाइन में लगे। अब पैसे निकालने के लिए जॉब छोड़ कर एटीएम की लाइन में लगे हुए हैं।
दूसरों से मांगकर चला रहे काम
1. लाल क्वार्टर के रहने वाले रविंद्र तिवारी का कहना है कि कैश के लिए लगातार पांच दिन से वे बैंक की लाइन में लगते हैं। नोटबंदी के बाद से एक बार केवल पांच हजार रुपये मिले। अब तो लाइन में नंबर आने तक कैश ही खत्म हो जाता है। दूसरे से रुपये लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
2. गोविंदपुरम के रहने वाले अमित कुमार ने कहा कि रोजाना पांच से छह घंटे बैंक व एटीएम की लाइन में बीत रहे हैं। महीना शुरू होते ही घर का किराया व अन्य खर्चों के लिए दूसरों से लेकर जैसे तैसे काम चला रहे हैं।
3. विवेकानंद नगर के रहने वाले दीपक कुमार का कहना है कि तीन दिन से काम छोड़ कर बैंक की लाइन में लगा हूं। शुक्रवार को सुबह 9:45 बजे लाइन में लगा, छठवां नंबर होने के बावजूद कैश नहीं मिला। घर का खर्चा चलाने की टेंशन परेशान कर रही है।
कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए एसबीआई ई-बडी को करेगा प्रमोट
एसबीआई कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल पंपों पर ई-बडी एप को प्रमोट करेगा। बैंक प्रबंधन इसके लिए पंप कर्मियों को ई-बडी का प्रयोग करना बताएगा ताकि जो वाहन चालक आएं, वह स्वाइप मशीन के अलावा ई-बडी एप से पेट्रोल ले सकें।
कैशलेस ट्रांजेक्शन में चेक, स्वाइप मशीन से डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना, एप से पेमेंट करना शामिल है। एसबीआई के रीजनल मैनेजर एसके गोयल ने बताया कि वस्तुओं को खरीदने के लिए ग्राहक ई-बडी एप का उपयोग कर सकते हैं। शुरुआत में पेट्रोल पंपों पर इसे शुरू कराया जाएगा। हालांकि एप पहले से ही चल रहा है, लेकिन कम लोग ही इसे जानते हैं।
- ई-बडी का इस तरह करें प्रयोग
ई-बडी एक मोबाइल एप है, जिसका उपयोग बेहद ही सरल और सुविधाजनक है। सबसे पहले ग्राहक को अपने स्मार्टफोन में इस एप को इंस्टॉल करना होगा। आईडी और पासवर्ड डाल कर कस्टमर को लॉगिन करना होता है।
बैंक एकाउंट या एटीएम कार्ड का उपयोग करके ई-बडी एकाउंट के वैलेट में रुपये ट्रांसफर करने होंगे, वैलेट में रुपये आने के बाद दुुकानदार के मोबाइल नंबर के जरिए ई-बडी एप से रुपये ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
बैंकों में नहीं मिला कैश, हुआ हंगामा
शहर के अधिकांश बैंकों में शुक्रवार को ड्राई डे रहा। आरबीआई से बैंकों को कैश नहीं मिला। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में लोगों को कैश नहीं मिला। इन बैंकों की ब्रांच के बाहर लाइनें लगीं पर जब लोगों को बताया गया कि कैश नहीं आया है तो सभी लोग वापस लौट गए।
उधर, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक, इंडियन बैंक, एसबीआई व पीएनबी में थोड़े समय तक ही कैश बंटा। इसके बाद नो कैश का बोर्ड लगा दिया गया। आरडीसी स्थित आईसीआईसीआई बैंक के बाहर लगे लोगों ने कैश न मिलने पर हंगामा किया।
लोगों का आरोप था कि वह सुबह पांच बजे से लाइन में खड़े हैं। बैंक खुला और 9 :30 बजे ही बैंक अधिकारियों ने कैश खत्म होने की घोषणा कर दी। लोगों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी अपने परिचितों को ही कैश दे रहे हैं।
- एटीएम बनेंगे सहारा
शनिवार से बैंक लगातार तीन दिन बंद रहेंगे। उस स्थिति में चुनिंदा एटीएम ही लोगों का सहारा बनेंगे। दूसरी ओर एसबीआई के जिन एटीएम से कैश मिल रहा है, वहां ग्राहकों को एक डेबिट कार्ड पर एक बार ही ट्रांजेक्शन करने दिया जा रहा है। अगर ग्राहक दो-तीन डेबिट कार्ड लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें एक कार्ड पर ही रुपये निकालने दिया जाएगा।
छह दिन से नहीं मिला कैश
मसूरी स्थित सिंडिकेट बैंक की ब्रांच में शुक्रवार को ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए बैंक का शटर ही बंद कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शनिवार से बैंकों में लगातार तीन दिन तक बैंक बंद रहेंगे।
इससे पहले सिंडिकेट बैंक की ब्रांच में आग लग जाने से तीन दिन से कैश नहीं मिल रहा। ऐसी हालत में बिना कैश घर का खर्च कैसे चलाया जाए। उधर, बैंक मैनेजर पवन कुमार का कहना है कि बीते बुधवार को रात में शॉर्ट सर्किट की वजह से ब्रांच में आग लग गई थी। आग की वजह से बैंक की अधिकांश फाइलें, पेपर और कंप्यूटर जल गए। कंप्यूटर और वायरिंग को ठीक कराने में समय लग रहा है, जिसकी कारण कैश बांटना फिलहाल संभव नहीं है।
कैश खत्म होने पर लोगों ने की सड़क जाम
कैश खत्म होने के कारण शुक्रवार को मुरादनगर-मोदीनगर में कई बैंकों पर हंगामा हुआ। परेशान लोगों ने करीब 20 मिनट कस्बा रोड जाम किया। शनिवार से तीन दिन तक छुट्टी रहेगी जिस वजह से शुक्रवार को बैंकों पर जबर्दस्त भीड़ रही।
मुरादनगर में कस्बा रोड स्थित इलाहाबाद बैंक में शुक्रवार सुबह 11 बजे कैश खत्म होने की सूचना पर लाइन में लगे लोग भड़क गए और उन्होंने बैंक के सामने सड़क जाम कर दी।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा कर शांत कराया। लोगों का आरोप है कि वह सुबह आठ बजे से लाइन में लगे है और बैंक खुलने के बाद 11 बजे तक कैश खत्म हो जाता है।
- दर्द-ए-कतार
- घंटाें लाइन में खड़े रहते हैं। बैंक कर्मचारी अपने परिचितों को कैश दे रहे हैं जबकि पब्लिक परेशान है। प्रशासन को इस ओर सख्त कदम उठाना चाहिए। - चांद कुमार, मेरठ रोड
- प्राइवेट बैंकों में हालत ज्यादा बदतर हैं। यहां लोगों की कोई नहीं सुनता है। परेशान ग्राहक अगर अपनी बात कहना चाहता है तो उसके साथ बदसलूकी होती है। -विवेक कुमार, लाल कुआं
- अब तो नोट बदलना बंद हो चुका है। इसके बाद भी खाताधारकों को कैश नहीं मिल रहा है। एकाउंट में पैसे होने के बावजूद निकाल नहीं सकते हैं।- अनिवेश कुमार, इंदिरापुरम
कैशलेस इंडिया पर हुई कार्यशाला
नेहरू वर्ल्ड स्कूल में एसबीआई की ओर से कैशलेस इंडिया पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्लास्टिक मनी का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक एमएच जयंत व पूजा चिकारा ने वीडियो के माध्यम से स्टूडेंट्स को बताया कि बैंक के ई-वैलेट व ई-बडी एप के जरिए भी ग्राहक घर बैठे ट्रांजेक्शन कर सकता है।
इससे वह मोबाइल रिचार्ज, बिल व टिकट खरीद सकता है। आने वाला समय कैशलेस ट्रांजेक्शन का है। इससे ग्राहकों को बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह कहीं भी, कभी भी किसी भी शहर में वस्तु का पेमेंट कर सकता है।
नोटबंदी: बैंकों का कारोबार हुआ ठप
नोटबंदी के बाद से बैंकों का कारोबार ठप हो गया है। जब से केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद किए हैं, तब से बैंकों में सिर्फ कैश जमा करने और कैश देने का ही काम चल रहा है। बैंक का करीब 70 प्रतिशत स्टाफ इसी कार्य में लगा है। बैंकों का कारोबार पूरी तरह से ठप है।
केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोट आठ नवंबर को बंद किए थे। एक माह बीत गया है, बैंक कोई दूसरा काम न करके सिर्फ कैश के लेन-देन का ही काम कर रहे हैं। होम लोन, कार लोन, एजूकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड सेल आदि काम ठप सा हो गया है, जिससे बैंकों की कमाई होती है।
बैंक सूत्रों के मुताबिक इस नोटबंदी से कारोबार में कई करोड़ रुपये की गिरावट हुई है। सिर्फ लोन रिकवरी का ही फायदा हुआ है। जो लोन वर्षों से लंबित थे, उनका पेमेंट बैंकों को मिल गया है। एसबीआई की एक ब्रांच में ही 26.48 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
ओबीसी बैंक के मैनेजर धीरेंद्र सिंह शाक्य ने बताया कि नोटबंदी के बाद से पूरा स्टाफ ग्राहकों को संभालने में लगा है। रोजाना कैश लेने और जमा करने के लिए ग्राहकों की लाइन लग जाती है। दिनभर में जो कैश जमा होता है उसकी डिटेल देर रात तक बैंक मुख्यालय भेजी जाती है।
इंडियन ओवरसीज बैंक के एजीएम अनिल कुमार दत्ता के मुताबिक बैंक का कारोबार काफी गिरा है। एक माह में टारगेट के अनुसार लोन दिया जाता था। नोटबंदी के बाद से अभी तक हम सिर्फ कैश बांट और जमा कर रहे हैं। बाकी सारे काम रुके हुए हैं।
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कैश की कमी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि साहिबाबाद, लाइनपार के लोग 10 किलोमीटर दूर पुराने गाजियाबाद की बैंकों में लाइन में लगे हुए हैं।
महिलाओं को बच्चों की फीस के साथ घर चलाने की टेंशन है तो लोग मकान का किराया, दूध, परचून के सामान सहित अन्य खर्चों के लिए कैश जुटाने की जुगत में लगे हुए हैं। मजदूरी में पुराने नोट मिलने से मजदूर भी काम पर जाने की बजाय घर खर्च के लिए बैंकों की लाइन में लगे हुए हैं।
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कहां से भरें फीस, कैसे चलाएं घर खर्च
1. नेहरूनगर निवासी लतिका गोसाईं ने कहा कि चार दिन से कैश निकालने के लिए लाइन में लगी हूं मगर नंबर आते-आते पैसा खत्म हो जाता है। घर पर खाने-पीने के सामान के साथ जरूरी बिल का भुगतान सबसे बड़ी टेंशन बना हुआ है। सीनियर सिटीजन लेडीज के लिए भी अलग लाइन लगाई जानी चाहिए।
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2. विजयनगर से नवयुग मार्केट के एटीएम की लाइन में लगीं सीमा देवी कहती हैं कि लाइनपार के अधिकांश एटीएम कई दिनों से खाली पड़े हुए हैं। बच्चों की फीस और घर के जरूरी खर्चों के लिए रोज घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।
3. कल्लूपुरा निवासी रमा भंडारी कहती हैं कि तीन बच्चों की तीन महीने की फीस बकाया है। ऊपर से मकान का किराया भी देना है। एक दिन में एटीएम से केवल दो हजार रुपये निकलने से कैसे घर चलाएं ।
घंटों लाइन में लग रहे सीनियर सिटीजन का छलका दर्द
1. कविनगर के रहने वाले सीनियर सिटीजन एके गुप्ता कहते हैं कि वे तीन दिन से पैसे निकालने के लिए पीएनबी ब्रांच की लाइन में लगे हुए हैं। बेटे के जॉब पर जाने की वजह से उन्हें ही पैसे निकालने आना पड़ता है मगर घंटों लाइन में लगने के बावजूद उन्हें कैश ही नहीं मिल पा रहा है।
2. राजनगर एक्सटेंशन से नेहरूनगर पीएनबी ब्रांच पहुंचे जितेंद्र आनंद कहते हैं कि पैसे निकालने नहीं बल्कि चेकबुक और पे-आर्डर के लिए तीन दिन से आ रहा हूं। रोज तीन से चार घंटे लाइन में लगने के बावजूद निराश होकर लौटना पड़ता है।
3. राजेंद्र नगर से नवयुग मार्केट एसबीआई ब्रांच पहुंचे राजेश प्रसाद का कहना है कि साहिबाबाद क्षेत्र के अधिकांश एटीएम में कई दिनों से कैश नहीं है। इसलिए यहां आना पड़ रहा है। सुबह 11 बजे से लाइन में लगे हुए अब दोपहर का एक बज गया। रोज केवल 2000 के लिए चार से पांच घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है।
मजदूरी में मिल रहे पुराने नोट, छोड़ा काम
1. चमन कालोनी के रहने वाले रहीस कहते हैं कि मजदूरी में भी पुराने नोट मिलने के कारण अभी काम छोड़ रखा है। घर का खर्चा चलाने के लिए वे अपने भाई के साथ एटीएम की लाइन में लगे हुए हैं।
2. घूकना के रहने वाले मुकेश कुमार का कहना है कि वे सूरजपुर ग्रेटर नोएडा की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। कंपनी में पुराने नोट मिलने से पहले वे उन्हें जमा करने के लिए लाइन में लगे। अब पैसे निकालने के लिए जॉब छोड़ कर एटीएम की लाइन में लगे हुए हैं।
दूसरों से मांगकर चला रहे काम
1. लाल क्वार्टर के रहने वाले रविंद्र तिवारी का कहना है कि कैश के लिए लगातार पांच दिन से वे बैंक की लाइन में लगते हैं। नोटबंदी के बाद से एक बार केवल पांच हजार रुपये मिले। अब तो लाइन में नंबर आने तक कैश ही खत्म हो जाता है। दूसरे से रुपये लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
2. गोविंदपुरम के रहने वाले अमित कुमार ने कहा कि रोजाना पांच से छह घंटे बैंक व एटीएम की लाइन में बीत रहे हैं। महीना शुरू होते ही घर का किराया व अन्य खर्चों के लिए दूसरों से लेकर जैसे तैसे काम चला रहे हैं।
3. विवेकानंद नगर के रहने वाले दीपक कुमार का कहना है कि तीन दिन से काम छोड़ कर बैंक की लाइन में लगा हूं। शुक्रवार को सुबह 9:45 बजे लाइन में लगा, छठवां नंबर होने के बावजूद कैश नहीं मिला। घर का खर्चा चलाने की टेंशन परेशान कर रही है।
कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए एसबीआई ई-बडी को करेगा प्रमोट
एसबीआई कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल पंपों पर ई-बडी एप को प्रमोट करेगा। बैंक प्रबंधन इसके लिए पंप कर्मियों को ई-बडी का प्रयोग करना बताएगा ताकि जो वाहन चालक आएं, वह स्वाइप मशीन के अलावा ई-बडी एप से पेट्रोल ले सकें।
कैशलेस ट्रांजेक्शन में चेक, स्वाइप मशीन से डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना, एप से पेमेंट करना शामिल है। एसबीआई के रीजनल मैनेजर एसके गोयल ने बताया कि वस्तुओं को खरीदने के लिए ग्राहक ई-बडी एप का उपयोग कर सकते हैं। शुरुआत में पेट्रोल पंपों पर इसे शुरू कराया जाएगा। हालांकि एप पहले से ही चल रहा है, लेकिन कम लोग ही इसे जानते हैं।
- ई-बडी का इस तरह करें प्रयोग
ई-बडी एक मोबाइल एप है, जिसका उपयोग बेहद ही सरल और सुविधाजनक है। सबसे पहले ग्राहक को अपने स्मार्टफोन में इस एप को इंस्टॉल करना होगा। आईडी और पासवर्ड डाल कर कस्टमर को लॉगिन करना होता है।
बैंक एकाउंट या एटीएम कार्ड का उपयोग करके ई-बडी एकाउंट के वैलेट में रुपये ट्रांसफर करने होंगे, वैलेट में रुपये आने के बाद दुुकानदार के मोबाइल नंबर के जरिए ई-बडी एप से रुपये ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
बैंकों में नहीं मिला कैश, हुआ हंगामा
शहर के अधिकांश बैंकों में शुक्रवार को ड्राई डे रहा। आरबीआई से बैंकों को कैश नहीं मिला। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में लोगों को कैश नहीं मिला। इन बैंकों की ब्रांच के बाहर लाइनें लगीं पर जब लोगों को बताया गया कि कैश नहीं आया है तो सभी लोग वापस लौट गए।
उधर, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक, इंडियन बैंक, एसबीआई व पीएनबी में थोड़े समय तक ही कैश बंटा। इसके बाद नो कैश का बोर्ड लगा दिया गया। आरडीसी स्थित आईसीआईसीआई बैंक के बाहर लगे लोगों ने कैश न मिलने पर हंगामा किया।
लोगों का आरोप था कि वह सुबह पांच बजे से लाइन में खड़े हैं। बैंक खुला और 9 :30 बजे ही बैंक अधिकारियों ने कैश खत्म होने की घोषणा कर दी। लोगों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी अपने परिचितों को ही कैश दे रहे हैं।
- एटीएम बनेंगे सहारा
शनिवार से बैंक लगातार तीन दिन बंद रहेंगे। उस स्थिति में चुनिंदा एटीएम ही लोगों का सहारा बनेंगे। दूसरी ओर एसबीआई के जिन एटीएम से कैश मिल रहा है, वहां ग्राहकों को एक डेबिट कार्ड पर एक बार ही ट्रांजेक्शन करने दिया जा रहा है। अगर ग्राहक दो-तीन डेबिट कार्ड लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें एक कार्ड पर ही रुपये निकालने दिया जाएगा।
छह दिन से नहीं मिला कैश
मसूरी स्थित सिंडिकेट बैंक की ब्रांच में शुक्रवार को ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए बैंक का शटर ही बंद कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शनिवार से बैंकों में लगातार तीन दिन तक बैंक बंद रहेंगे।
इससे पहले सिंडिकेट बैंक की ब्रांच में आग लग जाने से तीन दिन से कैश नहीं मिल रहा। ऐसी हालत में बिना कैश घर का खर्च कैसे चलाया जाए। उधर, बैंक मैनेजर पवन कुमार का कहना है कि बीते बुधवार को रात में शॉर्ट सर्किट की वजह से ब्रांच में आग लग गई थी। आग की वजह से बैंक की अधिकांश फाइलें, पेपर और कंप्यूटर जल गए। कंप्यूटर और वायरिंग को ठीक कराने में समय लग रहा है, जिसकी कारण कैश बांटना फिलहाल संभव नहीं है।
कैश खत्म होने पर लोगों ने की सड़क जाम
कैश खत्म होने के कारण शुक्रवार को मुरादनगर-मोदीनगर में कई बैंकों पर हंगामा हुआ। परेशान लोगों ने करीब 20 मिनट कस्बा रोड जाम किया। शनिवार से तीन दिन तक छुट्टी रहेगी जिस वजह से शुक्रवार को बैंकों पर जबर्दस्त भीड़ रही।
मुरादनगर में कस्बा रोड स्थित इलाहाबाद बैंक में शुक्रवार सुबह 11 बजे कैश खत्म होने की सूचना पर लाइन में लगे लोग भड़क गए और उन्होंने बैंक के सामने सड़क जाम कर दी।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा कर शांत कराया। लोगों का आरोप है कि वह सुबह आठ बजे से लाइन में लगे है और बैंक खुलने के बाद 11 बजे तक कैश खत्म हो जाता है।
- दर्द-ए-कतार
- घंटाें लाइन में खड़े रहते हैं। बैंक कर्मचारी अपने परिचितों को कैश दे रहे हैं जबकि पब्लिक परेशान है। प्रशासन को इस ओर सख्त कदम उठाना चाहिए। - चांद कुमार, मेरठ रोड
- प्राइवेट बैंकों में हालत ज्यादा बदतर हैं। यहां लोगों की कोई नहीं सुनता है। परेशान ग्राहक अगर अपनी बात कहना चाहता है तो उसके साथ बदसलूकी होती है। -विवेक कुमार, लाल कुआं
- अब तो नोट बदलना बंद हो चुका है। इसके बाद भी खाताधारकों को कैश नहीं मिल रहा है। एकाउंट में पैसे होने के बावजूद निकाल नहीं सकते हैं।- अनिवेश कुमार, इंदिरापुरम
कैशलेस इंडिया पर हुई कार्यशाला
नेहरू वर्ल्ड स्कूल में एसबीआई की ओर से कैशलेस इंडिया पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्लास्टिक मनी का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक एमएच जयंत व पूजा चिकारा ने वीडियो के माध्यम से स्टूडेंट्स को बताया कि बैंक के ई-वैलेट व ई-बडी एप के जरिए भी ग्राहक घर बैठे ट्रांजेक्शन कर सकता है।
इससे वह मोबाइल रिचार्ज, बिल व टिकट खरीद सकता है। आने वाला समय कैशलेस ट्रांजेक्शन का है। इससे ग्राहकों को बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह कहीं भी, कभी भी किसी भी शहर में वस्तु का पेमेंट कर सकता है।
नोटबंदी: बैंकों का कारोबार हुआ ठप
नोटबंदी के बाद से बैंकों का कारोबार ठप हो गया है। जब से केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद किए हैं, तब से बैंकों में सिर्फ कैश जमा करने और कैश देने का ही काम चल रहा है। बैंक का करीब 70 प्रतिशत स्टाफ इसी कार्य में लगा है। बैंकों का कारोबार पूरी तरह से ठप है।
केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोट आठ नवंबर को बंद किए थे। एक माह बीत गया है, बैंक कोई दूसरा काम न करके सिर्फ कैश के लेन-देन का ही काम कर रहे हैं। होम लोन, कार लोन, एजूकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड सेल आदि काम ठप सा हो गया है, जिससे बैंकों की कमाई होती है।
बैंक सूत्रों के मुताबिक इस नोटबंदी से कारोबार में कई करोड़ रुपये की गिरावट हुई है। सिर्फ लोन रिकवरी का ही फायदा हुआ है। जो लोन वर्षों से लंबित थे, उनका पेमेंट बैंकों को मिल गया है। एसबीआई की एक ब्रांच में ही 26.48 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
ओबीसी बैंक के मैनेजर धीरेंद्र सिंह शाक्य ने बताया कि नोटबंदी के बाद से पूरा स्टाफ ग्राहकों को संभालने में लगा है। रोजाना कैश लेने और जमा करने के लिए ग्राहकों की लाइन लग जाती है। दिनभर में जो कैश जमा होता है उसकी डिटेल देर रात तक बैंक मुख्यालय भेजी जाती है।
इंडियन ओवरसीज बैंक के एजीएम अनिल कुमार दत्ता के मुताबिक बैंक का कारोबार काफी गिरा है। एक माह में टारगेट के अनुसार लोन दिया जाता था। नोटबंदी के बाद से अभी तक हम सिर्फ कैश बांट और जमा कर रहे हैं। बाकी सारे काम रुके हुए हैं।