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Ghaziabad News: कोरोना संक्रमण के बाद प्री-मेच्योर बच्चे पैदा होने की बढ़ी संख्या

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jun 2023 12:49 AM IST
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Increased number of pre-mature babies born after corona infection
आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के बाद प्री-मेच्योर बेबी (समय से पहले बच्चे) पैदा होने वालों की संख्या बढ़ गई है। कोरोना से पहले एक साल 600 से 650 प्री-मेच्योर बच्चे पैदा हो रहे थे, लेकिन संक्रमण के दो साल बाद 1623 बच्चे पैदा हुए हैं। डॉक्टर इसका कारण गर्भवती के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होना, प्रदूषण सहित कई अन्य कारण सामने आ रहे हैं। यह आंकड़ा जिला महिला अस्पताल और चार निजी अस्पतालों का हैं।

महिला अस्पताल की सीएमएस एवं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमाता तालिब का कहना है कि पूर्ण गर्भावस्था की अवधि 40 सप्ताह (280 दिन) होती है। गर्भावस्था के 37 सप्ताह पूरा होने से पहले बच्चे का जन्म होता है तो उसे अपूर्णकालिक शिशु (प्री-मेच्योर बेबी) माना जाता है। जो शिशु सातवें या आठवें महीने में जन्म लेते हैं, उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता नौ महीने के बाद पैदा हुए बच्चों की तुलना में कमजोर होती है, इसलिए इन्हें ज्यादा और खास देखभाल की जरूरत होती है। सीएमएस का कहना है कि गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले पैदा हुए बच्चों को प्री-टर्म बेबी कहा जाता है। इन बच्चों को संक्रमण लगने का खतरा अधिक रहता है।
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समय से पहले जन्म का कारण

महिला अस्पताल की पूर्व सीएमएस डॉ. श्रद्धा यादव का कहना है कि अक्सर नौ महीने से पहले जन्म (प्री-मेच्योर बर्थ) का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता है। कई ऐसे कारण है कि जिनकी वजह से महिलाओं को जल्दी प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है। इनमें सबसे अधिक तनाव, प्रदूषण, मधुमेह, हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त महिलाओं में समय से पहले प्रसव पीड़ा का खतरा अधिक होता है। गर्भधारण करने से पहले और गर्भावस्था में पोषण की कमी, गर्भावस्था में धूम्रपान, ड्रग्स और शराब लेने, मूत्र मार्ग में संक्रमण और एमनिओटिक मेंब्रेन इंफेक्शन जैसे कुछ संक्रमणों, पहली बार समय से पहले प्रसव, असामान्य गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा के कमजोर होने के कारण उसका जल्दी खुल जाना भी प्री-मैच्योर बर्थ का कारण हो सकता है। इसके अलावा 17 से कम और 35 से अधिक उम्र की महिलाओं में नौ महीने में से पहले प्रसव होने का खतरा अधिक रहता है।
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प्री-मेच्योर शिशु में होने वाली समस्याएं

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नावेद अख्तर का कहना है कि जल्दी शिशु का जन्म होगा, उसमें स्वास्थ्य समस्याएं भी उतनी ही ज्यादा होंगीं। समय से पहले पैदा हुए बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ही ये लक्षण दिख सकते हैं। बच्चों को सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना, शरीर में चर्बी कम होना, शरीर का तापमान सामान्य रखने में असमर्थता, सक्रियता में कमी, दूध पीने में दिक्कत और शरीर की त्वचा पीली पड़ना।



समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में जानलेवा बीमारियों का खतरा अधिक

फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं। इन बच्चों में ब्रेन हेमरेज या में रक्तस्राव होना, सांस लेने में परेशानी होने पर हेमरेज, फेफड़ों में रक्तस्राव, हाइपोग्लाइसेमिया, निओनेटल सेप्सिस, निमोनिया, एनीमिया, निओनेटल रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम की परेशानी हो सकती है।
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