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Ghaziabad News: रोडवेज के रंग में रंगी डग्गामार बसें, हर माह 40 लाख कर रहीं नुकसान
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ज्योती यादव
साहिबाबाद। आनंद विहार से मोहननगर होते हुए दादरी तक डग्गामार बसों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। यात्रियों को ठगने के लिए डग्गामार बस संचालकों ने उनका रंग भी रोडवेज की बसों के जैसा ही करा दिया है। इससे गच्चा खाकर यात्री उनमें सवार हो जाते हैं और जब टिकट कट जाता है तो डग्गामार का पता चल चलता है। इस तरह जिले में 285 डग्गामार बसें दौड़ रही है और इनमें रोडवेज निगम को करीब 40 लाख रुपये के राजस्व की हानि हर माह हो रही है। आरोप है कि परिवहन विभाग की ढिलाई के चलते इन बसों पर रोक नहीं लग पा रही है।
दरअसल, रोडवेज निगम और परिवहन विभाग के संयुक्त सर्वे से मिले आंकड़े के मुताबिक गाजियाबाद में 285 अनधिकृत बसें दौड़ रही हैं। इनमें मोहननगर क्षेत्र से 211 और लाल कुआं से 74 बसें है। गाजियाबाद और बुलंदशहर दोनों जिलों में इनकी संख्या 720 तक पहुंच गई है। इन बसों से परिवहन निगम को हर माह करीब 40 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। डग्गामार बसें आम तौर पर आनंद विहार बस अड्डे, कौशांबी सर्विस रोड और मोहननगर के आसपास खड़ी रहती हैं। रोडवेज परिचालकों का आरोप है कि निजी बसों के चालक और परिचालक कम किराये और सीधे गंतव्य तक पहुंचाने का भरोसा देकर यात्रियों को रोक लेते हैं। इससे रोडवेज बसों में यात्रियों की संख्या प्रभावित होती है। कई बार यात्री गफलत में डग्गामार को रोडवेज मानकर सवार हो जाते हैं।
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ऐसे करें रोडवेज बसों की पहचान
एक रंग होने के बावजूद कुछ अंतर हैं, जिनके जरिये यात्री डग्गामार बसों की पहचान कर सकते हैं। परिवहन निगम की बसों पर डिपो का नाम और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम या रोडवेज स्पष्ट रूप से लिखा होता है। जबकि डग्गामार बसों पर यह नहीं लिखा होता है। डग्गामार बसों पर डिपो की बजाय बदायूं, एटा, कन्नौज, कानपुर, कासगंज, फर्रुखाबाद और हरदोई जैसे शहरों के नाम लिखे होते हैं।
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ऑपरेशन कवच के तहत 85 वाहनों के चालान, 33 बंद
28 से 30 सितंबर के बीच परिवहन निगम और आरटीओ की संयुक्त कार्रवाई में गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ में 595 डग्गामार बसों की जांच की गई। ऑपरेशन कवच के तहत 85 वाहनों के चालान किए गए और 33 वाहनों को जब्त किया गया। इसके बावजूद क्षेत्र में अनधिकृत बसों का संचालन जारी रहने से कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
परिवहन निगम और आरटीओ समय-समय पर संयुक्त कार्रवाई करके उक्त डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। पिछले माह हुई कार्रवाई में करीब कई बसों का चालान किया गया, लेकिन फिर से यह बसें सड़कों पर आ गई हैं तो कार्रवाई की जाएगी। अंशुल भटनागर, एआरएम कौशांबी डिपो