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Ground Report: आधा उत्पादन-दोगुना भाव, इस साल खास लोगों की ही पहुंच में होगा फलों का राजा आम; खास रिपोर्ट
Wed, 10 Jun 2026 08:56 PM IST
Akash Dubey
शिवमंगल सिंह, अमर उजाला, बुलंदशहर
शिवमंगल सिंह, अमर उजाला, बुलंदशहर
Published by: Akash Dubey
Updated Wed, 10 Jun 2026 08:56 PM IST
सार
मौसम की मार से इस साल आम का उत्पादन आधा हुआ। इससे भाव ऊंचे रहेंगे और आम लोगों की पहुंच से बाहर होंगे। दशहरी का उत्पादन और गुणवत्ता सबसे अधिक प्रभावित हुई है। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर-
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ग्राउंड रिपोर्ट: मौसम की मार से आम को खासा नुकसान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस साल फलों का राजा, आम लोगों की पहुंच से बाहर रह सकता है। इसके भाव ऊंचे रहने से स्वाद का भरपूर आनंद कुछ खास लोग ही ले सकेंगे। इसकी वजह है आम का उत्पादन आधे से भी कम होना। मौसम की मार से आम की फसल को खासा नुकसान हुआ है। बुलंदशहर की फलपट्टी के आम उत्पादकों का मानना है कि सहारनपुर और मलिहाबाद में भी खासा नुकसान हुआ है।
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बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र को उत्तर प्रदेश सरकार ने फल पट्टी घोषित किया हुआ है। यहां मुख्यतः आम का ही उत्पादन होता है। यहां की मुख्य किस्में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रामकेला, रटौल, पुश्तेवाला हैं। इस साल मार्च में जब आम की फलन शुरू हो रही थी, उसी समय बारिश हो गई। इससे दशहरी और लंगड़ा को नुकसान हुआ।
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स्याना क्षेत्र के गांव रूखी निवासी बागवान एडवोकेट केदारनाथ त्यागी ने बताया कि आम की फलन का समय मुख्यतः 15 दिन होता है। पहले एक हफ्ते तो मौसम ठीक रहा, लेकिन इसके बाद बारिश की वजह से फलन प्रभावित हो गई। उन्होंने बताया कि इस साल अच्छी बात यह है कि कीट और बीमारियों से फसल को नुकसान नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि हर साल होपर और कैटर पिलर का आक्रमण होता था, जो इस साल नहीं हुआ।
बुगरासी में जलालपुर रोड पर स्थित अपने बाग में मौजूद किसान मूलचंद राणा ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल आधा उत्पादन भी नहीं है। बारिश की वजह से दशहरी का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुए हैं। मौसम के उतार-चढ़ाव के चलते लागत बढ़ी है। कीट-फंगस रोकने के लिए 1200 से 1500 रुपये प्रति बीघे का खर्चा बढ़ा है। मौसम की मार से चौसा बच गया है।
बुगरासी में माकड़ी रोड पर स्थित बाग में आम की तुड़ाई कराकर पैकिंग में जुटे नूर मोहम्मद ने बताया कि हर साल आम के 400 बीघे के बाग किराये पर लेते हैं। इस साल 30 से 40 फीसदी ही उत्पादन हुआ है। हालांकि, भाव अच्छा रहने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, अभी दिल्ली की आजादपुर मंडी में दशहरी का थोक में 45 से 100 रुपये तक का भाव मिल रहा है, जबकि पिछले साल शुरुआत में 25 से 30 रुपये किलो का भाव मिला था।
फलों को बैग से ढंककर संवार रहे उनका रंग-रूप
बीमारियों और कीड़ों से बचाने के लिए बागवान फलों को पेड़ पर ही बैग (खलतों) में पैक कर रहे हैं। जलालपुर रोड पर अपने बाग में फलों में बैग बंधवा रहे मूलचंद राणा ने बताया कि पेड़ पर जो उच्च क्वालिटी के फल हैं उनको चिह्नित करके वैक्स पेपर के लिफाफे में पैक कर रहे हैं। इससे फलों का रंग थोड़ा सुनहरा रहता है। देखने में भी अच्छा लगता है। बारिश और धूप में फल खराब नहीं होते। इसके अलावा कीड़ों का भी प्रकोप नहीं होता। बैग बांधने में लगभग 10 रुपये किलो तक की लागत आती है। तुड़ाई से लगभग 35 दिन पहले बांधा जाता है। खलता में पैक किया गया आम अन्य की अपेक्षा 20 से 25 रुपये किलो महंगा बिकता है।
बागवान को नहीं मिलता निर्यात का फायदा, बने राष्ट्रीय नीति: त्यागी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वर्ष 2024 में सम्मान प्राप्त कर चुके बागवान केदारनाथ त्यागी का कहना है कि निर्यात का साधारण बागवान को फायदा नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि निर्यात करने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। सरकार इसमें मदद नहीं करती। दूसरा बिचौलिये और एक खास लॉबी के चलते काफी दिक्कतें हैं। उन्होंने बताया कि उच्च क्वालिटी का आम विदेश चले जाने के बाद स्थानीय बाजारों में अच्छा भाव न मिलने से उत्पादकों को उल्टा नुकसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि आम को देश में ही दूसरे प्रदेशों में भेजने में सरकार बागवान की मदद करे। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बननी चाहिए, इससे कश्मीर के सेब उत्पादकों की तरह आम उत्पादकों को भी फायदा मिल सके।
शासन की अनदेखी और प्रशासन की बेरुखी से है मायूसी: आरिफ सईद खान
क्षेत्र के प्रमुख आम उत्पादक आरिफ सईद खान ने बताया कि हमारा क्षेत्र वर्ष 1984 में फ्रूट बेल्ट घोषित कर दिया गया था, लेकिन प्रशाासन की बेरुखी और शासन की अनदेखी के चलते मायूसी है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से मलिहाबाद और सहारनपुर बेल्ट के बागवानों को सरकार से कई तरह की मदद मिल जाती है, उस तरह हमारी तरफ भी ध्यान दिया जाना चाहिए। हम सामान्य वैज्ञानिक सलाह के लिए भी परेशान होते हैं और निजी कंपनियों पर आश्रित रहते हैं। हमारा आढ़तिये और बिचौलिये नाजायज फायदा उठाते हैं। उन्होंने बताया कि यदि आम को विदेश भेजना है तो चिलिंग प्लांट लगाने पड़ेंगे। इनमें पैसा बहुत खर्च होता है, बिना सरकार की मदद के यह संभव नहीं है।
फासला कम करने का कर रहे प्रयास: दिनेश कुमार
बुलंदशहर के जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार अरुण ने बताया कि हम लगातार बाग और तकनीक का फासला कम करने में जुटे हैं। इस साल हमने चार लाख से अधिक फ्रूट बैग वितरित किए हैं। फेंसिंग के लिए भी सरकार की योजना का लाभ बागवानों को दिया जा रहा है। हम प्रयास करते हैं कि लखनऊ और कृषि विज्ञान केंद्र से विशेषज्ञों को बुलाकर बागवानों की मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि बागवानों से भी एक अपील है कि वे वैज्ञानिक सलाह का समय पर पालन करके अधिकतम लाभ लेने का प्रयास करें।