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फाइलों में फंस गई जांच, ओवर बिलिंग करने वाले अस्पतालों पर नहीं आई जांच
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फाइलों में फंस गई जांच, ओवर बिलिंग करने वाले अस्पतालों पर नहीं आई आंच
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ओवर बिलिंग कर मरीजों और उनके परिजनों से लाखों रुपये वसूलने वाले अस्पतालों की जांच तो हुई, मगर उन पर कोई आंच नहीं आई। करीब 25 दिन से यह जांच रिपोर्ट फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। नगर आयुक्त को जांच पूरी कर 20 जून तक जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंपनी थी, लेकिन अभी तक नहीं भेजी गई। डीएम की ओर से गठित दूसरी जांच कमेटी ने भी अस्पतालों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
दूसरी लहर के दौरान शासन ने अस्पतालों में कोरोना के इलाज की दरें तय की थी। एक दिन का अधिकतम इलाज खर्च 18 हजार रुपये तय किया गया था, लेकिन नामचीन अस्पतालों ने 50 हजार से 80 हजार रुपये प्रतिदिन तक वसूले हैं। 10 से 12 दिन का इलाज खर्च 5 लाख से 10 लाख रुपये तक वसूला गया है। लोगों के विरोध के बावजूद अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। करीब डेढ़ माह पहले जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर को ओवर बिलिंग के मामलों की जांच करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले तत्कालीन डीएम अजय शंकर पांडेय भी एसीएम विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई थी। एसीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच की तो कई अस्पतालों ने ओवर बिलिंग की बात कुबूली और मरीजों या परिजनों से वसूली गई रकम लौटा भी दी। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने भी अस्पतालों के बिलों को कब्जे में लेकर जांच की। इस जांच में भी ओवर बिलिंग की बात सामने आई, लेकिन अभी यह कमेटी डीएम को जांच रिपोर्ट ही नहीं सौंप सकी।
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अधिकारी बोले
नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। इसके मिलने के बाद पता चलेगा कि जांच कमेटी ने क्या संस्तुति की है। इसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - राकेश कुमार सिंह, डीएम
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जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। पहले ब्लॉक प्रमुख चुनाव में ड्यूटी और फिर नगर निगम की बोर्ड बैठक की तैयारी के चलते उसे फाइनल नहीं कर पाए हैं। एक-दो दिन में रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी जाएगी। - महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ओवर बिलिंग कर मरीजों और उनके परिजनों से लाखों रुपये वसूलने वाले अस्पतालों की जांच तो हुई, मगर उन पर कोई आंच नहीं आई। करीब 25 दिन से यह जांच रिपोर्ट फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। नगर आयुक्त को जांच पूरी कर 20 जून तक जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंपनी थी, लेकिन अभी तक नहीं भेजी गई। डीएम की ओर से गठित दूसरी जांच कमेटी ने भी अस्पतालों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
दूसरी लहर के दौरान शासन ने अस्पतालों में कोरोना के इलाज की दरें तय की थी। एक दिन का अधिकतम इलाज खर्च 18 हजार रुपये तय किया गया था, लेकिन नामचीन अस्पतालों ने 50 हजार से 80 हजार रुपये प्रतिदिन तक वसूले हैं। 10 से 12 दिन का इलाज खर्च 5 लाख से 10 लाख रुपये तक वसूला गया है। लोगों के विरोध के बावजूद अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। करीब डेढ़ माह पहले जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर को ओवर बिलिंग के मामलों की जांच करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले तत्कालीन डीएम अजय शंकर पांडेय भी एसीएम विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई थी। एसीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच की तो कई अस्पतालों ने ओवर बिलिंग की बात कुबूली और मरीजों या परिजनों से वसूली गई रकम लौटा भी दी। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने भी अस्पतालों के बिलों को कब्जे में लेकर जांच की। इस जांच में भी ओवर बिलिंग की बात सामने आई, लेकिन अभी यह कमेटी डीएम को जांच रिपोर्ट ही नहीं सौंप सकी।
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अधिकारी बोले
नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। इसके मिलने के बाद पता चलेगा कि जांच कमेटी ने क्या संस्तुति की है। इसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - राकेश कुमार सिंह, डीएम
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जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। पहले ब्लॉक प्रमुख चुनाव में ड्यूटी और फिर नगर निगम की बोर्ड बैठक की तैयारी के चलते उसे फाइनल नहीं कर पाए हैं। एक-दो दिन में रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी जाएगी। - महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त