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काबुल जैसे शांत शहर में गूंज रही थीं गोलियों की तड़तड़ाहट, हर कोई था खौफजदा
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काबुल में 24 घंटे में बदल गए महिला-पुरुषों के कपड़े
साहिबाबाद। तालिबानी हर तरफ बंदूक लेकर अफगानियों को ढूंढ रहे थे। एयरपोर्ट पर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए थे। काबुल में सिर्फ गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दे रही थी। हर किसी के चेहरे पर खौफ था। 24 घंटे में महिला-पुरुषों के कपड़े बदल गए। यह कहना है काबुल से लौटीं स्वतंत्र पत्रकार कनिका गुप्ता का।
वैशाली निवासी कनिका गुप्ता ने बताया कि काबुल काफी शांत शहर है, लेकिन तालिबानी कब्जा होने के बाद वहां लोगों की जिंदगी पल-पल बदल रही थी। 24 घंटों में महिलाओं और पुरुषों के कपड़े बदल गए। सड़कों पर गोलियों की तड़तड़ाहट से माहौल सुनसान पड़ गया। देखते ही देखते सड़कों से लेकर चेक पोस्ट और बैंक, मीडिया संस्थान व एयरपोर्ट पर तालिबानियों का कब्जा हो गया। कनिका का कहना है कि अभी काबुल में 300 भारतीय हैं। उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश लाने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को तालिबान का कब्जा होने के बाद तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क किया। 16 अगस्त को भारत का सी-17 ग्लोब मास्टर वायुयान काबुल पहुंचा। तो वह दूतावास के निर्देश पर गाड़ी लेकर तुरंत एयरपोर्ट की तरफ चलने लगी। मगर बीच रास्ते में उन्हें तालिबानियों ने रोक लिया। जिस पर उन्होंने बताया कि वह भारतीय हैं और एयरपोर्ट जा रही हैं। मगर तालिबानी उनकी बात नहीं सुन रहे थे, वह सिर्फ ड्राइवर से बात कर रहे थे। करीब दो घंटे बाद उन्हें तालिबानियों ने अपनी निगरानी में एयरपोर्ट छोड़ा। एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्होंने देखा कि हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ एकत्रित है तो वह ड्राइवर की मदद से पीछे वाले गेट से हवाई पट्टी पर पहुंच गई। वहां वह हालात देखकर काफी घबरा गई थीं, हर जगह सामान टूटा हुआ था। अमेरिकी सेना के कारण हवाई पट्टी खाली थी, मगर वहां लोगों की चप्पलें और अन्य सामान बिखरा पड़ा था। कनिका का कहना है कि अफगानिस्तान में महिलाओं और पुरुषों के कपड़े एक दिन में ही बदल गए। महिलाओं ने जहां हिजाब पहना तो पुरुषों ने सिर पर साफा बांध लिया। कनिका ने मीडिया से वार्ता में बताया कि काबुल में अभी शांति है। अभी वह वहां के लोगों के संपर्क में हैं।
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साहिबाबाद। तालिबानी हर तरफ बंदूक लेकर अफगानियों को ढूंढ रहे थे। एयरपोर्ट पर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए थे। काबुल में सिर्फ गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दे रही थी। हर किसी के चेहरे पर खौफ था। 24 घंटे में महिला-पुरुषों के कपड़े बदल गए। यह कहना है काबुल से लौटीं स्वतंत्र पत्रकार कनिका गुप्ता का।
वैशाली निवासी कनिका गुप्ता ने बताया कि काबुल काफी शांत शहर है, लेकिन तालिबानी कब्जा होने के बाद वहां लोगों की जिंदगी पल-पल बदल रही थी। 24 घंटों में महिलाओं और पुरुषों के कपड़े बदल गए। सड़कों पर गोलियों की तड़तड़ाहट से माहौल सुनसान पड़ गया। देखते ही देखते सड़कों से लेकर चेक पोस्ट और बैंक, मीडिया संस्थान व एयरपोर्ट पर तालिबानियों का कब्जा हो गया। कनिका का कहना है कि अभी काबुल में 300 भारतीय हैं। उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश लाने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को तालिबान का कब्जा होने के बाद तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क किया। 16 अगस्त को भारत का सी-17 ग्लोब मास्टर वायुयान काबुल पहुंचा। तो वह दूतावास के निर्देश पर गाड़ी लेकर तुरंत एयरपोर्ट की तरफ चलने लगी। मगर बीच रास्ते में उन्हें तालिबानियों ने रोक लिया। जिस पर उन्होंने बताया कि वह भारतीय हैं और एयरपोर्ट जा रही हैं। मगर तालिबानी उनकी बात नहीं सुन रहे थे, वह सिर्फ ड्राइवर से बात कर रहे थे। करीब दो घंटे बाद उन्हें तालिबानियों ने अपनी निगरानी में एयरपोर्ट छोड़ा। एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्होंने देखा कि हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ एकत्रित है तो वह ड्राइवर की मदद से पीछे वाले गेट से हवाई पट्टी पर पहुंच गई। वहां वह हालात देखकर काफी घबरा गई थीं, हर जगह सामान टूटा हुआ था। अमेरिकी सेना के कारण हवाई पट्टी खाली थी, मगर वहां लोगों की चप्पलें और अन्य सामान बिखरा पड़ा था। कनिका का कहना है कि अफगानिस्तान में महिलाओं और पुरुषों के कपड़े एक दिन में ही बदल गए। महिलाओं ने जहां हिजाब पहना तो पुरुषों ने सिर पर साफा बांध लिया। कनिका ने मीडिया से वार्ता में बताया कि काबुल में अभी शांति है। अभी वह वहां के लोगों के संपर्क में हैं।
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