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सूरज की रोशनी न मिलने से लोग हो रहे अवसाद ग्रस्त

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jan 2022 12:51 AM IST
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सूरज की रोशनी न मिलने से लोग हो रहे अवसाद ग्रस्त
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गाजियाबाद। सर्दी में कई दिन से धूप नहीं निकलने से तापमान में गिरावट आने और प्रदूषण के कारण डिप्रेशन के 20 फीसदी मामले बढ़ गए हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सर्दी में एसडी (सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर) भी हो जाता है। प्रदूषण के कारण परेशानी और बढ़ गई है। इसका बड़ा कारण हार्मोन में असंतुलन है। खानपान में सावधानी और नियमित योग करके स्वस्थ रह सकते हैं। वर्क फ्रॉम होम में काम करने वालों को अधिक परेशानी हो रही है। लोगों में उदासी और हताशा सामने आ रही है।
धूप न मिलने से सिरोटोनिन का स्तर हो जाता है कम
एमएमजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. साकेत नाथ तिवारी का कहना है कि धूप की कमी से दिमाग में सिरोटोनिन नामक रसायन का स्तर कम हो जाता है। इससे दिमाग में बदलाव होता है। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, जिससे हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है और शरीर में विटामिन डी की कमी होने से दिल और दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। सर्दी के मौसम में लोगों को अवसाद घेर लेता है। सर्दियों में लोग अक्सर ज्यादा चीनी, सोडियम व ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने लगते हैं। ऐसे में मधुमेह व हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों की समस्या बढ़ने लगती है।
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मेलेटोनिन बढ़ने से रहती है सुस्ती
मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि मेलेटोनिन ऐसा हार्मोन है जिसका असर हमारी नींद और मूड पर पड़ता है। एसडी से पीड़ित व्यक्ति में सर्दियों में मेलेटोनिन ज्यादा बनता है। सर्दियों में अंधेरा जल्दी होता है, इसलिए दिमाग को लगता है कि सोने का समय हो गया है, इसलिए शरीर में मेलेटोनिन का उत्पादन जल्दी शुरू हो जाता है। सर्दियों में सुबह के समय भी धूप कम रहती है, इसलिए शरीर में मेलेटोनिन का स्तर ज्यादा हो जाता है और व्यक्ति दिन में भी सुस्ती महसूस करता है।
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इस तरह से करें बचाव
-नियमित योग करें और शरीर में पानी की कमी न हो इसलिए दो से ढाई लीटर गुनगुना पानी जरूर पिएं।
- टीवी और मोबाइल पर अधिक समय बिताने के बजाय दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताएं।
- अगर तनाव या उदासी महसूस हो तो घर के सदस्यों या दोस्तों से बात करें।
- एकाकीपन में रहने से परेशानी बढ़ती है, कोशिश करें कि अकेले में न रहें।
- धूप निकलने पर कुछ देर धूप में जरूर बैठें।
कोई काम करने का नहीं करता मन
मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले सॉफ्टवेयर डेवलपर का कहना है कि पिछले दो महीने से वर्कफ्रॉम होम चल रहा है। सर्दी बढ़ने के बाद से पूरे दिन सिर्फ सोने का मन करता है। डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने बताया कि मनोचिकित्सक को दिखाइए। वहां पर डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा दवाई की जरूरत नहीं है, लेकिन योग करने और दोस्तों और रिश्तेदारों से बातचीत करने और नकारात्मक चीजों से दूर रहने की सलाह दी।

लगता है जैसे कुछ नुकसान हो रहा है
दिल्ली की एक कंपनी में काम करने वाले इंजीनियर का कहना है कि मुझे कोई बीमारी नहीं है, लेकिन एक साल से वर्कफ्राम होम चल रहा है। अब कोई काम करने का मन नहीं करता है। हर समय लगता है कि कुछ नुकसान हो रहा है, लेकिन यह नहीं पता चलता कि किस चीज का नुकसान हो रहा है। कई बार घर में छोटी छोटी बात पर कहासुनी भी हो जाती है।
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