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एनसीआर के खाली फ्लैट बनेंगे प्रवासी कर्मचारियों का ठिकाना

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 15 Dec 2021 12:36 AM IST
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एनसीआर के खाली फ्लैट बनेंगे प्रवासी कर्मचारियों का ठिकाना
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गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वर्ष 2041 तक बढ़ने वाली आबादी के लिए आवास मुहैया कराना भी बड़ी चुनौती होगी। रोजगार, शिक्षा के लिए एनसीआर में आने वाले प्रवासियों को किराए पर मकान उपलब्ध कराने के लिए एनसीआर में बनकर तैयार हो चुके, लेकिन खाली पड़े फ्लैटों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए रीजनल प्लान-2041 में रेंटल हाउसिंग स्कीम का मसौदा तैयार किया गया है।
देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्वामित्व आधारित आवास मॉडल की बजाय किराए के आवास बाजार को विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत पूरे एनसीआर क्षेत्र के शहरी क्षेत्र, कस्बों में खाली संपत्तियों के लिए एक पोर्टल बनाया जाएगा। बनकर तैयार हो जाने के बावजूद खाली पड़े फ्लैट, कार्यालयों के स्थान का सर्वे कराकर पोर्टल पर उनका पंजीकरण कराया जाएगा। इसके लिए विकास प्राधिकरण, नगर निकायों, रेरा के साथ पंजीकृत डेवलपर्स, अन्य एजेंसियों की मदद ली जाएगी। इस पोर्टल पर खाली संपत्तियों का ब्यौरा दर्ज होगा। इस पोर्टल पर संबंधित फ्लैट, मकान या ऑफिस स्पेस का क्षेत्रफल, मासिक किराए आदि का विवरण होगा। किराए पर संपत्ति लेने वाले लोग इन पोर्टल पर जाकर अपनी पसंद की संपत्ति किराए पर ले सकेंगे। इस संबंध में एनसीआर में आने राज्य अपनी पॉलिसी बना सकेंगे। गाजियाबाद और नोएडा में ही करीब 2 लाख फ्लैट बनकर या तो तैयार हो चुके हैं, या उनका निर्माण अंतिम चरण में हैं। इनमें से अधिकांश फ्लैट अभी बिके नहीं है। ऐसे में इन फ्लैटों को भी किराए के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इनके अलावा एनसीआर के गुरुग्राम, मानेसर, भिवाड़ी, बावल, धारुहेड़ा, रेवाड़ी आदि में भी ऐसे मकानों की जरूरत होगी। मकानों की जरूरत को पूरा करने के लिए एनसीआर में एफएआर को बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है।
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गाजियाबाद में काम करते हैं 5 लाख प्रवासी श्रमिक
गाजियाबाद शहरी क्षेत्र के 10 बड़े औद्योगिक क्षेत्र में ही करीब साढ़े तीन लाख प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। इनके अलावा निर्माण और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में करने वाले डेढ़ लाख श्रमिक हैं। इस क्षेत्र में करीब पांच लाख प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। इनमें से अधिकांश किराए के मकानों में रहते हैं। फिलहाल इनके रहने के लिए छोटे-छोटे कमरे बनाकर लोगों ने किराए पर दिए हुए हैं। भविष्य में एनसीआर क्षेत्र का विस्तार होने से इनकी संख्या और बढ़ेगी, इनके लिए मकानों की आवश्यकता भी बढ़ेगी।
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स्लम मुक्त एनसीआर बनाने का प्रयास
औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास अक्सर स्लम एरिया विकसित हो जाते हैं। मकानों की जरूरत को पूरा करने के लिए नई-नई झुग्गी बस्तियां बन जाती हैं। एनसीआर को स्लम मुक्त बनाने के प्रयास में अब रीजनल प्लान-2041 में रेंटल हाउसिंग की जरूरत को महसूस किया गया है।
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