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शहर के 40 वार्ड में नहीं है परिषदीय विद्यालय
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शहर के 40 वार्डों में नहीं हैं परिषदीय विद्यालय
गाजियाबाद। जिले में कुल 455 परिषदीय और 62 राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। दो दशक बाद भी शहर के 40 वार्डों में एक भी परिषदीय विद्यालय नहीं हैं। शहरी क्षेत्र में पिछले दस साल में दो सरकारी विद्यालय ही बन सके हैं। जबकि छात्रों की संख्या 33 फीसदी तक बढ़ गई है।
शहरी क्षेत्र में 100 वार्ड हैं। इनकी आबादी करीब 25 लाख पहुंच गई है। ऐसे में विद्यार्थियों को अन्य इलाकों में कई किलोमीटर का रास्ता तय करके विद्यालय जाना पड़ रहा है।
शहरी क्षेत्र के ऐसे कई विद्यालय हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या विद्यालय की क्षमता के कहीं अधिक पहुंच रही हैं। शिक्षकों की भी बेहद कमी हैं। शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष अनुज त्यागी का कहना है कि जिले में 2011 के बाद से कोई भर्ती नहीं होने से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जबकि पिछले दिनों हुई भर्ती में भी जिले को केवल एक ही शिक्षक मिला था।
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वसुंधरा के बच्चों को झंडापुर या प्रह्लादगढी जाना पड़ता है
वसुंधरा क्षेत्र में एक भी परिषदीय विद्यालय नहीं होने के कारण बच्चों को 5 किमी से अधिक का रास्ता तय करके झंडापुर या प्रह्लादगढी के परिषदीय विद्यालयों में जाना पड़ रहा है। जबकि इंदिरापुरम में 2, वैशाली में 1, कविनगर में 1, राजनगर में 1 परिषदीय विद्यालय है। वहीं वार्ड संख्या 3 से 6, 8, 10, 18, 28,29, 32, 35, 44, 47, 51,52, 54 से 56, 58, 61, 64 से 67, 69, 71 से 75, 77 से 82, 86, 87, 89, 94 से 100 में परिषदीय विद्यालय नहीं हैं।
परिषदीय विद्यालयों के लिए मानक
-1 से 1.5 किमी दायरे में एक प्राथमिक विद्यालय
-3 किमी दायरे में एक जूनियर हाईस्कूल
- परिषदीय विद्यालयों में 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक
कुल परिषदीय विद्यालय- 455
शहर क्षेत्र में विद्यालयों की संख्या- 95
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या- 2330
नगरीय क्षेत्र में परिषदीय विद्यालयों में कुल शिक्षक- 264
एकल परिषदीय विद्यालय- 17
परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या- 1,17,000
राजकीय व एडेड माध्यमिक विद्यालय- 62
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400 शिक्षकों की कमी
शहर के परिषदीय विद्यालयों में लगभग 400 शिक्षकों की कमी है। वहीं 17 एकल विद्यालय हैं। जबकि देहात क्षेत्र के विद्यालयों में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की संख्या अधिक है। वहीं कई इलाकों में विद्यालय नहीं होने की वजह से बच्चों को अन्य वार्डों के विद्यालयों में जाना पड़ता है। साथ ही शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाई जा रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
अमित गोस्वामी, महानगर अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
मौजूदा समय में जिले में एडेड व राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है। वहीं विद्यालयों की संख्या भी सीमित है। ऐसे में बच्चों को अपने आसपास विद्यालय ना होने की वजह से दूर के इलाकों में विद्यालय जाना पड़ता है। वहीं एक तरफ शिक्षक की कमी और दूसरी ओर उपलब्ध शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने से शिक्षकों परेशानी झेलनी पड़ती है।
राजीव त्यागी, जिला संयोजक, उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
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शहरी क्षेत्र में विद्यालयों की संख्या कम है। विद्यालयों का निर्माण कार्य व शिक्षकों की भर्ती का कार्य शासन स्तर सेे होता है। शिक्षकों का स्थानांतरण भी शासन स्तर से होता है। इसके लिए जिला स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता।
-बृजभूषण चौधरी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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गाजियाबाद। जिले में कुल 455 परिषदीय और 62 राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। दो दशक बाद भी शहर के 40 वार्डों में एक भी परिषदीय विद्यालय नहीं हैं। शहरी क्षेत्र में पिछले दस साल में दो सरकारी विद्यालय ही बन सके हैं। जबकि छात्रों की संख्या 33 फीसदी तक बढ़ गई है।
शहरी क्षेत्र में 100 वार्ड हैं। इनकी आबादी करीब 25 लाख पहुंच गई है। ऐसे में विद्यार्थियों को अन्य इलाकों में कई किलोमीटर का रास्ता तय करके विद्यालय जाना पड़ रहा है।
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शहरी क्षेत्र के ऐसे कई विद्यालय हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या विद्यालय की क्षमता के कहीं अधिक पहुंच रही हैं। शिक्षकों की भी बेहद कमी हैं। शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष अनुज त्यागी का कहना है कि जिले में 2011 के बाद से कोई भर्ती नहीं होने से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जबकि पिछले दिनों हुई भर्ती में भी जिले को केवल एक ही शिक्षक मिला था।
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वसुंधरा के बच्चों को झंडापुर या प्रह्लादगढी जाना पड़ता है
वसुंधरा क्षेत्र में एक भी परिषदीय विद्यालय नहीं होने के कारण बच्चों को 5 किमी से अधिक का रास्ता तय करके झंडापुर या प्रह्लादगढी के परिषदीय विद्यालयों में जाना पड़ रहा है। जबकि इंदिरापुरम में 2, वैशाली में 1, कविनगर में 1, राजनगर में 1 परिषदीय विद्यालय है। वहीं वार्ड संख्या 3 से 6, 8, 10, 18, 28,29, 32, 35, 44, 47, 51,52, 54 से 56, 58, 61, 64 से 67, 69, 71 से 75, 77 से 82, 86, 87, 89, 94 से 100 में परिषदीय विद्यालय नहीं हैं।
परिषदीय विद्यालयों के लिए मानक
-1 से 1.5 किमी दायरे में एक प्राथमिक विद्यालय
-3 किमी दायरे में एक जूनियर हाईस्कूल
- परिषदीय विद्यालयों में 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक
कुल परिषदीय विद्यालय- 455
शहर क्षेत्र में विद्यालयों की संख्या- 95
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या- 2330
नगरीय क्षेत्र में परिषदीय विद्यालयों में कुल शिक्षक- 264
एकल परिषदीय विद्यालय- 17
परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या- 1,17,000
राजकीय व एडेड माध्यमिक विद्यालय- 62
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400 शिक्षकों की कमी
शहर के परिषदीय विद्यालयों में लगभग 400 शिक्षकों की कमी है। वहीं 17 एकल विद्यालय हैं। जबकि देहात क्षेत्र के विद्यालयों में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की संख्या अधिक है। वहीं कई इलाकों में विद्यालय नहीं होने की वजह से बच्चों को अन्य वार्डों के विद्यालयों में जाना पड़ता है। साथ ही शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाई जा रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
अमित गोस्वामी, महानगर अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
मौजूदा समय में जिले में एडेड व राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है। वहीं विद्यालयों की संख्या भी सीमित है। ऐसे में बच्चों को अपने आसपास विद्यालय ना होने की वजह से दूर के इलाकों में विद्यालय जाना पड़ता है। वहीं एक तरफ शिक्षक की कमी और दूसरी ओर उपलब्ध शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने से शिक्षकों परेशानी झेलनी पड़ती है।
राजीव त्यागी, जिला संयोजक, उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
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शहरी क्षेत्र में विद्यालयों की संख्या कम है। विद्यालयों का निर्माण कार्य व शिक्षकों की भर्ती का कार्य शासन स्तर सेे होता है। शिक्षकों का स्थानांतरण भी शासन स्तर से होता है। इसके लिए जिला स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता।
-बृजभूषण चौधरी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी