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दस हजार रुपये नहीं दिए तो महिला को किया ओटी से बाहर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 12:36 AM IST
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ghaziyabad
एमएमजी में ऑपरेशन के दस हजार मांगे
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न मिलने पर मरीज को ओटी से किया बाहर
गाजियाबाद। जिला एमएमजी अस्पताल में बृहस्पतिवार को रसौली का ऑपरेशन कराने आई महिला सुमन (50) के तीमारदारों से 10 हजार रुपये मांगे गए। तीमारदारों ने रकम देने से इनकार किया तो आरोप है कि उसे ऑपरेशन थियेटर (ओटी) से बाहर निकाल दिया गया। उनके हंगामा करने पर भी ऑपरेशन नहीं किया गया। मामला सीएमओ तक पहुंच गया, फिर भी महिला को ऑपरेशन हुए बगैर ही घर वापस जाना पड़ा। सीएमएस ने जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की है। इससे तीन दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
कैलाश नगर निवासी सुमन ने बताया, उसे सुबह साढ़े आठ बजे ओटी में ले जाया गया। ऑपरेशन की तैयारी शुरू हो चुकी थी। उसके कपड़े बदल दिए गए थे तभी बाहर से तेज आवाज आने लगी। बाद में पता चला कि एक शख्स ने उसके परिवारीजनों से कहा कि ऑपरेशन तभी होगा, जब 10 हजार रुपये जमा करा दोगे। उसने अपना नाम डॉ. कामिल बताया था। परिवारीजनों ने कहा कि पैसे किस बात के, ये तो सरकारी अस्पताल है और यहां ऑपरेशन निशुल्क होते हैं। इस पर उसने कहा कि पैसे न देने का अंजाम दो मिनट में पता चल जाएगा।
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सुमन का आरोप है कि उसके जाते ही चिकित्सकों ने उसे ओटी से बाहर निकाल दिया। परिवारीजनों ने कारण पूछा तो कह दिया कि ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, ऑपरेशन नहीं होगा। परिवारीजनों ने डॉक्टरों से कहा कि बीपी बढ़ा हुआ है तो उसका इलाज करो। जवाब मिला, मरीज को कहीं और ले जाओ। सुमन के बेटे सुमित ने बताया कि उन लोगों ने हंगामा किया तो चिकित्सा अधिकारी आए। उन्होंने सीएमओ को फोन करके पूरा मामला बताया। ऑपरेशन के लिए तारीख डॉ. वंदना ने तय की थी।
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पथरी के ऑपरेशन के 15 हजार मांगे
कड़कड़ मॉडल निवासी नितिन की पत्नी विनीता का पथरी का ऑपरेशन होना था। नितिन ने भी पैसे मांगने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी को कई दिन तक चक्कर लगवाए गए। बाद में तारीख तय की गई, लेकिन ऑपरेशन के लिए 15 हजार रुपये की मांग की गई है। पैसा नहीं दिया, इसलिए ऑपरेशन नहीं हुआ।
ऑपरेशन निशुल्क है...जांच कराएंगे
एमएमजी जिला अस्पताल में ऑपरेशन की व्यवस्था निशुल्क है। पैसे मांगना गंभीर अपराध है। सीएमओ से फोन पर बात कर पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने को कहा है।
अतुल गर्ग, स्वास्थ्य राज्यमंत्री
कमेटी करेगी जांच
पैसे मांगने का आरोप सही है या ब्लड प्रेशर बढ़ने की बात, इसकी जानकारी जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी। सीएमएस स्तर से जांच कमेटी गठित कर दी गई है।
- डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
आरोप सही मिला तो कार्रवाई होगी
महिला का रक्तचाप बढ़ा हुआ था। वह दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराना चाहती थी, लेकिन अस्पताल में इसकी सुविधा नहीं है। समझाने पर महिला सर्जरी द्वारा ही ऑपरेशन कराने को तैयार हो गई। पूरे मामले की जांच के लिए फिजिशियन डॉ.आरपी सिंह व सर्जन डॉ. अवधेश को सौंपी गई है। तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देंगे। अगर महिला का आरोप सही पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अनुराग भार्गव, सीएमएस
संयुक्त अस्पताल में सर्जन ही नहीं
शहर में ही दो ही सरकारी अस्पताल हैं। संयुक्त और एमएमजी जिला अस्पताल। संयुक्त अस्पताल में एक साल से सर्जन न होने के कारण कोई ऑपरेशन नहीं किया जाता है। इस कारण ऑपरेशन के लिए आने वाले मरीजों को एमएमजी अस्पताल में भेज दिया जाता है। एमएमजी में चार सर्जन हैं।
प्रतिदिन पांच से सात ऑपरेशन
जिला एमएमजी अस्पताल में सर्जन की ओपीडी में प्रतिदिन 60 से 70 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से 20-25 मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत होती हैं। एक ही ओटी होने से एक दिन में पांच से सात ऑपरेशन ही होते हैं। अन्य को लंबी तारीख दे दी जाती है। अस्पताल में हार्निया, अपेंडिक्स, रसौली, हाइड्रोसील, पाइल्स, फिस्टुला के ऑपरेशन किए जाते हैं।

प्राइवेट में 30 से 50 हजार में होता है ऑपरेशन
प्राइवेट अस्पतालों में हार्निया, अपेंडिक्स, रसौली, हाइड्रोसील, पाइल्स, फिस्टुला के ऑपरेशन 30 से 50 हजार में होते हैं। ऐसे में जो लोग इतनी पैसा खर्च करने की स्थिति में नहीं होते, वे निशुल्क ऑपरेशन के लिए सरकारी अस्पताल में आते हैं।
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