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मणिपुर के छात्र की मौत की दोबारा सीबीआई जांच के आदेश

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 01:09 AM IST
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मणिपुर के छात्र की मौत के मामले में दोबारा सीबीआई जांच का आदेश
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गाजियाबाद। पांच साल पहले नोएडा में संदिग्ध परिस्थितियों में मणिपुर के बीएससी के छात्र की मौत के मामले में सीबीआई के न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवांक सिंह ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी। अदालत ने आदेश दिया है कि सीबीआई दोबारा निष्पक्ष व गुणवत्तापूर्ण विवेचना करे। साथ ही अदालत ने डीजीपी उत्तर प्रदेश को आदेश दिया है कि सीबीआई जांच शुरू होने से पहले मामले की विवेचना में शामिल रहे नोएडा सेक्टर-20 थाने में तैनात रहे तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 नवंबर की तारीख तय की है।
यह था मामला
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता दुष्यंत कुमार ने बताया कि मणिपुर इंफाल निवासी 22 वर्षीय बीएससी तृतीय का छात्र प्रवीश चनम सात सितंबर 2017 को दिल्ली के सफदरजंग एंक्लेव क्षेत्र में रहने वाले दोस्तों के पास आया था। वह आठ सितंबर को दोस्तों के साथ ग्रेटर नोएडा एक्सपो मार्ट में रात को आयोजित म्यूजिकल कॉन्सर्ट में आया था। वहां से वह लापता हो गया था। दोस्तों ने नॉलेज पार्क थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
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9 सितंबर की शाम को निठारी कार मार्केट के पास मुर्गा मंडी में सड़क पर प्रवीश का शव मिला था। नोएडा पुलिस उसकी शिनाख्त नहीं कर पाई थी और अज्ञात में ही पोस्टमार्टम करा दिया। दो दिन बाद पुलिस ने मृतक का अंतिम संस्कार करा दिया। प्रवीश चनम के परिजन उसकी तलाश करते हुए 14 सितंबर 2017 को नोएडा सेक्टर-20 थाने में पहुंचे। यहां उन्होंने मृतक के फोटो से उसकी पहचान की। अभी तक प्रवीश की मौत रहस्य बनी हुई है।
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2018 को मुख्यमंत्री ने की थी सिफारिश
प्रवीश की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए परिजनों ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। इस मामले में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन ने 15 दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने 29 जनवरी को केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी। पांच जुलाई 2019 को सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। 17 महीने बाद दिसंबर 2020 में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाते हुए मामले की फाइल बंद कर दी। क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति लगाते हुए अभियोजन पक्ष ने याचिका दायर की थी।
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