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86 अस्पतालों में नहीं है आग बुझाने के इंतजाम
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86 अस्पतालों में नहीं है आग बुझाने के इंतजाम
गाजियाबाद। जिले में 12 सरकारी सहित 86 अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम नहीं है। इन अस्पतालों में कई कोविड अस्पताल भी शामिल हैं। अग्नि शमन विभाग द्वारा की गई 112 अस्पतालों की जांच में सरकारी स्तर पर सिर्फ महिला अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं, जबकि प्राइवेट में सिर्फ 25 अस्पताल में व्यवस्था संतोषजनक है।
अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम का जायजा लेते हुए फायर विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, इसके बावजूद किसी भी अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई। अग्नि सुरक्षा विभाग के निरीक्षण में सरकारी अस्पतालों में आग बुझाने के लिए सिर्फ सिलिंडर ही रखे मिले थे। कोविड अस्पताल लेवल-2 के प्रभारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय तेवतिया भी महानिदेशक और अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य को इस संबंध में पत्र भेज चुके हैं। पत्र में कहा गया था कि संयुक्त अस्पताल में अप्रैल से कोविड अस्पताल चल रहा है। अब तक तीन हजार से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं। अस्पताल में डायलिसिस भी जारी है। आग बुझाने के लिए लगाए गए उपकरण खराब हो चुके हैं। 100 बेड के कोविड अस्पताल में आग बुझाने के समुचित इंतजाम न होने से कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। सीएमएस ने अधिकारियों को यह भी बताया था कि 15 सितंबर 2020 को अग्निशमन विभाग द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण रिपोर्ट में आग बुझाने के इंतजाम पर्याप्त नहीं बताए गए थे। उपकरण खराब एवं निष्क्रिय पाए गए थे। उन्होंने यह भी बताया था कि परिसर में डाक्टर सहित अन्य स्टाफ के आवास भी बने हैं। इसमें डॉक्टर, नर्स, चालक, स्वीपर और वार्ड ब्वाय भी रहते हैं। परिसर के पास में ही सीएनजी पेट्रोल पंप एवं सीएमओ कार्यालय भी स्थित है।
सरकारी अस्पतालों में हजारों लोग आते हैं इलाज कराने
अग्नि शमन विभाग की रिपोर्ट में जिला एमएमजी अस्पताल, कोविड अस्पताल लेवल-2, पीएचसी नंगला अटौर, शाहपुर बम्हैटा, भोवापुर, लोनी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंडोला, डासना, मुरादनगर, भोजपुर, मोदीनगर, न्यू पीएचसी दुहाई असालतनगर, पसोंडा, चिरोड़ी, फरुखनगर में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। इसमें जिला एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, इसके अलावा यह घनी आबादी के बीच में स्थित है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एक दिन में 600-900 मरीज तक इलाज के लिए आते हैं।
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जिले में 112 अस्पतालों में आग बुझाने की व्यवस्था की जांच के लिए 43 कोविड एवं 69 नान कोविड अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इसमें सिर्फ 26 अस्पतालों में ही आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अस्पताल प्रबंधकों को चेतावनी देने के साथ ही सूची सीएमओ को सौंप दी गई है, जिससे कि व्यवस्था में सुधार किया जा सके।
सुनील कुमार सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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अग्निशमन विभाग द्वारा जांच आख्या मिली है। जिन अस्पतालों में कमियां हैं, उन्हें नोटिस भेजकर दूर कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिन अस्पतालों में फायर फायटिंग की व्यवस्था में सुधार नहीं होगा उनका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के बारे में शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया जा रहा है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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गाजियाबाद। जिले में 12 सरकारी सहित 86 अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम नहीं है। इन अस्पतालों में कई कोविड अस्पताल भी शामिल हैं। अग्नि शमन विभाग द्वारा की गई 112 अस्पतालों की जांच में सरकारी स्तर पर सिर्फ महिला अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं, जबकि प्राइवेट में सिर्फ 25 अस्पताल में व्यवस्था संतोषजनक है।
अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम का जायजा लेते हुए फायर विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, इसके बावजूद किसी भी अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई। अग्नि सुरक्षा विभाग के निरीक्षण में सरकारी अस्पतालों में आग बुझाने के लिए सिर्फ सिलिंडर ही रखे मिले थे। कोविड अस्पताल लेवल-2 के प्रभारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय तेवतिया भी महानिदेशक और अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य को इस संबंध में पत्र भेज चुके हैं। पत्र में कहा गया था कि संयुक्त अस्पताल में अप्रैल से कोविड अस्पताल चल रहा है। अब तक तीन हजार से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं। अस्पताल में डायलिसिस भी जारी है। आग बुझाने के लिए लगाए गए उपकरण खराब हो चुके हैं। 100 बेड के कोविड अस्पताल में आग बुझाने के समुचित इंतजाम न होने से कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। सीएमएस ने अधिकारियों को यह भी बताया था कि 15 सितंबर 2020 को अग्निशमन विभाग द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण रिपोर्ट में आग बुझाने के इंतजाम पर्याप्त नहीं बताए गए थे। उपकरण खराब एवं निष्क्रिय पाए गए थे। उन्होंने यह भी बताया था कि परिसर में डाक्टर सहित अन्य स्टाफ के आवास भी बने हैं। इसमें डॉक्टर, नर्स, चालक, स्वीपर और वार्ड ब्वाय भी रहते हैं। परिसर के पास में ही सीएनजी पेट्रोल पंप एवं सीएमओ कार्यालय भी स्थित है।
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सरकारी अस्पतालों में हजारों लोग आते हैं इलाज कराने
अग्नि शमन विभाग की रिपोर्ट में जिला एमएमजी अस्पताल, कोविड अस्पताल लेवल-2, पीएचसी नंगला अटौर, शाहपुर बम्हैटा, भोवापुर, लोनी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंडोला, डासना, मुरादनगर, भोजपुर, मोदीनगर, न्यू पीएचसी दुहाई असालतनगर, पसोंडा, चिरोड़ी, फरुखनगर में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। इसमें जिला एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, इसके अलावा यह घनी आबादी के बीच में स्थित है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एक दिन में 600-900 मरीज तक इलाज के लिए आते हैं।
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जिले में 112 अस्पतालों में आग बुझाने की व्यवस्था की जांच के लिए 43 कोविड एवं 69 नान कोविड अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इसमें सिर्फ 26 अस्पतालों में ही आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अस्पताल प्रबंधकों को चेतावनी देने के साथ ही सूची सीएमओ को सौंप दी गई है, जिससे कि व्यवस्था में सुधार किया जा सके।
सुनील कुमार सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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अग्निशमन विभाग द्वारा जांच आख्या मिली है। जिन अस्पतालों में कमियां हैं, उन्हें नोटिस भेजकर दूर कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिन अस्पतालों में फायर फायटिंग की व्यवस्था में सुधार नहीं होगा उनका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के बारे में शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया जा रहा है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ