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एलआईसी के निजीकरण के विरोध मे उतरे कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
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एफडीआई का विरोध करते एलआईसी के कर्मचारी।
एलआईसी के निजीकरण के विरोध मे उतरे कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
गाजियाबाद। केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में एलआईसी का आईपीओ लाकर इसकी पूंजी के हिस्से को शेयर मार्केट से संबद्ध करना और बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का विरोध शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को एलआईसी के अधिकारी और कर्मचारी संगठनों ने एक दिवसीय हड़ताल और प्रदर्शन कर दोनों घोषणाओं को वापस लेने की मांग की।
जीटी रोड स्थित एलआईसी के चारों कार्यालयों में हड़ताल रही। एलआईसी एंपलॉयज यूनियन और एलआईसी क्लास-1 फेडरेशन के आह्वान पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने नारेबाजी कर अपनी मांगे रखीं। यूनियन के सचिव संजय कौशिक ने कहा कि दोनों प्रस्ताव भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। सरकार द्वारा एलआईसी के आईपीओ को जारी करने का निर्णय 42 करोड़ भारतीय पालिसीधारकों के हितों के ऊपर शेयर मार्केट करने वालों लाभ का अवसर देगा। केंद्र सरकार के लोन का 25 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा एलआईसी के द्वारा ही वहन किया जाता है। बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किए जाने से विदेशी पूंजी को सौंपने का कार्य किया जा रहा है। एलआईसी के संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर इस हड़ताल में सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, विकास अधिकारियों एवं अभिकर्ताओं ने शामिल होकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। बीमा संगठनों ने सरकार से मांग की है कि दोनों प्रस्तावों पर पुनर्विचार करके इन्हें वापस लिया जाए। इसके अलावा बीमाकर्मियों का वेतन समझौता भी लागू किया जाए। प्रदर्शन में भीम सिंह नेगी, पंकज शर्मा, संदीप गुप्ता, राजीव शर्मा, नुपुर अवस्थी, अर्चना जैन, रीना गौतम, नीलम, शिवांग, मोहित यादव, अरुणेश शुक्ला, अमितराज, आर. अनुराधा, दीपक गुप्ता, विनीत रावत, पूनम सिंह, सुनील, विजय सिंह, राकेश सक्सेना, नेहा सैनी, शीशपाल यादव, सीमा मितल, अर्नब मंडल, अनुज चौहान, कांता रानी, अनिल कौशिक, अमित सिंह, सुमित कुमार, प्रीति त्यागी, अनुराग सचान, गौरव कुमार, चंचल सैनी, राजीव गुप्ता, जगतनारायण, आलोक सक्सेना, सुरभि विश्नोई आदि मौजूद रहे।
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गाजियाबाद। केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में एलआईसी का आईपीओ लाकर इसकी पूंजी के हिस्से को शेयर मार्केट से संबद्ध करना और बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का विरोध शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को एलआईसी के अधिकारी और कर्मचारी संगठनों ने एक दिवसीय हड़ताल और प्रदर्शन कर दोनों घोषणाओं को वापस लेने की मांग की।
जीटी रोड स्थित एलआईसी के चारों कार्यालयों में हड़ताल रही। एलआईसी एंपलॉयज यूनियन और एलआईसी क्लास-1 फेडरेशन के आह्वान पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने नारेबाजी कर अपनी मांगे रखीं। यूनियन के सचिव संजय कौशिक ने कहा कि दोनों प्रस्ताव भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। सरकार द्वारा एलआईसी के आईपीओ को जारी करने का निर्णय 42 करोड़ भारतीय पालिसीधारकों के हितों के ऊपर शेयर मार्केट करने वालों लाभ का अवसर देगा। केंद्र सरकार के लोन का 25 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा एलआईसी के द्वारा ही वहन किया जाता है। बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किए जाने से विदेशी पूंजी को सौंपने का कार्य किया जा रहा है। एलआईसी के संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर इस हड़ताल में सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, विकास अधिकारियों एवं अभिकर्ताओं ने शामिल होकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। बीमा संगठनों ने सरकार से मांग की है कि दोनों प्रस्तावों पर पुनर्विचार करके इन्हें वापस लिया जाए। इसके अलावा बीमाकर्मियों का वेतन समझौता भी लागू किया जाए। प्रदर्शन में भीम सिंह नेगी, पंकज शर्मा, संदीप गुप्ता, राजीव शर्मा, नुपुर अवस्थी, अर्चना जैन, रीना गौतम, नीलम, शिवांग, मोहित यादव, अरुणेश शुक्ला, अमितराज, आर. अनुराधा, दीपक गुप्ता, विनीत रावत, पूनम सिंह, सुनील, विजय सिंह, राकेश सक्सेना, नेहा सैनी, शीशपाल यादव, सीमा मितल, अर्नब मंडल, अनुज चौहान, कांता रानी, अनिल कौशिक, अमित सिंह, सुमित कुमार, प्रीति त्यागी, अनुराग सचान, गौरव कुमार, चंचल सैनी, राजीव गुप्ता, जगतनारायण, आलोक सक्सेना, सुरभि विश्नोई आदि मौजूद रहे।
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