फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   ghazibad news

पैसे दो... कोरोना की कैसी भी रिपोर्ट लो

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2021 12:50 AM IST
विज्ञापन
ghazibad news
एमएमजी अस्पताल में स्टिंग के दौरान कैमरे में कैद कर्मचारी। - फोटो : GHAZIABAD City
पैसे दो...कोरोना की कैसी भी रिपोर्ट लो
विज्ञापन

गाजियाबाद। कोरोना की जांच अब रिश्वत खोरी का जरिया बन गई है। स्वास्थ्य विभाग में सौदेबाजी कर आपके मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार हो रही हैं। विभाग का स्टाफ आपदा को रिश्वतखोरी के अवसर के तौर पर भुनाने में लगा है। बस उसके बदले आपको एक निर्धारित रिश्वत देना होगा। उसके बाद अगले दिन आपको मनचाही रिपोर्ट मिल जाएगी। यह पूरा खेल स्वास्थ्य विभाग की उसी खिड़की से चल रहा है जहां से हर रोज जिले भर के मरीजों को रिपोर्ट दी जाती है। अमर उजाला टीम जब कोरोना जांच कराने पहुंची तो खिड़की पर मौजूद कर्मचारी बिना जांच के एक हजार रुपये लेकर कोरोना की पॉजिटिव रिपोर्ट देने को तैयार हो गया।
एमएमजी अस्पताल में हुए स्टिंग ऑपरेशन के बीच कैमरे में कैद कर्मचारी साफ कह रहा है कि आपको कुछ फायदा लेना है तो हमारे बारे में भी सोचना पड़ेगा। बातचीत से साफ हो गया कि विभाग में किस पैमाने पर धड़ल्ले से जांच के नाम पर भ्रष्टाचार चल रहा है। यहां तक कि यही कर्मचारी होम क्वारंटीन के दौरान घर पर जाने वाली चिकित्सकों की टीम को भी मैनेज करने का फार्मूला बात रहा है। खिड़की पर तैनात लैब टेक्नीशियन खुलेआम एक हजार रुपये की मांग करता है। इससे पता चलता है कि अब अनलॉक के बीच जैसे-जैसे कार्यालय खुल रहे हैं तो विभाग में फर्जी तरीके से रिपोर्ट तैयार कर रिश्वत का कारोबार भी चलाया जा रहा है। टीम ने एक कंपनी का कर्मचारी बनकर बात की तो कोरोना जांच से जुड़ी खेल की परतें खुल गईं।
विज्ञापन

रिपोर्टर- भैया कोरोना की रिपोर्ट बनवानी है।
कर्मचारी- बन जाएगी
रिपोर्टर- भैया पॉजिटिव रिपोर्ट चाहिए।
कर्मचारी- कहां जाना है।
रिपोर्टर- महाराष्ट्र जाना है।
कर्मचारी- मुंबई, कब जाना है।
रिपोर्टर- 21 को।
कर्मचारी- फिर अभी क्यों बनवा रहे हो।
रिपोर्टर- अभी नहीं बनवानी है। पता कर रहे हैं।
कर्मचारी- किसकी बनवानी है।
रिपोर्टर- हम दो लोग हैं।
कर्मचारी- हो जाएगी, लेकिन जब पॉजिटिव रिपोर्ट पोर्टल पर चढ़ाएेंगे तो स्वास्थ्य विभाग की टीम आपके घर आ सकती है। वो आपको संभालना होगा।
रिपोर्टर - इसमें क्या होगा।
कर्मचारी- वो देखेंगे की आप क्वारंटीन हैं या नहीं। आपके घर में जो और लोग हैं, उनकी भी जांच करानी होगी।
रिपोर्टर- इसका कोई उपाय। दरअसल पॉजिटिव रिपोर्ट बनवाने की मुख्य वजह दस दिन की तनख्वाह बचाना है।
कर्मचारी- हां, मुझे पता है। इससे आपकी तनख्वाह नहीं कटेगी। देखो अगर मैं स्वास्थ्य विभाग की मोहर लगाकर बिना पोर्टल पर चढ़ाए रिपोर्ट दे दूं तो यह सब दिक्कत नहीं होगी, लेकिन कंपनी ऑनलाइन चेक करेगी तो दिक्कत हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रिपोर्टर- अगर मैं ऐसा दिखा दूं कि मैं रहता ही अलग हूं।
कर्मचारी- फिर ठीक है। बार-बार नहीं, एक बार ही जाएंगें।
रिपोर्टर- भाई हमें पहले ऑफिस से छुट्टी के लिए पॉजिटिव और फिर ऑफिस जाने के लिए निगेटिव रिपोर्ट भी बनवानी है।
कर्मचारी- निगेटिव तो बन जाएगी। निगेटिव में कोई दिक्कत नहीं है। बस पॉजिटिव में दिक्कत है।
रिपोर्टर- ठीक है, कितने पैसे लगेंगे।
कर्मचारी- दो हजार रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर- कुछ कम कर लो भाई, दो हजार एक के या दोनों के।
कर्मचारी- नहीं, नहीं, दोनों के दो हजार, एक रिपोर्ट का एक हजार।
रिपोर्टर- कुछ देख लो भाई।
कर्मचारी- नहीं, पॉजिटिव रिपोर्ट के लिए काफी दिक्कत है। ऊपर तक हिसाब है।
रिपोर्टर- अपना नंबर दे दो भाई।
कर्मचारी- लो नोट कर लो, जब दिखाना होगा तो एक दिन पहले आ जाना। जैसे मैं कल बना के दूंगा तो आज रात में या कल सुबह चढ़ेगी।
रिपोर्टर- ठीक है, मैं कॉल कर दूंगा भाई।
--------
- इसलिए बनवा रहे हैं पॉजिटिव रिपोर्ट
अभी तक कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट बनवाने की बात सामने आती रही है लेकिन अब लोग कोरोना संक्रमण के नाम पर ऑफिस से मिलने वाली रियायत (छुट्टी) के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट बनवा रहे हैं। रिपोेर्ट पॉजिटिव बनाने के बाद होम क्वारंटीन के नाम पर बाहर घूमने से लेकर घर के दूसरे काम कर लेते हैं। ऐसे ही कुछ लोग स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर रिपोर्ट बनवा रहे हैं।
- एंटीजन जांच में भी लगते रहे हैं आरोप
कोरोना की एंटीजन जांच में भी स्वास्थ्य विभाग पर रिपोर्ट में खेल करने के आरोप लगते रहे हैं। इसमें पॉजिटिव रिपोर्ट को सुविधानुसार निगेटिव दिखाने की बात सामने आती रही है। यही नहीं कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं कि घर में एक व्यक्ति पॉजिटिव हुआ तो उसके पूरे घर की जानकारी लेने के साथ ही उसकी भी जांच रिपोर्ट निगेटिव हो जाती है, जबकि घर में अन्य सदस्यों की जांच भी नहीं होती है। यह वाकया सीएमओ कार्यालय में कार्यरत स्टॉप के साथ भी हो चुका है, जिसमें कर्मचारी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पोर्टल पर कर्मचारी ने जांच की तो पूरे घर के सदस्यों की जांच रिपोर्ट निगेटिव अपलोड थी।
ये लोग करा रहे कोरोना जांच
कोरोना संक्रमण में कमी होने के बाद अब सिर्फ वही लोग जांच करा रहे हैं जिसका ऑपरेशन होना है या जिसका प्रसव होना है। इनके अलावा एक बड़ी संख्या उनकी भी है जिनको ऑफिस में रिपोर्ट लगानी है या कहीं बाहर यात्रा में दिखानी है।

प्रतिदिन ढाई से तीन हजार लोगों की जांच की जा रही है। अभी इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है, जिसमें रिपोर्ट देने में किसी स्टॉफ द्वारा लापरवाही या गलती की जा रही हो। अगर किसी स्टॉफ ने पैसे लेकर रिपोर्ट देने की बात कही है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed