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गाजियाबाद: तमिलनाडु फिर जीती एसडीआरएफ सीबीआरएन प्रतियोगिता, एनडीआरएफ महानिदेशक ने किया सम्मानित
Thu, 05 Nov 2026 01:51 PM IST
अनुज कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 05 Nov 2026 01:51 PM IST
सार
गाजियाबाद में आयोजित एसडीआरएफ सीबीआरएन प्रतियोगिता में तमिलनाडु ने एक बार फिर पहला स्थान हासिल किया, जिसे एनडीआरएफ महानिदेशक ने सम्मानित किया। उत्तराखंड दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर रहे, जबकि तमिलनाडु ने पिछली प्रतियोगिता में भी पहला स्थान प्राप्त किया था।
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एनडीआरएफ महानिदेशक ने किया सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चक्रवात जैसी आपदाओं में पूर्व चेतावनी मिलने से बचाव दल पहले से तैयारी कर लेते हैं, लेकिन सीबीआरएन जैसी आपात स्थितियां अचानक भी पैदा हो सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए एसडीआरएफ की टीमों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह बात एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद ने बृहस्पतिवार को संजयनगर स्थित एनडीआरएफ की आठवीं वाहिनी में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय एसडीआरएफ सीबीआरएन प्रतियोगिता-2026 के समापन समारोह में कही।
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प्रतियोगिता में तमिलनाडु की टीम ने एक बार फिर पहला स्थान हासिल किया। महानिदेशक पीयूष आनंद ने बताया कि पिछली प्रतियोगिता में भी तमिलनाडु की टीम प्रथम रही थी। उत्तराखंड की टीम ने इस बार दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि बिहार की टीम पहली बार तीसरे स्थान पर रही।
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महानिदेशक ने विजेता टीमों को सम्मानित किया। तमिलनाडु की टीम को एक लाख रुपये के चेक के साथ प्रत्येक सदस्य को मेडल, प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, उत्तराखंड की टीम को प्रमाणपत्र के साथ 75 हजार रुपये और बिहार की टीम को प्रमाणपत्र के साथ 50 हजार रुपये की राशि दी गई।
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दो से पांच नवंबर तक आयोजित प्रतियोगिता में राजस्थान, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात की एसडीआरएफ टीमों ने हिस्सा लिया। इस वर्ष कुल 19 टीमों ने प्रतियोगिता में भाग लिया, जिनमें से आठ टीमें अंतिम चरण तक पहुंचीं। महानिदेशक ने बताया कि सीबीआरएन का अर्थ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपात स्थितियों से है। प्रतियोगिता का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में एसडीआरएफ जवानों की तकनीकी दक्षता, त्वरित कार्रवाई और आपसी समन्वय को मजबूत करना था, ताकि जनजीवन और संपत्ति की सुरक्षा की जा सके।
पीयूष आनंद ने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का उद्देश्य आपदा के समय लोगों की जान बचाना है। सीबीआरएन जैसी आपात स्थितियों में प्रशिक्षित बचाव दल की तत्परता बेहद जरूरी होती है। इसके साथ ही आपदा के शुरुआती समय में स्थानीय लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों, पूर्व सैनिकों, शिक्षकों, बच्चों और महिलाओं को भी आपदा के दौरान शुरुआती मदद के लिए जागरूक और प्रशिक्षित किया जा सकता है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें हर जगह तत्काल नहीं पहुंच सकतीं, ऐसे में स्थानीय लोगों की तैयारी प्रभावितों को शुरुआती सहायता देने में मददगार हो सकती है।
उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त शिविरों के माध्यम से भी प्रशिक्षण ले रही हैं। मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल और कर्नाटक में ऐसे शिविर शुरू किए जा चुके हैं। इनमें दोनों बलों के जवान एक-दूसरे के अनुभव और कार्यप्रणाली को समझते हैं, जिससे आपदा के दौरान बेहतर तालमेल बनाया जा सके। इस व्यवस्था को अन्य राज्यों में भी विस्तार देने की योजना है। एनडीआरएफ सभी राज्यों की एसडीआरएफ टीमों को सीबीआरएन आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएगा। महानिदेशक ने प्रतियोगिता में शामिल टीमों से प्रशिक्षण और व्यवस्थाओं को लेकर सुझाव भी लिए।