{"_id":"635ed50746c90d3e3314d1cb","slug":"ghaziabad-shahibabad-news-gbd246896621","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad Digital Rape: पड़ोसी ने छह वर्षीय मासूम के साथ किया डिजिटल दुष्कर्म, आरोपी को अंकल कहती थी बच्ची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad Digital Rape: पड़ोसी ने छह वर्षीय मासूम के साथ किया डिजिटल दुष्कर्म, आरोपी को अंकल कहती थी बच्ची
Mon, 31 Oct 2022 01:18 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 01:18 AM IST
सार
निजी अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी ने बताया कि उसके पति की पिछले वर्ष मौत हो गई थी। 14 और छह साल की दो बेटियों औरऔर नौ साल के बेटे के साथ वह किराये पर रहती हैं। शनिवार रात वह ड्यूटी पर गई थी। रविवार सुबह घर पहुंची तो मासूम बच्ची और दोनों भाई-बहन भी उससे लिपटकर रोने लगे। कारण पूछने पर बड़ी बेटी ने बताया कि पड़ोस पड़ोस में किराये पर रहने वाले अंकल ने छोटी के साथ गंदी हरकत की।
विज्ञापन
गाजियाबाद पुलिस (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के एक गांव में शनिवार रात छह साल की मासूम के साथ पड़ोसी ने डिजिटल दुष्कर्म कर दिया। इस दौरान बच्ची के नाबालिग भाई और बहन भी साथ थे लेकिन उन्हें घटना का पता नहीं चला। बच्ची के दर्द से कराहने के बाद घटना की जानकारी हुई। एक निजी अस्पताल में कार्यरत मां के ड्यूटी से घर लौटने पर बच्चों ने इसकी जानकारी दी। फिलहाल आरोपी फरार है और पुलिस की दो टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगाई गई हैं।
निजी अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी ने बताया कि उसके पति की पिछले वर्ष मौत हो गई थी। 14 और छह साल की दो बेटियों औरऔर नौ साल के बेटे के साथ वह किराये पर रहती हैं। शनिवार रात वह ड्यूटी पर गई थी। रविवार सुबह घर पहुंची तो मासूम बच्ची और दोनों भाई-बहन भी उससे लिपटकर रोने लगे। कारण पूछने पर बड़ी बेटी ने बताया कि पड़ोस पड़ोस में किराये पर रहने वाले अंकल ने छोटी के साथ गंदी हरकत की।
यह सुनकर महिला के होश उड़ गए। वह पड़ोसी के मकान में पूछताछ के लिए गई तो पता चला कि आरोपी कमरे में ताला लगाकर फरार हो गया। उन्होंने पुलिस को तुरंत घटना की सूचना दी। इंदिरापुरम पुलिस ने मासूम को चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा। इंदिरापुरम थाना प्रभारी देवपाल सिंह पुंडीर का कहना है कि बच्ची की मां की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
कमरे से बाहर नहीं निकल रही मासूम
घटना की सूचना के बाद इंदिरापुरम थाने से महिला पुलिसकर्मी बच्ची के घर गई तो टीम को काफी देर तक बच्ची को मेडिकल के लिए भेजने में मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद से बच्ची इतनी डर गई है कि वह कमरे से बाहर नहीं निकल रही। पुलिस अधिकारियों के कहने पर मां ने बच्ची को किसी तरह समझाकर बाहर निकाला। इसके बाद उसे मेडिकल के लिए भेजा गया।
विज्ञापन
निजी अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी ने बताया कि उसके पति की पिछले वर्ष मौत हो गई थी। 14 और छह साल की दो बेटियों औरऔर नौ साल के बेटे के साथ वह किराये पर रहती हैं। शनिवार रात वह ड्यूटी पर गई थी। रविवार सुबह घर पहुंची तो मासूम बच्ची और दोनों भाई-बहन भी उससे लिपटकर रोने लगे। कारण पूछने पर बड़ी बेटी ने बताया कि पड़ोस पड़ोस में किराये पर रहने वाले अंकल ने छोटी के साथ गंदी हरकत की।
विज्ञापन
यह सुनकर महिला के होश उड़ गए। वह पड़ोसी के मकान में पूछताछ के लिए गई तो पता चला कि आरोपी कमरे में ताला लगाकर फरार हो गया। उन्होंने पुलिस को तुरंत घटना की सूचना दी। इंदिरापुरम पुलिस ने मासूम को चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा। इंदिरापुरम थाना प्रभारी देवपाल सिंह पुंडीर का कहना है कि बच्ची की मां की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
कमरे से बाहर नहीं निकल रही मासूम
घटना की सूचना के बाद इंदिरापुरम थाने से महिला पुलिसकर्मी बच्ची के घर गई तो टीम को काफी देर तक बच्ची को मेडिकल के लिए भेजने में मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद से बच्ची इतनी डर गई है कि वह कमरे से बाहर नहीं निकल रही। पुलिस अधिकारियों के कहने पर मां ने बच्ची को किसी तरह समझाकर बाहर निकाला। इसके बाद उसे मेडिकल के लिए भेजा गया।
दो बेटियों का पिता है आरोपी, बच्ची कहती थी अंकल
डिजिटल दुष्कर्म की शिकार छह साल की बच्ची आरोपी को अंकल कहती है। आरेपी अलीगढ़ जनपद का रहने वाला है और दूध सप्लाई का काम करता है। यहां पर वह किराये के मकान में अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहता था। उसकी दो बेटियां और एक बेटा है। घटना से पहले बड़ी बेटी मां के साथ बाहर गई थी लेकिन मां ने उसे आलू खरीदने के बाद घर भेज दिया था। वह घर पहुंची और रसोई में कुछ काम करने लगी। तभी आरोपी ने छह साल की मासूम को अकेले में ऊपर कमरे में बुला लिया। वहां उसके साथ घटना को अंजाम दिया। बच्ची ने पहले आधी रात को बड़ी बहन को घटना की जानकारी दी।
बच्ची की काउंसिलिंग जरूरी
मनोचिकित्सक डॉ. रिषभ जैन ने बताया कि पीड़ित के साथ पूरी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। परिवार को बच्ची की काउंसिलिंग अवश्य करानी चाहिए। परिवार के लोग ही उसे इस सदमे से बाहर निकाल सकते हैं।
क्या है डिजिटल दुष्कर्म
डिजिटल शब्द को सुनकर लोग अक्सर इंटरनेट या सोशल मीडिया के बारे में सोचने लगते हैं जबकि विदेशों में डिजिटल दुष्कर्म शब्द काफी समय से चल रहा है। अब भारत में भी इस शब्द को कानून में भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। अंग्रेजी शब्दकोश में अंगुली, अंगूठा, पैर की अंगुली को भी डिजिट से संबोधित किया जाता है। ऐसे में कोई व्यक्ति किसी बच्ची, युवती या महिला की सहमति के बिना उसके निजी अंगों को छेड़ता है तो वो डिजिटल दुष्कर्म माना जाता है।
आजीवन कारावास की हो सकती है सजा
संयुक्त निदेशक अभियोज अनिल कुमार उपाध्याय ने बताया कि इस प्रकार के मामलों को अदालतें जघन्य श्रेणी में रखती हैं। जब पीड़ित किशोरी और बच्ची होती है तो मामला संवेदनशील हो जाता है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 वर्ष से आजीवन कारवास तक की सजा का प्रावधान है।
बच्ची की काउंसिलिंग जरूरी
मनोचिकित्सक डॉ. रिषभ जैन ने बताया कि पीड़ित के साथ पूरी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। परिवार को बच्ची की काउंसिलिंग अवश्य करानी चाहिए। परिवार के लोग ही उसे इस सदमे से बाहर निकाल सकते हैं।
क्या है डिजिटल दुष्कर्म
डिजिटल शब्द को सुनकर लोग अक्सर इंटरनेट या सोशल मीडिया के बारे में सोचने लगते हैं जबकि विदेशों में डिजिटल दुष्कर्म शब्द काफी समय से चल रहा है। अब भारत में भी इस शब्द को कानून में भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। अंग्रेजी शब्दकोश में अंगुली, अंगूठा, पैर की अंगुली को भी डिजिट से संबोधित किया जाता है। ऐसे में कोई व्यक्ति किसी बच्ची, युवती या महिला की सहमति के बिना उसके निजी अंगों को छेड़ता है तो वो डिजिटल दुष्कर्म माना जाता है।
आजीवन कारावास की हो सकती है सजा
संयुक्त निदेशक अभियोज अनिल कुमार उपाध्याय ने बताया कि इस प्रकार के मामलों को अदालतें जघन्य श्रेणी में रखती हैं। जब पीड़ित किशोरी और बच्ची होती है तो मामला संवेदनशील हो जाता है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 वर्ष से आजीवन कारवास तक की सजा का प्रावधान है।