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Ghaziabad: बाइक और रुपयों की जिद पूरी न होने पर युवक ने दी जान, फांसी पर लटक कर मौत को लगाया गले

Tue, 11 Oct 2022 01:20 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: गाजियाबाद ब्यूरो Updated Tue, 11 Oct 2022 01:20 AM IST
सार

बुलेट, नया मोबाइल और जेब खर्च के 15,000 रुपये नहीं मिलने पर युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले उसने साइकिल की जिद पूरी न होने पर उसने नींद की गोलियां खा ली थीं। एक निजी अस्पताल में डॉक्टर ने उपचार कर उसकी जान जान बचाई थी।

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young man gave his life when the insistence of the bike and money was not fulfilled
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

इंदिरापुरम के रीगल शिप्रा सनसिटी सोसायटी में सोमवार दोपहर बुलेट, नया मोबाइल और जेब खर्च के 15,000 रुपये नहीं मिलने पर पारस (18) ने आत्महत्या कर ली। रात करीब आठ बजे मां सुषमा और रिश्तेदार ने कमरे में फंदे लटका देख कर पुलिस को सूचना दी। जांच में पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

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सोसायटी के फ्लैट में सुषमा अपने बड़े बेटे पीयूष और छोटे बेटे पारस के साथ रहती हैं। बड़ा बेटा पीयूष नोएडा सेक्टर 60 की निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि पारस ने पिछले साल 11वीं कक्षा करने के बाद आगे पढ़ाई नहीं की। सोमवार दोपहर करीब 2:00 बजे पारस ड्यूटी पर चले गए थे। इस दौरान घर पर सुषमा और एक रिश्तेदार के अलावा पारस था। सुषमा ने बताया कि दोपहर में पारस खाना नहीं खाया था और उसके बाद कमरे में चला गया। रात करीब 8 बजे तक वह बाहर नहीं आया तो उन्हें शक हो गया। वह और एक रिश्तेदार कमरे के बाहर पहुंचीं तो काफी प्रयास के बाद गेट नहीं खुला। उन्होंने खिड़की से झांक कर देखा तो पारस पंखे से लटका हुआ था।
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इंदिरापुरम थाना प्रभारी देवपाल सिंह पुंडीर ने बताया कि कि पारस को बचपन में ही एक पैर में लकवा हो गया था। उसने 11वीं कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद आगे शिक्षा नहीं ली। पूर्व में उसके एक बड़े भाई ने भी आत्महत्या की थी।
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साइकिल की जिद पर खाई थीं गोलियां
पुलिस की जांच पड़ताल के दौरान परिवार ने बताया कि पिछले साल भी पारस ने साइकिल दिलाने की जिद की थी लेकिन वह उसे साइकिल दिलाने में असमर्थ है। इससे नाराज होकर उसने काफी सारी नींद की गोलियां खा ली थीं। वह उसे निजी अस्पताल में ले गए और डॉक्टर ने उपचार कर जान बचाई थी।

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