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दरिंदगी की डरावनी यादों से दूर ले जाएंगे बिटिया को
सार
दरिंदगी की डरावनी यादों से दूर ले जाएंगे बिटिया कोखोड़ा।हमने तमाम कोशिशें करके देख लीं, पर वह इस गहरे सदमे से उबर ही नहीं पा रही है।उनका आरोप यह भी है कि अभी तक पुलिस अधिकारियों ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया।
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विस्तार
दरिंदगी की डरावनी यादों से दूर ले जाएंगे बिटिया को
खोड़ा। दरिंदगी की शिकार बनी हमारी बिटिया के लिए असहनीय पीड़ा को सहन करना बहुत मुश्किल हो रहा है। हमने तमाम कोशिशें करके देख लीं, पर वह इस गहरे सदमे से उबर ही नहीं पा रही है। इसलिए हमने फैसला लिया है कि जिस खोड़ा क्षेत्र में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ, वहां से हम अपना घर बेच देंगे और दिल्ली में जाकर बसेंगे ताकि डरावनी यादें उसका पीछा करना छोड़ दें। यह कहते हुए बच्ची की मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा, सामूहिक दुष्कर्म की वजह से 12 साल की उम्र में बच्चे को जन्म देकर उसे लग रहा है कि उसकी जिंदगी जिल्लत से भर गई है। गुमसुम होकर पत्थर सी बनी बेटी की यह हालत देखी नहीं जा रही है। उसे अस्पताल से छुट्टी मिलते ही हम नई जगह चले जाएंगे ताकि उसे जिल्लत भरी जिंदगी से छुटकारा मिले और वह नए सिरे से नई जिंदगी शुरू कर सके। हम खोड़ा के लोगों के रिश्ते-नाते तोड़कर सभी संपर्क खत्म कर लेंगे। हमने खोड़ा से किसी भी तरह का वास्ता रखा तो बेटी के जीवन से न अंधेरा दूर होगा और न ही नया सवेरा निकलेगा।
बेटी भी नहीं रहना चाहती खोड़ा में
पिता का कहना है कि अगले पांच-छह दिनों में बेटी के टांके कट जाएंगे। उसके बाद 14 अक्तूबर को उनके और बेटी के कोर्ट में बयान दर्ज होंगे। शनिवार सुबह बेटी नींद से उठी तो वह दर्द के बारे में बताने लगी। उसे किसी तरह समझाया और डॉक्टर से बात कराई। उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनका फ्लैट है। उसी में रहेंगे। बेटी भी खोड़ा में नहीं रहना चाहती है।
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सीएम से मांगूंगा इकलौती बेटी के लिए न्याय
माता-पिता ने बातचीत में कहा कि वह अपनी इकलौती बेटी के न्याय के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलना चाहते हैं। उनसे मिलकर ही बेटी की पढ़ाई, लिखाई, जीवन-यापन और अच्छे भविष्य के लिए बात करेंगे। वह पुलिस अधिकारियों से लगातार गुहार लगा रहे हैं कि कोई उन्हें सीएम से मिलवा दें। उनका आरोप यह भी है कि अभी तक पुलिस अधिकारियों ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया। हालांकि अस्पताल में दो महिला पुलिसकर्मी हैं। वहीं, उनका यह कहना है कि बेटी को रानी लक्ष्मीबाई योजना से मिलने वाली पांच लाख की आर्थिक मदद से वह संतुष्ट नहीं है। क्योंकि इतने पैसों से बेटी का दोबारा भविष्य नहीं बन पाएगा।
एक-दूसरे का ढांढस बंधा रहे माता-पिता
बच्ची के माता-पिता ने बताया कि बेटी को देखकर आंसू नहीं रुक रहे। वे एक-दूसरे का ढांढस बंधा रहे हैं लेकिन दोनों से ही बेटी की हालत देखी नहीं जा रही। हम दोनों कामगार हैं। पिता ने बताया कि वह जब शाम को घर आते तो बेटी चॉकलेट मांगती थी। उसने अस्पताल में भी चॉकलेट मांगी तो दी नहीं, क्योंकि हालत सामान्य होने तक डॉक्टर ने मना किया है। उसने तीन दिन पहले ही मेरठ मेडिकल कॉलेज में बच्चे को जन्म दिया है। पुलिस ने शुक्रवार को नवजात का डीएनए सैंपल लिया। डासना जेल में बंद सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों के डीएनए से इसका मिलान कराया जाएगा ताकि बच्चे के पिता का पता चल सके। इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी।
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खोड़ा। दरिंदगी की शिकार बनी हमारी बिटिया के लिए असहनीय पीड़ा को सहन करना बहुत मुश्किल हो रहा है। हमने तमाम कोशिशें करके देख लीं, पर वह इस गहरे सदमे से उबर ही नहीं पा रही है। इसलिए हमने फैसला लिया है कि जिस खोड़ा क्षेत्र में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ, वहां से हम अपना घर बेच देंगे और दिल्ली में जाकर बसेंगे ताकि डरावनी यादें उसका पीछा करना छोड़ दें। यह कहते हुए बच्ची की मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा, सामूहिक दुष्कर्म की वजह से 12 साल की उम्र में बच्चे को जन्म देकर उसे लग रहा है कि उसकी जिंदगी जिल्लत से भर गई है। गुमसुम होकर पत्थर सी बनी बेटी की यह हालत देखी नहीं जा रही है। उसे अस्पताल से छुट्टी मिलते ही हम नई जगह चले जाएंगे ताकि उसे जिल्लत भरी जिंदगी से छुटकारा मिले और वह नए सिरे से नई जिंदगी शुरू कर सके। हम खोड़ा के लोगों के रिश्ते-नाते तोड़कर सभी संपर्क खत्म कर लेंगे। हमने खोड़ा से किसी भी तरह का वास्ता रखा तो बेटी के जीवन से न अंधेरा दूर होगा और न ही नया सवेरा निकलेगा।
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बेटी भी नहीं रहना चाहती खोड़ा में
पिता का कहना है कि अगले पांच-छह दिनों में बेटी के टांके कट जाएंगे। उसके बाद 14 अक्तूबर को उनके और बेटी के कोर्ट में बयान दर्ज होंगे। शनिवार सुबह बेटी नींद से उठी तो वह दर्द के बारे में बताने लगी। उसे किसी तरह समझाया और डॉक्टर से बात कराई। उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनका फ्लैट है। उसी में रहेंगे। बेटी भी खोड़ा में नहीं रहना चाहती है।
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सीएम से मांगूंगा इकलौती बेटी के लिए न्याय
माता-पिता ने बातचीत में कहा कि वह अपनी इकलौती बेटी के न्याय के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलना चाहते हैं। उनसे मिलकर ही बेटी की पढ़ाई, लिखाई, जीवन-यापन और अच्छे भविष्य के लिए बात करेंगे। वह पुलिस अधिकारियों से लगातार गुहार लगा रहे हैं कि कोई उन्हें सीएम से मिलवा दें। उनका आरोप यह भी है कि अभी तक पुलिस अधिकारियों ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया। हालांकि अस्पताल में दो महिला पुलिसकर्मी हैं। वहीं, उनका यह कहना है कि बेटी को रानी लक्ष्मीबाई योजना से मिलने वाली पांच लाख की आर्थिक मदद से वह संतुष्ट नहीं है। क्योंकि इतने पैसों से बेटी का दोबारा भविष्य नहीं बन पाएगा।
एक-दूसरे का ढांढस बंधा रहे माता-पिता
बच्ची के माता-पिता ने बताया कि बेटी को देखकर आंसू नहीं रुक रहे। वे एक-दूसरे का ढांढस बंधा रहे हैं लेकिन दोनों से ही बेटी की हालत देखी नहीं जा रही। हम दोनों कामगार हैं। पिता ने बताया कि वह जब शाम को घर आते तो बेटी चॉकलेट मांगती थी। उसने अस्पताल में भी चॉकलेट मांगी तो दी नहीं, क्योंकि हालत सामान्य होने तक डॉक्टर ने मना किया है। उसने तीन दिन पहले ही मेरठ मेडिकल कॉलेज में बच्चे को जन्म दिया है। पुलिस ने शुक्रवार को नवजात का डीएनए सैंपल लिया। डासना जेल में बंद सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों के डीएनए से इसका मिलान कराया जाएगा ताकि बच्चे के पिता का पता चल सके। इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी।