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दिल्ली समेत 14 रूटों पर सीएनजी बसें चलाकर प्रदूषण रोकेगा परिवहन निगम
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दिल्ली समेत 14 रूटों पर सीएनजी बसें चलाकर प्रदूषण रोकेगा परिवहन निगम
कौशांबी। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के तहत परिवहन निगम ने अब दिल्ली-एनसीआर समेत 14 रूटों पर सिर्फ सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) बसों के ही संचालन का फैसला किया है। प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने दिल्ली एनसीआर, कौशांबी, साहिबाबाद, गाजियाबाद पुराना बस अड्डा, मेरठ, गढ़, लोनी, खुर्जा, अलीगढ़, बृजघाट, नोएडा, हापुड़, बरेली, मोदीनगर और मुरादनगर रूटों पर चालकों को सीएनजी बस ही चलाने के लिए कहा है। गाजियाबाद रीजन में परिवहन निगम के पास 150 अनुबंधित बसें हैं जिनमें से सिर्फ 39 सीएनजी बसें इन रूटों पर दौड़ेंगीं।
कारवां अध्यक्ष विनय कुमार मित्तल ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में याचिका दायर कर कौशांबी में प्रदूषण का मुद्दा उठाया था। इस मामले में कोर्ट और एनजीटी ने सुनवाई कर परिवहन निगम को रोडवेज बेडे़ से डीजल बसों को हटाकर सीएनजी में बदलने के लिए कहा था। बाद में दिल्ली और यूपी के आला अधिकारियों की संयुक्त कमिटी का गठन हुआ। उसमें भी दिल्ली-गाजियाबाद के ट्रांसपोर्ट से प्रदूषण को कम करने पर रणनीति बनी थी। कोरोना की वजह से यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। अधिकारियों ने अब फिर से योजना पर काम शुरू कर परिवहन में सीएनजी बसों को बढ़ाने का फैसला किया है। क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह का कहना है कि रीजन में अभी हमारे पास अलग-अलग डिपो पर 770 बसें हैं, जिनमें से 139 बसें सीएनजी की हैं। इन्हीं बसों को गाजियाबाद, लोनी से मेरठ, हापुड़, गढ़, खुर्जा, अलीगढ़, बृजघाट, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में चलाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अलग-अलग कंपनियों से अनुबंध के बाद परिवहन निगम ने तय किया है कि सितंबर माह से जिस भी बस का परमिट पूरा होगा। उसे सिर्फ सीएनजी बस से ही बदला जाएगा। इसके अलावा डीजल बसों को किसी भी कीमत पर नहीं लिया जाएगा।
आज से दिन में 20 और रात को 25 यात्री के साथ सड़क पर उतरेंगी बसें:
क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि खरमास के दिनों में बसों के अंदर सफर करने वाले यात्रियों में कमी आ जाती है। इससे परिवहन निगम को आर्थिक घाटा हो रहा है। इसे कम करने के लिए अब नया फैसला लिया गया है जिसमें मंगलवार से रोडवेज बसें दिन में 20 और रात को 25 यात्री के बस में सवार होने पर ही डिपो से निकलेंगीं। चालक और परिचालकों पर नजर रखने के लिए एआरएम औचक निरीक्षण करेंगे। इस बीच जिस भी बस में कम यात्रियों की संख्या कम मिलेगी उन पर कार्रवाई होगी। हालांकि चालक और परिचालक से निकलने के बाद तीन किलोमीटर के दायरे में यात्रियों की संख्या भी पूरी कर सकते हैं। इस बारे में सोमवार को चालक और परिचालकों को निर्देशित भी किया गया।
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कौशांबी। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के तहत परिवहन निगम ने अब दिल्ली-एनसीआर समेत 14 रूटों पर सिर्फ सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) बसों के ही संचालन का फैसला किया है। प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने दिल्ली एनसीआर, कौशांबी, साहिबाबाद, गाजियाबाद पुराना बस अड्डा, मेरठ, गढ़, लोनी, खुर्जा, अलीगढ़, बृजघाट, नोएडा, हापुड़, बरेली, मोदीनगर और मुरादनगर रूटों पर चालकों को सीएनजी बस ही चलाने के लिए कहा है। गाजियाबाद रीजन में परिवहन निगम के पास 150 अनुबंधित बसें हैं जिनमें से सिर्फ 39 सीएनजी बसें इन रूटों पर दौड़ेंगीं।
कारवां अध्यक्ष विनय कुमार मित्तल ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में याचिका दायर कर कौशांबी में प्रदूषण का मुद्दा उठाया था। इस मामले में कोर्ट और एनजीटी ने सुनवाई कर परिवहन निगम को रोडवेज बेडे़ से डीजल बसों को हटाकर सीएनजी में बदलने के लिए कहा था। बाद में दिल्ली और यूपी के आला अधिकारियों की संयुक्त कमिटी का गठन हुआ। उसमें भी दिल्ली-गाजियाबाद के ट्रांसपोर्ट से प्रदूषण को कम करने पर रणनीति बनी थी। कोरोना की वजह से यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। अधिकारियों ने अब फिर से योजना पर काम शुरू कर परिवहन में सीएनजी बसों को बढ़ाने का फैसला किया है। क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह का कहना है कि रीजन में अभी हमारे पास अलग-अलग डिपो पर 770 बसें हैं, जिनमें से 139 बसें सीएनजी की हैं। इन्हीं बसों को गाजियाबाद, लोनी से मेरठ, हापुड़, गढ़, खुर्जा, अलीगढ़, बृजघाट, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में चलाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अलग-अलग कंपनियों से अनुबंध के बाद परिवहन निगम ने तय किया है कि सितंबर माह से जिस भी बस का परमिट पूरा होगा। उसे सिर्फ सीएनजी बस से ही बदला जाएगा। इसके अलावा डीजल बसों को किसी भी कीमत पर नहीं लिया जाएगा।
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आज से दिन में 20 और रात को 25 यात्री के साथ सड़क पर उतरेंगी बसें:
क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि खरमास के दिनों में बसों के अंदर सफर करने वाले यात्रियों में कमी आ जाती है। इससे परिवहन निगम को आर्थिक घाटा हो रहा है। इसे कम करने के लिए अब नया फैसला लिया गया है जिसमें मंगलवार से रोडवेज बसें दिन में 20 और रात को 25 यात्री के बस में सवार होने पर ही डिपो से निकलेंगीं। चालक और परिचालकों पर नजर रखने के लिए एआरएम औचक निरीक्षण करेंगे। इस बीच जिस भी बस में कम यात्रियों की संख्या कम मिलेगी उन पर कार्रवाई होगी। हालांकि चालक और परिचालक से निकलने के बाद तीन किलोमीटर के दायरे में यात्रियों की संख्या भी पूरी कर सकते हैं। इस बारे में सोमवार को चालक और परिचालकों को निर्देशित भी किया गया।
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