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गृहिणियों की कहानी, सबरंग रेडियो की जुबानी
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रेडियो सबरंग शुरू करने वाली महिला टीम
गृहिणियोें की कहानी, सबरंग रेडियो की जुबानी
इंदिरापुरम। सबरंग रेडियो...नहीं सुना, तो अब सुनिए। ये इंटरनेट रेडियो अपने ही शहर की कुछ गृहिणियों ने शुरू किया है। जी हां, मगर इस पर आपको फिल्मी गाने नहीं सुनाए जाते। इस पर सनाई जाती हैं, वह समस्याएं, जिनसे आप हर रोज दो चार हो रहे हैं और उठाई जाती है उनके समाधान की मांग। इसके अलावा जो आवाजें, संघर्ष, प्रतिभाएं घर में दबकर रह गई हैं, उन घरेलू महिलाओं की प्रेरक कहानियां।
कुछ कर गुजरने की ललक और वातावरण में फैली नकारात्मकता को खत्म करने और लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देने के उद्देश्य इंदिरापुरम सनसिटी की 15 महिलाओं ने कुछ ही समय पहले सबरंग नाम से ये रेडियो कार्यक्रम शुरू किया है।
स्वाति का अनुभव महिलाओं के आ रहा काम
सामाजिक कार्यकर्ता और टीम की सदस्या स्वाति चौहान ने 15 साल से भी ज्यादा समय एक मीडिया कंपनी में काम करते हुए रेडियो सीखा है। अब उनका अनुभव सभी सहेलियों के काम आ रहा है। स्वाति ने बताया कि उनकी टीम का उद्देश्य गाजियाबाद के लोगों को उनके मतलब की खबरें ऑडियो की शक्ल में देना है। यह इंटरनेट रेडियो है जहां फिल्मी गाने नहीं बल्कि लोगों से जुड़े मसले उठाए जाते हैं। वह कहती हैं कि उनकी टीम कोई प्रोफेशनल नहीं है, लेकिन खुद को साबित करने की ललक सभी में है। ऐसे में वह लोग लगातार मेहनत कर अपने इस रेडियो को ऊंचे मुकाम पर ले जाना चाहती हैं।
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15 सहेलियों ने मिलकर की शुरुआत
स्वाति के साथ इस रेडियो सबरंग में उनके अलावा 14 महिलाएं और हैं। किसी ने इतिहास, भूगोल तो किसी ने अर्थशास्त्र में एमए किया हुआ है। कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके पास जर्नलिज्म का डिप्लोमा है। अर्चना, अनुराधा, कविता, कमलेश, लोपा, निमिषा, प्रीति, रमनी, अनुराधा वर्मा, सुमन और सुमित्रा के साथ ही तीन युवा अंजलि, इशिका और अक्षिता भी इस रेडियो सबरंग से जुड़कर काम कर रही हैं। सभी महिलाएं उच्च शिक्षित गृहिणी हैं।
प्रत्येक सप्ताह करती हैं एक कार्यक्रम
महिलाओं की टीम प्रत्येक सप्ताह एक कार्यक्रम तैयार करती हैं जिसका प्रसारण शनिवार रात आठ बजे किया जाता है। कार्यक्रम को रेडियो सबरंग की वेबसाइट के साथ ही सोशल मीडिया और जाने माने पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाता है। स्वाति ने बताया कि सोशल मीडिया का काम संभालने से लेकर, कहानियां ढूंढना, लोगों का इंटरव्यू करना आदि तय करना इन सबकी जिम्मेदारी बांट रखी है और वे आपस में मिलजुलकर हफ्ते दर हफ्ते ये प्रोग्राम बना रही हैं।
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इंदिरापुरम। सबरंग रेडियो...नहीं सुना, तो अब सुनिए। ये इंटरनेट रेडियो अपने ही शहर की कुछ गृहिणियों ने शुरू किया है। जी हां, मगर इस पर आपको फिल्मी गाने नहीं सुनाए जाते। इस पर सनाई जाती हैं, वह समस्याएं, जिनसे आप हर रोज दो चार हो रहे हैं और उठाई जाती है उनके समाधान की मांग। इसके अलावा जो आवाजें, संघर्ष, प्रतिभाएं घर में दबकर रह गई हैं, उन घरेलू महिलाओं की प्रेरक कहानियां।
कुछ कर गुजरने की ललक और वातावरण में फैली नकारात्मकता को खत्म करने और लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देने के उद्देश्य इंदिरापुरम सनसिटी की 15 महिलाओं ने कुछ ही समय पहले सबरंग नाम से ये रेडियो कार्यक्रम शुरू किया है।
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स्वाति का अनुभव महिलाओं के आ रहा काम
सामाजिक कार्यकर्ता और टीम की सदस्या स्वाति चौहान ने 15 साल से भी ज्यादा समय एक मीडिया कंपनी में काम करते हुए रेडियो सीखा है। अब उनका अनुभव सभी सहेलियों के काम आ रहा है। स्वाति ने बताया कि उनकी टीम का उद्देश्य गाजियाबाद के लोगों को उनके मतलब की खबरें ऑडियो की शक्ल में देना है। यह इंटरनेट रेडियो है जहां फिल्मी गाने नहीं बल्कि लोगों से जुड़े मसले उठाए जाते हैं। वह कहती हैं कि उनकी टीम कोई प्रोफेशनल नहीं है, लेकिन खुद को साबित करने की ललक सभी में है। ऐसे में वह लोग लगातार मेहनत कर अपने इस रेडियो को ऊंचे मुकाम पर ले जाना चाहती हैं।
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15 सहेलियों ने मिलकर की शुरुआत
स्वाति के साथ इस रेडियो सबरंग में उनके अलावा 14 महिलाएं और हैं। किसी ने इतिहास, भूगोल तो किसी ने अर्थशास्त्र में एमए किया हुआ है। कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके पास जर्नलिज्म का डिप्लोमा है। अर्चना, अनुराधा, कविता, कमलेश, लोपा, निमिषा, प्रीति, रमनी, अनुराधा वर्मा, सुमन और सुमित्रा के साथ ही तीन युवा अंजलि, इशिका और अक्षिता भी इस रेडियो सबरंग से जुड़कर काम कर रही हैं। सभी महिलाएं उच्च शिक्षित गृहिणी हैं।
प्रत्येक सप्ताह करती हैं एक कार्यक्रम
महिलाओं की टीम प्रत्येक सप्ताह एक कार्यक्रम तैयार करती हैं जिसका प्रसारण शनिवार रात आठ बजे किया जाता है। कार्यक्रम को रेडियो सबरंग की वेबसाइट के साथ ही सोशल मीडिया और जाने माने पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाता है। स्वाति ने बताया कि सोशल मीडिया का काम संभालने से लेकर, कहानियां ढूंढना, लोगों का इंटरव्यू करना आदि तय करना इन सबकी जिम्मेदारी बांट रखी है और वे आपस में मिलजुलकर हफ्ते दर हफ्ते ये प्रोग्राम बना रही हैं।