फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   ghaziabad news

वसुंधरा-इंदिरापुरम में 20 प्रतिशत महंगा हुआ बोतल बंद पानी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jun 2021 12:46 AM IST
विज्ञापन
ghaziabad news
वसुंधरा-इंदिरापुरम में 20 प्रतिशत महंगा हुआ बोतल बंद पानी
विज्ञापन

साहिबाबाद। कोरोना काल में पानी की बोतलों के दामों में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। मार्केट में बिकने वाली चालीस रुपये की बोतल के दाम बढ़ाकर पचास रुपये कर दिए हैं। वहीं ब्रांडेड बोतल भी एमआरपी पर नहीं बिक रही है। 80 रुपये में बिकने वाली बोतल के दामों को भी 95 से 100 रुपये कर दिया गया है। नगर निगम की तरफ से स्वच्छ पानी मुहैया नहीं करने के चलते लोग मजबूरी में अधिक पैसा देकर बोतल बंद पानी खरीद रहे हैं।
टीएचए में बोतल बंद पानी का कारोबार लगातार फल फूल रहा है। वैशाली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर, लाजतप नगर, कौशांबी, डेल्टा कॉलोनी में लगतार बोतल बंद पानी की मांग बढ़ती जा रही है। कोरोना काल में भी लगातार मांग बढ़ने से बोतल बंद पानी का कारोबार करने वाले लोगों ने पानी की बोतलों के दामों में 15 से बीस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। पहले लोकल कंपनी की पानी की बोतल चालीस से पचास रुपये में मिलती थी। उसके दाम को पचास से 60 रुपये कर दिया गया है। वहीं कंपनी की बोतल के दाम 80 रुपये से सीधे 90 से 100 रुपये के बीच हो गए है। नगर निगम की तरफ से पर्याप्त पानी नहीं मिलने की वजह से लोग पैसे देकर पानी खरीदने को मजबूर है। पानी के दाम बढ़ने की वजह से पानी पर खर्चा 500 से हजार रुपये प्रति महीना बढ़ गया है
विज्ञापन

लोग क्यों खरीदते हैं बोतल बंद पानी
मोहननगर जोन में अभी तक गंगाजल की आपूर्ति नहीं होती है। यहां पर लोगों को एक वक्त ही पानी मिलता है। वह भी बमुश्किल कुछ मिनट ही। नगर निगम का पानी पीने लायक नहीं है। लोगों का कहना है कि इस पानी से घर के तो सारे काम हो जाते हैं लेकिन यह पीने में खारा लगता है। पर्यावरण कार्यकर्ता सुशील राघव ने बताया कि गाजियाबाद में हर साल 3 से 5 फीट भूजल का स्तर गिर रहा है। जहां प्लांट ज्यादा लगे हैं, वहां स्तर ज्यादा गिरा है। वहीं बोतलबंद पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती है। इन बोतलों पर किसी भी कंपनी का स्टीकर नहीं लगा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्लांटों पर नकेल कसने के लिए बनी काउंसिल नहीं है प्रभावी
यूपी ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट 2019 के तहत भूजल दोहन रोकने के लिए गाजियाबाद ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट काउंसिल का गठन किया था। इस काउंसिल में नगर निगम, पीसीबी, जल निगम, लघु सिंचाई विभाग, जिला उद्योग केंद्र, बिजली विभाग के अलावा कुछ एनजीओ व पर्यावरण कार्यकर्ता सदस्य हैं। इस काउंसिल का काम अवैध प्लांट पर नकेल कसना है। यही कारण है कि जब कोई अवैध प्लांट की शिकायत नगर निगम या अन्य किसी विभाग से करता है तो वह कार्रवाई के लिए अकेले जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। इसका फायदा पानी माफियाओं को मिलता है। इस काउंसिल के सदस्य आकाश वशिष्ठ ने बताया कि अब तक काउंसिल की दो बैठकें अक्तूबर व दिसंबर में हुई थी। बैठकों में अवैध प्लांटों के चलते भूजल दोहन का मामला उठाया गया था। इस पर एडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर प्लांटों पर नकेल कसने का निर्णय लिया गया था। इस कमेटी का गठन तीसरी बैठक में होना था। कोरोना के चलते तीसरी बैठक अब तक नहीं हो सकी है। वहीं जिला विकास अधिकारी भालचंद्र त्रिपाठी का कहना है कि अवैध प्लांट की कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed