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उद्योग जगत में बुलंदी पर शहर की महिलाएं
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सीमा जैन।
- फोटो : GHAZIABAD City
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उद्योग जगत में बुलंदी पर शहर की महिलाएं
साहिबाबाद। तोड़ कर हर पिंजरा जाने कब उड़ जाऊंगी, चाहे लाख बिछा लो बंदिशें फिर भी दूर आसमां में अपनी जगह बनाऊंगी। एक वरिष्ठ कवि की यह लाइनें साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 की महिला उद्यमियों पर सटीक बैठती हैं। ये महिलाएं जनपद की करीब 25 हजार इकाइयों के बीच अपनी प्रतिभा के बूते आत्मनिर्भर बनीं और अब देश ही नहीं, विदेशों में भी बुलंदियां छूकर नाम रोशन कर रही हैं। ये महिला उद्यमी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, कई केंद्रीय मंत्री और विभिन्न संगठनों से सम्मानित हो चुकी हैं।
एक कमरे से शुरू हुआ सफर, अब हांगकांग तक भर रहीं उड़ान
देश में आत्मनिर्भर बनाने की पहल भले ही वर्ष 2014-15 में शुरू हुई हो लेकिन साहिबाबाद की उद्यमी रेशमा खान ने वर्ष 2004 से ही भारतीय उत्पादों जैसे खिलौने, दवाइयां व अन्य उत्पादों की पैकेजिंग कर उन्हें हांगकांग के रास्ते चीन, साउथ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट समेत अन्य देशों को सप्लाई करना शुरू कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा दिए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में दिल्ली में पटपड़गंज में किराए के कमरे में कंप्यूटर पर उत्पादों की पैकिंग के डिजाइन तैयार करती थीं। जिसमें वह प्रोडक्ट का विज्ञापन, सेफ्टी एंड कंपनी की ब्रांडिंग का कॉन्सेप्ट लेकर आई थीं। 2004 में उन्हें तालों की पैकिंग का पहला ऑर्डर मिला था। इसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लेकर तीन लाख रुपये में मशीन खरीदी। अब उनके पास जर्मनी की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी समेत 11 बड़ी मशीनें हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के बाद उन्होंने साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में दूसरा प्लांट लगा लिया। यहां कारोबार को इतना बढ़ावा मिला कि ट्रांसपेरेंट पैकेजिंग सिर्फ इंडिया तक ही सीमित नहीं रही। बल्कि हांगकांग के रास्ते चीन, साउथ अफ्रीका, फिलीपींस, आस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट समेत 10 से अधिक देशों की बड़ी कंपनियों तक उनकी पहुंच हो गई। वह दवाईं, फूड और खिलौने व अन्य आइटम्स की पैकिंग करती हैं। 10 हजार रुपये से शुरू हुआ पैकेजिंग का यह कारोबार अब करोड़ों रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गया है।
ट्राइबल आर्ट वर्ली के लिए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा से मिला सम्मान
सूर्य नगर की महिला उद्यमी सुमन सोनथालिया ने वर्ष 1992 में घर के ड्राइंग रूम में सात हजार रुपये से महाराष्ट्र की ट्राइबल आर्ट वर्ली से करियर शुरू किया था। नागालैंड, महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों में पढ़ाई के दौरान उन्हें विभिन्न राज्यों की कला का काफी ज्ञान हो गया था। पेपर पर कला को उभारने के बाद जब उन्हें बाजार में प्रोत्साहन मिलने लगा तो उन्होंने लकड़ी प्लास्टिक व दूसरे आइटम्स पर वर्ली आर्ट को करना शुरू कर दिया। साहिबाबाद में वर्ष 2002 में 70 महिलाओं व युवतियों के साथ उन्होंने काम शुरू किया था। वो अब तीन हजार से अधिक महिलाओं तक पहुंच गया है। लॉकडाउन में कारोबार कम होने के दौरान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आर्ट आइटम्स के साथ मास्क बनाने का काम दिया। वह अपनी कला की देश के कोने-कोने में पहुंचा चुकी हैं। इसके लिए उन्हें वर्ष 2009 में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा स्टेट मेरिट अवार्ड, 2011 में शीला दीक्षित द्वारा राज्य अवार्ड, 2011 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नेशनल अवार्ड व 2020 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
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500 रुपये से शुरू किया बिजनेस, घर-घर तक पहुंची प्रतिभा
महिला उद्यमी सीमा जैन लकड़ी समेत अन्य नैचुरल वस्तुओं से घर को सुंदर बनाने का सामान तैयार करती हैं। अक्सर जिस सामान को लोग खराब बताकर फेंक देते हैं, उसे वह घर के सजाने के लिए तैयार कर देती हैं। वर्ष 1997 में पेपर और ग्रीटिंग कार्ड पर डिजाइन तैयार करने के बाद बाजार में लोगों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। शुरुआती समय में वह कम्प्यूटर पर विभिन्न डिजाइनों को तैयार करती थीं। फिर कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे पेपर या अन्य चीजों पर तैयार करती थीं। लेकिन जब मार्केट में इससे बेहतर डिजाइन की मांग उठने लगी तो उन्होंने लकड़ी, जूट, केन, बेम्बो, गन्ना, जूट, बनाना फाइबर, पुराना कार्डबोर्ड, केले के पत्ते, कोर्न के पत्ते, घास, पीपल के पत्ते और अन्य तरह के नैचुरल चीजों से डिजाइन बनाने शुरू कर दिए। जिनकी मदद से वह लाइट लैंप, हैंगिंग लैंप, टेबल लैंप्स, फ्लोर लैम्प, हैंड क्राफ्टिड नेचुरल केन, शीशे के लिए बनाना फाइबर और जूट फाइबर समेत अन्य सामान तैयार करती हैं। वह कंपनी में 50 से अधिक आइटम्स को नैचुरल आइटम्स से तैयार करती हैं। जिससे यूरोप और यूएसए में 100 प्रतिशत निर्यात करती हैं। सीमा जैन के मुताबिक, शुरुआती समय में उनके पति ने काफी सहयोग किया था। वह घर में डिजाइनिंग सामान तैयार करती थीं तो उनके पति सामान की मार्केटिंग करते थे। आज वह देश-विदेश में अपनी प्रतिभा की बदौलत नाम कमा रही हैं।
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साहिबाबाद। तोड़ कर हर पिंजरा जाने कब उड़ जाऊंगी, चाहे लाख बिछा लो बंदिशें फिर भी दूर आसमां में अपनी जगह बनाऊंगी। एक वरिष्ठ कवि की यह लाइनें साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 की महिला उद्यमियों पर सटीक बैठती हैं। ये महिलाएं जनपद की करीब 25 हजार इकाइयों के बीच अपनी प्रतिभा के बूते आत्मनिर्भर बनीं और अब देश ही नहीं, विदेशों में भी बुलंदियां छूकर नाम रोशन कर रही हैं। ये महिला उद्यमी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, कई केंद्रीय मंत्री और विभिन्न संगठनों से सम्मानित हो चुकी हैं।
एक कमरे से शुरू हुआ सफर, अब हांगकांग तक भर रहीं उड़ान
देश में आत्मनिर्भर बनाने की पहल भले ही वर्ष 2014-15 में शुरू हुई हो लेकिन साहिबाबाद की उद्यमी रेशमा खान ने वर्ष 2004 से ही भारतीय उत्पादों जैसे खिलौने, दवाइयां व अन्य उत्पादों की पैकेजिंग कर उन्हें हांगकांग के रास्ते चीन, साउथ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट समेत अन्य देशों को सप्लाई करना शुरू कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा दिए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में दिल्ली में पटपड़गंज में किराए के कमरे में कंप्यूटर पर उत्पादों की पैकिंग के डिजाइन तैयार करती थीं। जिसमें वह प्रोडक्ट का विज्ञापन, सेफ्टी एंड कंपनी की ब्रांडिंग का कॉन्सेप्ट लेकर आई थीं। 2004 में उन्हें तालों की पैकिंग का पहला ऑर्डर मिला था। इसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लेकर तीन लाख रुपये में मशीन खरीदी। अब उनके पास जर्मनी की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी समेत 11 बड़ी मशीनें हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के बाद उन्होंने साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में दूसरा प्लांट लगा लिया। यहां कारोबार को इतना बढ़ावा मिला कि ट्रांसपेरेंट पैकेजिंग सिर्फ इंडिया तक ही सीमित नहीं रही। बल्कि हांगकांग के रास्ते चीन, साउथ अफ्रीका, फिलीपींस, आस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट समेत 10 से अधिक देशों की बड़ी कंपनियों तक उनकी पहुंच हो गई। वह दवाईं, फूड और खिलौने व अन्य आइटम्स की पैकिंग करती हैं। 10 हजार रुपये से शुरू हुआ पैकेजिंग का यह कारोबार अब करोड़ों रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गया है।
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ट्राइबल आर्ट वर्ली के लिए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा से मिला सम्मान
सूर्य नगर की महिला उद्यमी सुमन सोनथालिया ने वर्ष 1992 में घर के ड्राइंग रूम में सात हजार रुपये से महाराष्ट्र की ट्राइबल आर्ट वर्ली से करियर शुरू किया था। नागालैंड, महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों में पढ़ाई के दौरान उन्हें विभिन्न राज्यों की कला का काफी ज्ञान हो गया था। पेपर पर कला को उभारने के बाद जब उन्हें बाजार में प्रोत्साहन मिलने लगा तो उन्होंने लकड़ी प्लास्टिक व दूसरे आइटम्स पर वर्ली आर्ट को करना शुरू कर दिया। साहिबाबाद में वर्ष 2002 में 70 महिलाओं व युवतियों के साथ उन्होंने काम शुरू किया था। वो अब तीन हजार से अधिक महिलाओं तक पहुंच गया है। लॉकडाउन में कारोबार कम होने के दौरान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आर्ट आइटम्स के साथ मास्क बनाने का काम दिया। वह अपनी कला की देश के कोने-कोने में पहुंचा चुकी हैं। इसके लिए उन्हें वर्ष 2009 में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा स्टेट मेरिट अवार्ड, 2011 में शीला दीक्षित द्वारा राज्य अवार्ड, 2011 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नेशनल अवार्ड व 2020 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
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500 रुपये से शुरू किया बिजनेस, घर-घर तक पहुंची प्रतिभा
महिला उद्यमी सीमा जैन लकड़ी समेत अन्य नैचुरल वस्तुओं से घर को सुंदर बनाने का सामान तैयार करती हैं। अक्सर जिस सामान को लोग खराब बताकर फेंक देते हैं, उसे वह घर के सजाने के लिए तैयार कर देती हैं। वर्ष 1997 में पेपर और ग्रीटिंग कार्ड पर डिजाइन तैयार करने के बाद बाजार में लोगों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। शुरुआती समय में वह कम्प्यूटर पर विभिन्न डिजाइनों को तैयार करती थीं। फिर कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे पेपर या अन्य चीजों पर तैयार करती थीं। लेकिन जब मार्केट में इससे बेहतर डिजाइन की मांग उठने लगी तो उन्होंने लकड़ी, जूट, केन, बेम्बो, गन्ना, जूट, बनाना फाइबर, पुराना कार्डबोर्ड, केले के पत्ते, कोर्न के पत्ते, घास, पीपल के पत्ते और अन्य तरह के नैचुरल चीजों से डिजाइन बनाने शुरू कर दिए। जिनकी मदद से वह लाइट लैंप, हैंगिंग लैंप, टेबल लैंप्स, फ्लोर लैम्प, हैंड क्राफ्टिड नेचुरल केन, शीशे के लिए बनाना फाइबर और जूट फाइबर समेत अन्य सामान तैयार करती हैं। वह कंपनी में 50 से अधिक आइटम्स को नैचुरल आइटम्स से तैयार करती हैं। जिससे यूरोप और यूएसए में 100 प्रतिशत निर्यात करती हैं। सीमा जैन के मुताबिक, शुरुआती समय में उनके पति ने काफी सहयोग किया था। वह घर में डिजाइनिंग सामान तैयार करती थीं तो उनके पति सामान की मार्केटिंग करते थे। आज वह देश-विदेश में अपनी प्रतिभा की बदौलत नाम कमा रही हैं।