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सिजेरियन डिलीवरी के दौरान पेट में छोड़ी रुई, सीएमओ से मांगा जवाब
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सिजेरियन डिलीवरी के दौरान पेट में छोड़ी रुई, सीएमओ से मांगा जवाब
गाजियाबाद। तीन साल पूर्व प्रसव के लिए पैसे मांगने और सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान पेट में रुई छोड़ देने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने सीएमओ कार्यालय से जवाब-तलब किया है। महिला का प्रसव संयुक्त अस्पताल में हुआ था।
एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि 6 अगस्त 2019 को कविनगर के गंगोत्री विहार में रहने वाले नीरज कुमार की पत्नी मंजू संयुक्त अस्पताल में भर्ती हुई थीं। डॉक्टर ने स्थिति गंभीर बताते हुए सिजेरियन प्रसव कराने के लिए कहा। इसके लिए 15 हजार रुपये भी मांगे गए थे। पैसा नहीं देने पर मरीज को रेफर करने की धमकी भी दी गई। पति नीरज ने बताया कि उसने पैसे दे दिए और अस्पताल में मंजू की सिजेरियन डिलीवरी करवा दी गई। होश में आने के बाद भी मंजू को पेट में दर्द हो रहा था, जिसके चलते 10 अगस्त को जीटीबी रेफर कर दिया। वहां जांच के बाद मंजू के पेट में गांठ बताया गया। इलाज के बाद 17 अगस्त को डिस्चार्ज कर दिया। कुछ दिन बाद फिर पेट में तेज दर्द होने लगा। 12 दिसंबर को गोविंदपुरम में नर्सिंग होम में ऑपरेशन कर पेट से रूई निकाली। वहां पर डॉक्टर ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी के दौरान खून का बहाव रोकने के लिए रुई लगाई गई होगी और बाद में डॉक्टर उसे हटाना भूल गईं। नीरज ने कविनगर थाना और सीएमओ से शिकायत की। शिकायत पर कार्रवाई न होने पर नीरज ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया का कहना है कि रिपोर्ट उपभोक्ता को भेजी जा चुकी है। उसमें जांच के दौरान जो भी दोषी पाए गए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
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गाजियाबाद। तीन साल पूर्व प्रसव के लिए पैसे मांगने और सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान पेट में रुई छोड़ देने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने सीएमओ कार्यालय से जवाब-तलब किया है। महिला का प्रसव संयुक्त अस्पताल में हुआ था।
एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि 6 अगस्त 2019 को कविनगर के गंगोत्री विहार में रहने वाले नीरज कुमार की पत्नी मंजू संयुक्त अस्पताल में भर्ती हुई थीं। डॉक्टर ने स्थिति गंभीर बताते हुए सिजेरियन प्रसव कराने के लिए कहा। इसके लिए 15 हजार रुपये भी मांगे गए थे। पैसा नहीं देने पर मरीज को रेफर करने की धमकी भी दी गई। पति नीरज ने बताया कि उसने पैसे दे दिए और अस्पताल में मंजू की सिजेरियन डिलीवरी करवा दी गई। होश में आने के बाद भी मंजू को पेट में दर्द हो रहा था, जिसके चलते 10 अगस्त को जीटीबी रेफर कर दिया। वहां जांच के बाद मंजू के पेट में गांठ बताया गया। इलाज के बाद 17 अगस्त को डिस्चार्ज कर दिया। कुछ दिन बाद फिर पेट में तेज दर्द होने लगा। 12 दिसंबर को गोविंदपुरम में नर्सिंग होम में ऑपरेशन कर पेट से रूई निकाली। वहां पर डॉक्टर ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी के दौरान खून का बहाव रोकने के लिए रुई लगाई गई होगी और बाद में डॉक्टर उसे हटाना भूल गईं। नीरज ने कविनगर थाना और सीएमओ से शिकायत की। शिकायत पर कार्रवाई न होने पर नीरज ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया का कहना है कि रिपोर्ट उपभोक्ता को भेजी जा चुकी है। उसमें जांच के दौरान जो भी दोषी पाए गए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
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