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त्योहारों पर शहर में अंधकार, तीन हजार स्ट्रीट लाइटें खराब
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नेहरू नगर 2 में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट। अमर उजाला
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त्योहारों पर शहर में अंधकार, तीन हजार स्ट्रीट लाइटें खराब
गाजियाबाद। शहर की कॉलोनियों का अंधेरा अब दशहरे पर भी दूर नहीं हो पाएगा। स्ट्रीट लाइटों की खरीद पर उठे विवाद की वजह से प्रक्रिया लंबी हो गई। नगर निगम को अब स्ट्रीट लाइटों की आपूर्ति 20 अक्तूबर के बाद मिल पाएगी। नगर निगम के 110 पार्षदों ने खाली पोल के लिए भी 10200 स्ट्रीट लाइटें मांगी हैं, लेकिन इनकी यह डिमांड अभी पूरी नहीं हो सकेगी।
नगर निगम ने करीब तीन माह पहले शहर में सर्वे कराया था। तब शहर की 81 सड़कों पर करीब छह हजार स्ट्रीट लाइटें खराब मिलीं थीं। नगर निगम के प्रकाश विभाग ने इनमें से करीब 50 फीसदी लाइटें ठीक करा दी थीं, लेकिन बरसात के दिनों में खराब लाइटों की संख्या फिर बढ़कर करीब पांच हजार हो गई हैं। राजनगर, कविनगर के अलावा शहर की कोई कॉलोनी ऐसी नहीं है, जिसमें स्ट्रीट लाइटें खराब न हो। विजयनगर के 12 वार्डों समेत रईसपुर, संजय नगर, नेहरू नगर, वसुंधरा, वैशाली, राजेंद्र नगर, शालीमार गार्डन समेत सभी कॉलोनियों की अधिकांश सड़कों पर अंधेरा है। नगर निगम अधिकारियों ने मुख्य मार्गों पर लगीं स्ट्रीट लाइटों को उतरवाकर कॉलोनियों में लगवाने और इन मार्गों पर 110 से 180 वाट तक की नई लाइटें नवरात्र से पहले लगवाने का दावा किया था। अभी तक प्रकाश विभाग नई लाइटें ही नहीं खरीद पाया है। इसकी वजह अब दशहरे पर भी कॉलोनियों की सड़कों पर अंधेरा ही रहेगा। 21-22 अक्तूबर से लाइटें बदलने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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खाली पोल पर अभी नहीं लग पाएंगी लाइटें
शहर में करीब 10 हजार ऐसे पोल हैं जिन पर नगर निगम अभी तक स्ट्रीट लाइटें ही नहीं लगा पाया है। वर्ष 2016-17 में लाइटों का ठेका प्राइवेट कंपनी को देते वक्त भी इन खाली पोल को चिह्नित किया गया था। अब निगम के सभी 110 पार्षदों ने नई लाइटों की डिमांड प्रकाश विभाग को दी है। पार्षदों ने कुल 10200 स्ट्रीट लाइटें खाली पोल पर लगाने के लिए मांगी हैं। नगर निगम के पास अभी इतना स्टॉक ही नहीं है। ऐसे में अभी यह खाली पोल खाली ही रहेंगे।
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लाइटों की खरीद पर उठा विवाद, मेयर ने बदलवाई कंपनी
नगर निगम के प्रकाश विभाग ने लाइटें खरीदने के लिए करीब एक माह पहले टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। एक नामचीन कंपनी ने सबसे कम दरों पर लाइटें आपूर्ति करने का टेंडर डाला था। नगर निगम इसे वर्क ऑर्डर जारी करने वाला था, लेकिन महापौर आशा शर्मा ने इस पर आपत्ति जता दी। बीते दिनों हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्होंने उस कंपनी की लाइटों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई, जिसे टेंडर मिला था। उन्होंने दूसरी कंपनी का नाम सुझाया था। ऐसे में अब नगर निगम अधिकारियों ने केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त ईईएसएल (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड) से सीधे लाइटें खरीदने का निर्णय लिया है। निगम ने करीब 7 हजार लाइटों की डिमांड भेजी है। 20 अक्तूबर तक इनकी आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।
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अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर बदलवाई जाएंगी लाइटें : अपर नगरायुक्त
प्रकाश विभाग के प्रभारी अपर नगरायुक्त शिवपूजन यादव का कहना है कि लाइटों की आपूर्ति मिल जाने के बाद अतिरिक्त टीमें लगाकर लाइटें बदलवाई जाएंगी। इसके लिए आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को हायर किया जाएगा। निगम के कर्मचारी अपने नियमित काम पर रहेंगे और कॉलोनियों में खराब लाइटों की मरम्मत करते रहेंगे। उनका कहना है कि दीपावली से पहले सभी खराब लाइटें रिपेयर कर मुख्य मार्गों पर ज्यादा रोशनी वाली लाइटें लगा दी जाएंगी।
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गाजियाबाद। शहर की कॉलोनियों का अंधेरा अब दशहरे पर भी दूर नहीं हो पाएगा। स्ट्रीट लाइटों की खरीद पर उठे विवाद की वजह से प्रक्रिया लंबी हो गई। नगर निगम को अब स्ट्रीट लाइटों की आपूर्ति 20 अक्तूबर के बाद मिल पाएगी। नगर निगम के 110 पार्षदों ने खाली पोल के लिए भी 10200 स्ट्रीट लाइटें मांगी हैं, लेकिन इनकी यह डिमांड अभी पूरी नहीं हो सकेगी।
नगर निगम ने करीब तीन माह पहले शहर में सर्वे कराया था। तब शहर की 81 सड़कों पर करीब छह हजार स्ट्रीट लाइटें खराब मिलीं थीं। नगर निगम के प्रकाश विभाग ने इनमें से करीब 50 फीसदी लाइटें ठीक करा दी थीं, लेकिन बरसात के दिनों में खराब लाइटों की संख्या फिर बढ़कर करीब पांच हजार हो गई हैं। राजनगर, कविनगर के अलावा शहर की कोई कॉलोनी ऐसी नहीं है, जिसमें स्ट्रीट लाइटें खराब न हो। विजयनगर के 12 वार्डों समेत रईसपुर, संजय नगर, नेहरू नगर, वसुंधरा, वैशाली, राजेंद्र नगर, शालीमार गार्डन समेत सभी कॉलोनियों की अधिकांश सड़कों पर अंधेरा है। नगर निगम अधिकारियों ने मुख्य मार्गों पर लगीं स्ट्रीट लाइटों को उतरवाकर कॉलोनियों में लगवाने और इन मार्गों पर 110 से 180 वाट तक की नई लाइटें नवरात्र से पहले लगवाने का दावा किया था। अभी तक प्रकाश विभाग नई लाइटें ही नहीं खरीद पाया है। इसकी वजह अब दशहरे पर भी कॉलोनियों की सड़कों पर अंधेरा ही रहेगा। 21-22 अक्तूबर से लाइटें बदलने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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खाली पोल पर अभी नहीं लग पाएंगी लाइटें
शहर में करीब 10 हजार ऐसे पोल हैं जिन पर नगर निगम अभी तक स्ट्रीट लाइटें ही नहीं लगा पाया है। वर्ष 2016-17 में लाइटों का ठेका प्राइवेट कंपनी को देते वक्त भी इन खाली पोल को चिह्नित किया गया था। अब निगम के सभी 110 पार्षदों ने नई लाइटों की डिमांड प्रकाश विभाग को दी है। पार्षदों ने कुल 10200 स्ट्रीट लाइटें खाली पोल पर लगाने के लिए मांगी हैं। नगर निगम के पास अभी इतना स्टॉक ही नहीं है। ऐसे में अभी यह खाली पोल खाली ही रहेंगे।
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लाइटों की खरीद पर उठा विवाद, मेयर ने बदलवाई कंपनी
नगर निगम के प्रकाश विभाग ने लाइटें खरीदने के लिए करीब एक माह पहले टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। एक नामचीन कंपनी ने सबसे कम दरों पर लाइटें आपूर्ति करने का टेंडर डाला था। नगर निगम इसे वर्क ऑर्डर जारी करने वाला था, लेकिन महापौर आशा शर्मा ने इस पर आपत्ति जता दी। बीते दिनों हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्होंने उस कंपनी की लाइटों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई, जिसे टेंडर मिला था। उन्होंने दूसरी कंपनी का नाम सुझाया था। ऐसे में अब नगर निगम अधिकारियों ने केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त ईईएसएल (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड) से सीधे लाइटें खरीदने का निर्णय लिया है। निगम ने करीब 7 हजार लाइटों की डिमांड भेजी है। 20 अक्तूबर तक इनकी आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।
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अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर बदलवाई जाएंगी लाइटें : अपर नगरायुक्त
प्रकाश विभाग के प्रभारी अपर नगरायुक्त शिवपूजन यादव का कहना है कि लाइटों की आपूर्ति मिल जाने के बाद अतिरिक्त टीमें लगाकर लाइटें बदलवाई जाएंगी। इसके लिए आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को हायर किया जाएगा। निगम के कर्मचारी अपने नियमित काम पर रहेंगे और कॉलोनियों में खराब लाइटों की मरम्मत करते रहेंगे। उनका कहना है कि दीपावली से पहले सभी खराब लाइटें रिपेयर कर मुख्य मार्गों पर ज्यादा रोशनी वाली लाइटें लगा दी जाएंगी।