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4 करोड़ की कचरा फैक्टरी लगाई, कूड़ा निस्तारण नहीं कर पाई
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चार करोड़ की कूड़ा फैक्टरी बनाई, कचरा निस्तारण न कर पाई
गाजियाबाद। इंदौर और गोवा की तर्ज पर कूड़ा निस्तारण करने का दावा कर नगर निगम ने चार करोड़ रुपये खर्च कर सिहानी में वेस्ट प्रोसेस प्लांट तो बना दिया, लेकिन कचरे का निस्तारण न हो पाया। चार करोड़ की यह फैक्टरी कूड़े को प्रोसेस कर चार टन भी खाद न बना पाई। अब यह प्लांट बंद पड़ा है और यहां से कचरा इंदिरापुरम भेज दिया गया। अब निगम की यह योजना भी फेल होती दिखाई दे रही है।
नगर निगम ने पीपीपी मॉडल पर सबसे पहले सिहानी में यह वेस्ट प्रोेसेस प्लांट (कचरा निस्तारण फैक्टरी) लगाया है। इसके लिए चार करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च कर बिल्डिंग का निर्माण नगर निगम ने किया है, जमीन भी निगम की है और प्लांट लगाने का खर्च प्राइवेट फर्म ने किया है। नगर निगम अधिकारियों का दावा था कि इस प्लांट में कचरे को लाकर कन्वेयर बेल्ट पर डालकर प्लास्टिक, लोहा, कांच, लकड़ी आदि सूखा कचरा अलग किया जाएगा और बाकी बचे गीले कचरे से खाद बनेगी। नगर निगम ने बीते दिनों इस प्लांट का निरीक्षण अपर मुख्य सचिव को भी कराया था। इस प्लांट को चालू कर दिया गया था, लेकिन चंद दिनों बाद ही यह प्लांट बंद हो गया। प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि प्लांट करीब 10 दिन से बंद हैं और फिलहाल कचरे को इंदिरापुरम भेजा रहा है।
खाद के साथ प्लास्टिक के टुकड़े भी हो रहे मिक्स
नगर निगम और प्राइवेट फर्म के इस संयुक्त प्लांट में चंद दिन कचरे से खाद तैयार की गई। यह खाद अभी भी प्लांट परिसर में पड़ी है। इस खाद में भी प्लास्टिक के बारीक टुकड़े पड़े थे। ऐसे में यह खाद पार्कों में डाली गई तो इसमें मिली प्लास्टिक पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है।
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गाजियाबाद। इंदौर और गोवा की तर्ज पर कूड़ा निस्तारण करने का दावा कर नगर निगम ने चार करोड़ रुपये खर्च कर सिहानी में वेस्ट प्रोसेस प्लांट तो बना दिया, लेकिन कचरे का निस्तारण न हो पाया। चार करोड़ की यह फैक्टरी कूड़े को प्रोसेस कर चार टन भी खाद न बना पाई। अब यह प्लांट बंद पड़ा है और यहां से कचरा इंदिरापुरम भेज दिया गया। अब निगम की यह योजना भी फेल होती दिखाई दे रही है।
नगर निगम ने पीपीपी मॉडल पर सबसे पहले सिहानी में यह वेस्ट प्रोेसेस प्लांट (कचरा निस्तारण फैक्टरी) लगाया है। इसके लिए चार करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च कर बिल्डिंग का निर्माण नगर निगम ने किया है, जमीन भी निगम की है और प्लांट लगाने का खर्च प्राइवेट फर्म ने किया है। नगर निगम अधिकारियों का दावा था कि इस प्लांट में कचरे को लाकर कन्वेयर बेल्ट पर डालकर प्लास्टिक, लोहा, कांच, लकड़ी आदि सूखा कचरा अलग किया जाएगा और बाकी बचे गीले कचरे से खाद बनेगी। नगर निगम ने बीते दिनों इस प्लांट का निरीक्षण अपर मुख्य सचिव को भी कराया था। इस प्लांट को चालू कर दिया गया था, लेकिन चंद दिनों बाद ही यह प्लांट बंद हो गया। प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि प्लांट करीब 10 दिन से बंद हैं और फिलहाल कचरे को इंदिरापुरम भेजा रहा है।
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खाद के साथ प्लास्टिक के टुकड़े भी हो रहे मिक्स
नगर निगम और प्राइवेट फर्म के इस संयुक्त प्लांट में चंद दिन कचरे से खाद तैयार की गई। यह खाद अभी भी प्लांट परिसर में पड़ी है। इस खाद में भी प्लास्टिक के बारीक टुकड़े पड़े थे। ऐसे में यह खाद पार्कों में डाली गई तो इसमें मिली प्लास्टिक पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है।
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