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बंद दुकानों में सड़ रहा है १५ करोड का फर्नीचर और रेडीमेड गारमेंट
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बंद दुकानों में सड़ रहा है 15 करोड़ का फर्नीचर और कपड़े
गाजियाबाद। कोरोना कर्फ्यू के कारण करीब डेढ़ महीने से बंद दुकानाें और गोदामों में व्यापारियों का स्टॉक खराब हो रहा है। खासतौर पर रेडीमेड गारमेंट और फर्नीचर बाजार में 15 करोड़ का माल खराब होने का अनुमान है। व्यापारियों के अलावा उनके यहां कार्य करने वाले स्टाफ के सामने भी अब रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के चलते किराए पर दुकान चलाने वालों के प्रतिष्ठान बंदी के कगार पर हैं। बिजली के बिल, दुकान का किराया, बच्चों की शिक्षा और घर खर्च निकालने भी व्यापारियों के लिए भारी हो रहे हैं।
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आठ करोड़ रुपये महीने का है फर्नीचर का कारोबार :
जिले में फर्नीचर कारोबार का सबसे बड़ा केंद्र रमतेराम रोड बाजार है। यहां फर्नीचर की करीब 200 दुकानें संचालित हैं। रमतेराम रोड व्यापारी एसोसिएशन का कहना है कि करीब आठ करोड़ रुपये महीने का कारोबार इस बाजार में होता है लेकिन पिछले डेढ़ महीने में शादियों के सीजन पिटने से भी व्यापारियों को दस करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। तैयार फर्नीचर में दीमक लगने की संभावना है। एक अनुमान के मुताबिक करीब चार से पांच करोड़ का फर्नीचर डेढ़ महीने में खराब हुआ होगा। व्यापारी प्रतिदिन प्रतिष्ठान खोलते हैं तो फर्नीचर की देखरेख होती है। गोदाम में तैयार फर्नीचर खरीदने का अधिक खतरा है। इसमें बेड, तकिए, फोम के उत्पाद भी शामिल हैं।
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गर्मियों के सीजन माल नहीं बिकेगा साल भर
जिले में गांधीनगर में रेडीमेड गारमेंट का सबसे बड़ा कारोबार है। 80 से अधिक दुकान और शोरूम में लाखों का माल कोरोना कर्फ्यू की बंदी के बाद से ऐसे ही पड़ा है। इसके अलावा तुराबनगर, घंटाघर, आंबेडकर रोड, नवयुग मार्केट में भी रेडीमेड गारमेंट की दुकानें और शोरूम हैं। कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन गाजियाबाद के मुताबिक जिले में तीन हजार से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों में दस करोड़ के माल के खराब होने का अनुमान है। एसोसिशन का कहना है कि कपड़ा अधिक समय तक बंद में रखे होने के चलते फ्रेशनेस खो देता है और नमी और सीलन से उसमें बदबू आने लगती है। इसी तरह गर्मियों केसीजन या शादियों के सीजन के लिए फरवरी मार्च में किया गया स्टॉक भी अब बिकने की उम्मीद नही हैं।
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क्या कहते हैं कारोबारी :
फर्नीचर की दुकानों को मेंटीनेंस के लिए हर सात दिन बाद खोलने की छूट दी चाहिए। व्यापारियों के करोड़ों के स्टॉक को खराब होने से बचाया जा सकता था।
- अशोक भारतीय, फर्नीचर कारोबारी
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खराब हुए माल को लेकर प्रदेश सरकार व्यापारियों के लिए राहत पैकेज दे। बिजली के बिल, बैंकों की किस्त, जीएसटी में भी राहत दी जाए।
- राकेश स्वामी, अध्यक्ष, रमतेराम रोड व्यापार मंडल
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कपड़ों का अपना अलग नेचर होता है। घरों में भी अलमारी में बंद कपड़ा खराब हो जाता है। जिले की करीब तीन हजार दुकानों में 10 करोड़ का कपड़ा खराब हुआ है।
- रजनीश बंसल, महामंत्री
कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन, गाजियाबाद
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डेढ़ महीने से अधिक समय से दुकानें बंद हैं। ऐसे में दुकानदार अपने माल के खराब होने का अनुमान लगा रहे हैं। शादियों का सीजन पिटने से भी इस बार नुकसान हुआ है।
- ठाकुर अखिलेश प्रधान, रेडीमेड गारमेंट कारोबारी
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कर्जे पर जिंदगी, काम पर लौटने की आस :
दुकानों में काम करने वाले स्टाफ को भी कोरोना कर्फ्यू ने बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। कारोबारियों की मदद के बाद भी दुकान पर काम करने वालों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कुछ इस तरह दुकानों पर काम करने वालों ने कुछ इस तरह अपना दर्द साझा किया
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मैं पिछले 20 साल से फर्नीचर तैयार करने का काम कर रहा हूं। पिछले दो सालों जैसी बर्बादी कभी नहीं देखी। घर खर्चों को चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
- इमरान, फर्नीचर कारीगर
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हर महीने फर्नीचर की ढुलाई में 10 से 12 हजार रुपये मिल जाते थे, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से दुकानें बंद होने से काम नहीं मिला है। कोरोना काल में कर्ज भी लिया है।
- राजू, फर्नीचर दुकान पर कर्मचारी
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बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो रहा है। घर खर्च के लिए दुकान मालिक ने मदद की है लेकिन लगातार दुकानें बंद रहीं तो खाने के भी लाले होंगे।
- अमन कुमार, रेडीमेड गारमेंट शोरूम कर्मी
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दो महीने से वेतन नहीं मिल सका है। जमापूंजी भी कोरोना के दौरान खत्म हो चुकी है। जल्द ही दुकानें नहीं खुलीं तो वापस लौटना पड़ेगा।
- राहुल कुमार, रेडीमेड गारमेंट शोरूम कर्मी
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कहां कितनी दुकानें बंद
फर्नीचर
रमतेराम रोड - 200
क्रॉसिंग रिपब्लिक- 80
जीटी रोड - 15
नंदग्राम - 20
विजयनगर- 35
ट्रांस हिंडन क्षेत्र- 40
गोविंदपुरम- 47
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रेडीमेड गारमेंट :
गांधीनगर- 80
संजयनगर- 45
विजयनगर- 65
घंटाघर- 100
बजरिया- 10
तुराबनगर- 150
दिल्ली गेट- 65
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गाजियाबाद। कोरोना कर्फ्यू के कारण करीब डेढ़ महीने से बंद दुकानाें और गोदामों में व्यापारियों का स्टॉक खराब हो रहा है। खासतौर पर रेडीमेड गारमेंट और फर्नीचर बाजार में 15 करोड़ का माल खराब होने का अनुमान है। व्यापारियों के अलावा उनके यहां कार्य करने वाले स्टाफ के सामने भी अब रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के चलते किराए पर दुकान चलाने वालों के प्रतिष्ठान बंदी के कगार पर हैं। बिजली के बिल, दुकान का किराया, बच्चों की शिक्षा और घर खर्च निकालने भी व्यापारियों के लिए भारी हो रहे हैं।
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आठ करोड़ रुपये महीने का है फर्नीचर का कारोबार :
जिले में फर्नीचर कारोबार का सबसे बड़ा केंद्र रमतेराम रोड बाजार है। यहां फर्नीचर की करीब 200 दुकानें संचालित हैं। रमतेराम रोड व्यापारी एसोसिएशन का कहना है कि करीब आठ करोड़ रुपये महीने का कारोबार इस बाजार में होता है लेकिन पिछले डेढ़ महीने में शादियों के सीजन पिटने से भी व्यापारियों को दस करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। तैयार फर्नीचर में दीमक लगने की संभावना है। एक अनुमान के मुताबिक करीब चार से पांच करोड़ का फर्नीचर डेढ़ महीने में खराब हुआ होगा। व्यापारी प्रतिदिन प्रतिष्ठान खोलते हैं तो फर्नीचर की देखरेख होती है। गोदाम में तैयार फर्नीचर खरीदने का अधिक खतरा है। इसमें बेड, तकिए, फोम के उत्पाद भी शामिल हैं।
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गर्मियों के सीजन माल नहीं बिकेगा साल भर
जिले में गांधीनगर में रेडीमेड गारमेंट का सबसे बड़ा कारोबार है। 80 से अधिक दुकान और शोरूम में लाखों का माल कोरोना कर्फ्यू की बंदी के बाद से ऐसे ही पड़ा है। इसके अलावा तुराबनगर, घंटाघर, आंबेडकर रोड, नवयुग मार्केट में भी रेडीमेड गारमेंट की दुकानें और शोरूम हैं। कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन गाजियाबाद के मुताबिक जिले में तीन हजार से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों में दस करोड़ के माल के खराब होने का अनुमान है। एसोसिशन का कहना है कि कपड़ा अधिक समय तक बंद में रखे होने के चलते फ्रेशनेस खो देता है और नमी और सीलन से उसमें बदबू आने लगती है। इसी तरह गर्मियों केसीजन या शादियों के सीजन के लिए फरवरी मार्च में किया गया स्टॉक भी अब बिकने की उम्मीद नही हैं।
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क्या कहते हैं कारोबारी :
फर्नीचर की दुकानों को मेंटीनेंस के लिए हर सात दिन बाद खोलने की छूट दी चाहिए। व्यापारियों के करोड़ों के स्टॉक को खराब होने से बचाया जा सकता था।
- अशोक भारतीय, फर्नीचर कारोबारी
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खराब हुए माल को लेकर प्रदेश सरकार व्यापारियों के लिए राहत पैकेज दे। बिजली के बिल, बैंकों की किस्त, जीएसटी में भी राहत दी जाए।
- राकेश स्वामी, अध्यक्ष, रमतेराम रोड व्यापार मंडल
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कपड़ों का अपना अलग नेचर होता है। घरों में भी अलमारी में बंद कपड़ा खराब हो जाता है। जिले की करीब तीन हजार दुकानों में 10 करोड़ का कपड़ा खराब हुआ है।
- रजनीश बंसल, महामंत्री
कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन, गाजियाबाद
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डेढ़ महीने से अधिक समय से दुकानें बंद हैं। ऐसे में दुकानदार अपने माल के खराब होने का अनुमान लगा रहे हैं। शादियों का सीजन पिटने से भी इस बार नुकसान हुआ है।
- ठाकुर अखिलेश प्रधान, रेडीमेड गारमेंट कारोबारी
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कर्जे पर जिंदगी, काम पर लौटने की आस :
दुकानों में काम करने वाले स्टाफ को भी कोरोना कर्फ्यू ने बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। कारोबारियों की मदद के बाद भी दुकान पर काम करने वालों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कुछ इस तरह दुकानों पर काम करने वालों ने कुछ इस तरह अपना दर्द साझा किया
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मैं पिछले 20 साल से फर्नीचर तैयार करने का काम कर रहा हूं। पिछले दो सालों जैसी बर्बादी कभी नहीं देखी। घर खर्चों को चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
- इमरान, फर्नीचर कारीगर
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हर महीने फर्नीचर की ढुलाई में 10 से 12 हजार रुपये मिल जाते थे, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से दुकानें बंद होने से काम नहीं मिला है। कोरोना काल में कर्ज भी लिया है।
- राजू, फर्नीचर दुकान पर कर्मचारी
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बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो रहा है। घर खर्च के लिए दुकान मालिक ने मदद की है लेकिन लगातार दुकानें बंद रहीं तो खाने के भी लाले होंगे।
- अमन कुमार, रेडीमेड गारमेंट शोरूम कर्मी
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दो महीने से वेतन नहीं मिल सका है। जमापूंजी भी कोरोना के दौरान खत्म हो चुकी है। जल्द ही दुकानें नहीं खुलीं तो वापस लौटना पड़ेगा।
- राहुल कुमार, रेडीमेड गारमेंट शोरूम कर्मी
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कहां कितनी दुकानें बंद
फर्नीचर
रमतेराम रोड - 200
क्रॉसिंग रिपब्लिक- 80
जीटी रोड - 15
नंदग्राम - 20
विजयनगर- 35
ट्रांस हिंडन क्षेत्र- 40
गोविंदपुरम- 47
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रेडीमेड गारमेंट :
गांधीनगर- 80
संजयनगर- 45
विजयनगर- 65
घंटाघर- 100
बजरिया- 10
तुराबनगर- 150
दिल्ली गेट- 65