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उपभोक्ता फोरम ने जीडीए पर लगाया जुर्माना
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जीडीए ने समय से नहीं दिए फ्लैट तो उपभोक्ता फोरम ने लगाया जुर्माना
गाजियाबाद। उपभोक्ता फोरम ने समय से फ्लैट आवंटित नहीं करने पर जीडीए के खिलाफ आदेश पारित किया है। फोरम ने जीडीए पर दोनों केसों में अलग-अलग जुर्माना लगाया है। पीड़ितों ने 16 साल पहले उपभोक्ता फोरम में परिवाद दर्ज कराते हुए कहा कि उन्होंने सालों पहले जीडीए से प्लाट व फ्लैट लेने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद उन्हें फ्लैट नहीं मिला है। ऐसे में उन्होंने प्लाट की मांग और शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जीडीए से खर्चा मांगा था। ऐसे में 16 साल बाद उपभोक्ता फोरम ने दोनों केसों का निस्तारण किया है।
केस-1
पक्की मोरी डासना गेट की रहने वाली पूनम का कहना है कि उनके पिता देवकी नंदन ने वर्ष 1996 से पहले जीडीए की स्कीम के तहत आवेदन किया था। उन्होंने प्लॉट बुक किया था, जिसके बदले उन्हें ए-205 कौशांबी में 167 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया। इसके बदले उन्होंने करीब डेढ़ लाख रुपये भी जमा कराए थे और बाद में वह लगातार किश्त भरते रहे। आरोप है कि बाद में जीडीए ने पहला प्लॉट निरस्त कर उन्हें एक 460 स्क्वॉयर का फिट का प्लॉट दे दिया, जिसके बाद देवकी नंदन ने इसकी शिकायत जीडीए से पत्र के माध्यम से की थी कि प्लॉट के मामले में उनकी बहन का कोई लेनदेन नहीं है। वह उनका मुरादाबाद के पते पर इस प्लॉट का पता लिख लें। वहीं, छह अप्रैल 1998 को देवकी नंदन की मौत हो गई। इसके बाद पूनम को जानकारी हुई कि जीडीए ने उनके प्लॉट पर किसी दूसरे व्यक्ति ने नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया है। आरोप है कि जीडीए ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उस प्लाट का बैनामा भी उनके ही परिवार के लोगों के नाम कर दिया है। जब उन्होंने पूछा तो जीडीए ने बताया कि प्लाट का आवंटन देवकी नंदन की बहन के नाम कर दिया है। पूनम ने 27 अगस्त 2003 को उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। इस पर फोरम ने आदेश किया है कि जीडीए 60 दिन के अंदर पूनम को प्लाट आवंटित करें और उसे कब्जा भी दिलाए। इसके अलावा उनके मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बदले उन्हें 50 हजार का जुर्माना दे। इसके साथ ही वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये भी दे।
केस-2
आरडीसी के रहने वाले सुनील कुमार ने 24 अप्रैल 1992 में जीडीए की स्कीम के तहत राजनगर में तीन बीएचके का फ्लैट बुक कराया था। उसके लिए उन्होंने 16 हजार रुपये भी जमा कराए थे, जिसके बाद उन्हें यह नहीं मिला तो उन्होंने जीडीए में इसकी शिकायत की। शिकायत के बाद जीडीए ने उन्हें एक फ्लैट दिया, जिसके बदले उन्होंने चार लाख रुपये भी जमा कराए। आरोप है कि पैसे जमा कराने के बाद भी उन्हें फ्लैट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। ऐसे में अब उपभोक्ता फोरम ने सुनील का परिवार आंशिक रूप से स्वीकार किया। उन्होंने जीडीए को आदेशित किया कि वह 63 हजार रुपये की राशि पर छह प्रतिशत का ब्याज सहित सुनील को अदा करें। वह शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये व व्यय वाद के लिए दो हजार रुपये का जुर्माना 60 दिन के अंदर जमा कराएं।
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गाजियाबाद। उपभोक्ता फोरम ने समय से फ्लैट आवंटित नहीं करने पर जीडीए के खिलाफ आदेश पारित किया है। फोरम ने जीडीए पर दोनों केसों में अलग-अलग जुर्माना लगाया है। पीड़ितों ने 16 साल पहले उपभोक्ता फोरम में परिवाद दर्ज कराते हुए कहा कि उन्होंने सालों पहले जीडीए से प्लाट व फ्लैट लेने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद उन्हें फ्लैट नहीं मिला है। ऐसे में उन्होंने प्लाट की मांग और शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जीडीए से खर्चा मांगा था। ऐसे में 16 साल बाद उपभोक्ता फोरम ने दोनों केसों का निस्तारण किया है।
केस-1
पक्की मोरी डासना गेट की रहने वाली पूनम का कहना है कि उनके पिता देवकी नंदन ने वर्ष 1996 से पहले जीडीए की स्कीम के तहत आवेदन किया था। उन्होंने प्लॉट बुक किया था, जिसके बदले उन्हें ए-205 कौशांबी में 167 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया। इसके बदले उन्होंने करीब डेढ़ लाख रुपये भी जमा कराए थे और बाद में वह लगातार किश्त भरते रहे। आरोप है कि बाद में जीडीए ने पहला प्लॉट निरस्त कर उन्हें एक 460 स्क्वॉयर का फिट का प्लॉट दे दिया, जिसके बाद देवकी नंदन ने इसकी शिकायत जीडीए से पत्र के माध्यम से की थी कि प्लॉट के मामले में उनकी बहन का कोई लेनदेन नहीं है। वह उनका मुरादाबाद के पते पर इस प्लॉट का पता लिख लें। वहीं, छह अप्रैल 1998 को देवकी नंदन की मौत हो गई। इसके बाद पूनम को जानकारी हुई कि जीडीए ने उनके प्लॉट पर किसी दूसरे व्यक्ति ने नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया है। आरोप है कि जीडीए ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उस प्लाट का बैनामा भी उनके ही परिवार के लोगों के नाम कर दिया है। जब उन्होंने पूछा तो जीडीए ने बताया कि प्लाट का आवंटन देवकी नंदन की बहन के नाम कर दिया है। पूनम ने 27 अगस्त 2003 को उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। इस पर फोरम ने आदेश किया है कि जीडीए 60 दिन के अंदर पूनम को प्लाट आवंटित करें और उसे कब्जा भी दिलाए। इसके अलावा उनके मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बदले उन्हें 50 हजार का जुर्माना दे। इसके साथ ही वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये भी दे।
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केस-2
आरडीसी के रहने वाले सुनील कुमार ने 24 अप्रैल 1992 में जीडीए की स्कीम के तहत राजनगर में तीन बीएचके का फ्लैट बुक कराया था। उसके लिए उन्होंने 16 हजार रुपये भी जमा कराए थे, जिसके बाद उन्हें यह नहीं मिला तो उन्होंने जीडीए में इसकी शिकायत की। शिकायत के बाद जीडीए ने उन्हें एक फ्लैट दिया, जिसके बदले उन्होंने चार लाख रुपये भी जमा कराए। आरोप है कि पैसे जमा कराने के बाद भी उन्हें फ्लैट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। ऐसे में अब उपभोक्ता फोरम ने सुनील का परिवार आंशिक रूप से स्वीकार किया। उन्होंने जीडीए को आदेशित किया कि वह 63 हजार रुपये की राशि पर छह प्रतिशत का ब्याज सहित सुनील को अदा करें। वह शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये व व्यय वाद के लिए दो हजार रुपये का जुर्माना 60 दिन के अंदर जमा कराएं।
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