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अमर उजाला स्टिंग : 300 रुपये में दलाल लर्निंग का जल्दी स्लॉट दिलाने केनाम कर रहे अवैध उगाही
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अमर उजाला स्टिंग : 300 रुपये में दलाल लर्निंग का जल्दी स्लॉट दिलाने केनाम कर रहे अवैध उगाही
राहुल सक्सेना
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के कारण लर्निंग लाइसेंस के लिए मारामारी मची है। लोगों को तीन से पांच महीने के बीच का स्लॉट मिल रहा है। जिन लोगों को पूर्व में स्लॉट मिल चुका है। कोरोना के कारण उनके स्लॉट भी निरस्त हो गए हैं। उन्हें भी दोबारा स्लॉट लेने के लिए तीन से चार महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। वह लोगों से जल्दी स्लॉट दिलाने केनाम पर 300 रुपये वसूल रहे हैं।
अमर उजाला द्वारा किए गए स्टिंग में वसूली कैमरे में कैद हो गई...
रिपोर्टर और दलालों के बीच हुई बातचीत के कुछ अंश।
रिपोर्टर: भैया डीएल के लिए स्लॉट नहीं मिल रहा?
दलाल: कौन से डीएल का स्लॉट चाहिए लर्निंग या परमानेंट।
रिपोर्टर: लर्निंग लाइसेंस के लिए चाहिए?
दलाल: ठीक है दिलवा देंगे।
रिपोर्टर: पांच महीने की वेटिंग दिखा रहा है?
दलाल: ठीक है, सितंबर की कोई डेट दिलवा देंगे।
रिपोर्टर: थोड़ा जल्दी दिलवा दो?
दलाल: डेट यहां से नहीं मिल रही है, लखनऊ से मिलेगी।
रिपोर्टर: कितने रुपये लोगे?
दलाल: 300 रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर: नहीं, कुछ कम पैसे बताया?
दलाल: चलो ढाई सौ रुपये दे देना।
रिपोर्टर: नहीं यह भी ज्यादा हैं?
दलाल: चलो आप एक काम करो 200 रुपये दे देना।
रिपोर्टर: ये बताओ सरकारी फीस कितनी है?
दलाल: सरकारी फीस तो एक रुपये भी नहीं है।
रिपोर्टर: डाक्यूमेंट्स क्या चाहिए?
दलाल: बस हमें तो केवल रशीद चाहिए।
दो महीने काम बंद, 16,800 लोगों के स्लॉट हुए निरस्त
कोरोना संक्रमण के कारण शासन ने दो महीने तक लर्निंग लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी थी। 23 अप्रैल से कोई लाइसेंस नहीं बन रहा था। 28 मई से परमानेंट लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन लर्निंग लाइसेंस पर उसके बाद भी रोक लगी रही। 21 जून को लर्निंग लाइसेंस के लिए स्लॉट खोले गए। जो स्लॉट लोगों ने पूर्व में लिए थे, उन 16,800 स्लॉट को निरस्त कर दिया गया। अब यह आवेदन करने वाले लोग दोबारा स्लॉट ले रहे हैं। इस कारण से और ज्यादा वेटिंग मिल रही है। सबसे ज्यादा समस्या लर्निंग के स्लॉट में ही आ रही है।
दलालों केइशारे पर चलता है कार्यालय के अंदर सिस्टम
आरटीओ कार्यालय के बाहर बैठे दलालों की कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों पर अच्छी पकड़ है। दलालों के इशारे पर कर्मचारी काम करते हैं। इन कर्मचारियों के माध्यम से दलाल स्क्रूटनी से लेकर सारे कार्य पूरे कराते हैं। लोगों से लेने वाली धनराशि का कुछ पैसा कर्मचारियों तक भी पहुंचता है।
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बाहर क्या हो रहा है इससे कोई मतलब नहीं
प्रक्रिया ऑनलाइन है। कार्यालय के बाहर क्या हो रहा है इससे कोई मतलब नहीं है। स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति घर बैठकर स्लॉट ले सकता है। उसे कार्यालय आने की आवश्यकता ही नहीं है। अगर, कार्यालय के बाहर बैठे लोगों की अवैध उगाही की शिकायत मिलती है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। लोगों को समझ लेना चाहिए कि सब ऑनलाइन है। कोई व्यक्ति दावा करता है कि वह जल्दी स्लॉट दिला देगा तो वह गलत है।
अरुण कुमार वार्ष्णेय, आरटीओ
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राहुल सक्सेना
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के कारण लर्निंग लाइसेंस के लिए मारामारी मची है। लोगों को तीन से पांच महीने के बीच का स्लॉट मिल रहा है। जिन लोगों को पूर्व में स्लॉट मिल चुका है। कोरोना के कारण उनके स्लॉट भी निरस्त हो गए हैं। उन्हें भी दोबारा स्लॉट लेने के लिए तीन से चार महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। वह लोगों से जल्दी स्लॉट दिलाने केनाम पर 300 रुपये वसूल रहे हैं।
अमर उजाला द्वारा किए गए स्टिंग में वसूली कैमरे में कैद हो गई...
रिपोर्टर और दलालों के बीच हुई बातचीत के कुछ अंश।
रिपोर्टर: भैया डीएल के लिए स्लॉट नहीं मिल रहा?
दलाल: कौन से डीएल का स्लॉट चाहिए लर्निंग या परमानेंट।
रिपोर्टर: लर्निंग लाइसेंस के लिए चाहिए?
दलाल: ठीक है दिलवा देंगे।
रिपोर्टर: पांच महीने की वेटिंग दिखा रहा है?
दलाल: ठीक है, सितंबर की कोई डेट दिलवा देंगे।
रिपोर्टर: थोड़ा जल्दी दिलवा दो?
दलाल: डेट यहां से नहीं मिल रही है, लखनऊ से मिलेगी।
रिपोर्टर: कितने रुपये लोगे?
दलाल: 300 रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर: नहीं, कुछ कम पैसे बताया?
दलाल: चलो ढाई सौ रुपये दे देना।
रिपोर्टर: नहीं यह भी ज्यादा हैं?
दलाल: चलो आप एक काम करो 200 रुपये दे देना।
रिपोर्टर: ये बताओ सरकारी फीस कितनी है?
दलाल: सरकारी फीस तो एक रुपये भी नहीं है।
रिपोर्टर: डाक्यूमेंट्स क्या चाहिए?
दलाल: बस हमें तो केवल रशीद चाहिए।
दो महीने काम बंद, 16,800 लोगों के स्लॉट हुए निरस्त
कोरोना संक्रमण के कारण शासन ने दो महीने तक लर्निंग लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी थी। 23 अप्रैल से कोई लाइसेंस नहीं बन रहा था। 28 मई से परमानेंट लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन लर्निंग लाइसेंस पर उसके बाद भी रोक लगी रही। 21 जून को लर्निंग लाइसेंस के लिए स्लॉट खोले गए। जो स्लॉट लोगों ने पूर्व में लिए थे, उन 16,800 स्लॉट को निरस्त कर दिया गया। अब यह आवेदन करने वाले लोग दोबारा स्लॉट ले रहे हैं। इस कारण से और ज्यादा वेटिंग मिल रही है। सबसे ज्यादा समस्या लर्निंग के स्लॉट में ही आ रही है।
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दलालों केइशारे पर चलता है कार्यालय के अंदर सिस्टम
आरटीओ कार्यालय के बाहर बैठे दलालों की कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों पर अच्छी पकड़ है। दलालों के इशारे पर कर्मचारी काम करते हैं। इन कर्मचारियों के माध्यम से दलाल स्क्रूटनी से लेकर सारे कार्य पूरे कराते हैं। लोगों से लेने वाली धनराशि का कुछ पैसा कर्मचारियों तक भी पहुंचता है।
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बाहर क्या हो रहा है इससे कोई मतलब नहीं
प्रक्रिया ऑनलाइन है। कार्यालय के बाहर क्या हो रहा है इससे कोई मतलब नहीं है। स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति घर बैठकर स्लॉट ले सकता है। उसे कार्यालय आने की आवश्यकता ही नहीं है। अगर, कार्यालय के बाहर बैठे लोगों की अवैध उगाही की शिकायत मिलती है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। लोगों को समझ लेना चाहिए कि सब ऑनलाइन है। कोई व्यक्ति दावा करता है कि वह जल्दी स्लॉट दिला देगा तो वह गलत है।
अरुण कुमार वार्ष्णेय, आरटीओ