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बिल्डरों का गोलमाल : 3.84 करोड़ की स्टांप चोरी कर बेच दिए फ्लैट
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राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसाइटी का वह टावर जिसमें बिना रजिस्ट्री कराए आवंटियो को
- फोटो : GHAZIABAD City
बिल्डरों का गोलमाल : 3.84 करोड़ की स्टांप चोरी कर बेच दिए फ्लैट
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में एक बिल्डर ने 3.84 करोड़ की स्टांप चोरी कर बिना रजिस्ट्री कराए 150 फ्लैट बेच दिए। रजिस्ट्री कराए बिना सिर्फ अनुबंध के आधार पर आवंटियों को फ्लैट पर कब्जा दे दिया गया। राजनगर एक्सटेंशन के अलावा इंदिरापुरम और एनएच-9 से सटी कई कॉलोनियों में बिल्डरों का यह खेल चल रहा है। राजनगर एक्सटेंशन में लोगों ने बिल्डर के ऐसे ही खेल की पोल खोल दी। प्रशासन ने बिल्डर को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
दरअसल, हाउसिंग प्रोजेक्ट का समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश बिल्डर इन प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पाए हैं। ऐसे में उन्हें जीडीए से पूर्णता प्रमाण पत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आवंटियों को आधे-अधूरे फ्लैटों पर कब्जा दिया जा रहा है। फ्लैट का पजेशन देने से पहले बिल्डर अपना पूरा पैसा ले लेते हैं, लेकिन कई-कई साल से इन फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं कराई जा रही है। यानी प्रदेश सरकार को स्टांप शुल्क से जो राजस्व दो-तीन साल पहले मिल जाना चाहिए था, वह अभी तक नहीं मिला है। बिल्डर ने फ्लैट भी बेच दिए और आवंटी को मिल भी गया, लेकिन सरकार को राजस्व नहीं मिला।
जांच में पकड़ा गया खेल
राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी के एल व एम टावर अभी अधूरे हैं। इन टावरों में बिल्डर ने पजेशन दे दिए हैं और करीब 150 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत स्टांप विभाग से की तो एडीएम फाइनेंस ने मामले की जांच कराई। जांच में पाया गया कि दोनों टावर में 150 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें फ्लैट पर कब्जा मिल गया है, लेकिन इन फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इन 150 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई जाती तो सरकार को 3.84 करोड़ रुपये का राजस्व स्टांप शुल्क के रूप में मिलता।
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नोटिस का जवाब न देने पर कार्रवाई
एडीएम फाइनेंस यशवर्धन श्रीवास्तव की ओर से अजनारा इंटीग्रिटी के बिल्डर को जारी किए गए नोटिस के मुताबिक बिल्डर से तीन दिन में जवाब मांगा गया है। रजिस्ट्री न कराने के संबंध में संतोषजनक जवाब न दिए जाने पर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
पार्श्वनाथ बिल्डर ने रजिस्ट्री के बाद भी नहीं दिया पजेशन
सिर्फ स्टांप चोरी के मामले ही नहीं बिल्डरों की मनमानी के कई अन्य मामले भी सामने आ रहे हैं। अर्थला में पार्श्वनाथ स्टरलिंग के नाम से बनाए गए हाउसिंग प्रोजेक्ट का बिल्डर ने करीब 10 साल बाद भी पजेशन नहीं दिया है। आवंटियों का कहना है कि बिल्डर ने फ्लैट की पूरी कीमत लेने के साथ-साथ रजिस्ट्री भी करा दी है, लेकिन फ्लैट अभी तक भी तैयार नहीं कराया गया है। फ्लैट पर कब्जा न मिल पाने से आवंटियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वह न तो इन फ्लैट में खुद रह पा रहे हैं और न ही इन्हें बेच पा रहे हैं। क्रॉसिंग रिपब्लिक की कई सोसायटियों में भी अभी तक लोगों को फ्लैटों पर कब्जा नहीं मिल पाया है।
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में एक बिल्डर ने 3.84 करोड़ की स्टांप चोरी कर बिना रजिस्ट्री कराए 150 फ्लैट बेच दिए। रजिस्ट्री कराए बिना सिर्फ अनुबंध के आधार पर आवंटियों को फ्लैट पर कब्जा दे दिया गया। राजनगर एक्सटेंशन के अलावा इंदिरापुरम और एनएच-9 से सटी कई कॉलोनियों में बिल्डरों का यह खेल चल रहा है। राजनगर एक्सटेंशन में लोगों ने बिल्डर के ऐसे ही खेल की पोल खोल दी। प्रशासन ने बिल्डर को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
दरअसल, हाउसिंग प्रोजेक्ट का समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश बिल्डर इन प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पाए हैं। ऐसे में उन्हें जीडीए से पूर्णता प्रमाण पत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आवंटियों को आधे-अधूरे फ्लैटों पर कब्जा दिया जा रहा है। फ्लैट का पजेशन देने से पहले बिल्डर अपना पूरा पैसा ले लेते हैं, लेकिन कई-कई साल से इन फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं कराई जा रही है। यानी प्रदेश सरकार को स्टांप शुल्क से जो राजस्व दो-तीन साल पहले मिल जाना चाहिए था, वह अभी तक नहीं मिला है। बिल्डर ने फ्लैट भी बेच दिए और आवंटी को मिल भी गया, लेकिन सरकार को राजस्व नहीं मिला।
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जांच में पकड़ा गया खेल
राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी के एल व एम टावर अभी अधूरे हैं। इन टावरों में बिल्डर ने पजेशन दे दिए हैं और करीब 150 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत स्टांप विभाग से की तो एडीएम फाइनेंस ने मामले की जांच कराई। जांच में पाया गया कि दोनों टावर में 150 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें फ्लैट पर कब्जा मिल गया है, लेकिन इन फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इन 150 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई जाती तो सरकार को 3.84 करोड़ रुपये का राजस्व स्टांप शुल्क के रूप में मिलता।
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नोटिस का जवाब न देने पर कार्रवाई
एडीएम फाइनेंस यशवर्धन श्रीवास्तव की ओर से अजनारा इंटीग्रिटी के बिल्डर को जारी किए गए नोटिस के मुताबिक बिल्डर से तीन दिन में जवाब मांगा गया है। रजिस्ट्री न कराने के संबंध में संतोषजनक जवाब न दिए जाने पर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
पार्श्वनाथ बिल्डर ने रजिस्ट्री के बाद भी नहीं दिया पजेशन
सिर्फ स्टांप चोरी के मामले ही नहीं बिल्डरों की मनमानी के कई अन्य मामले भी सामने आ रहे हैं। अर्थला में पार्श्वनाथ स्टरलिंग के नाम से बनाए गए हाउसिंग प्रोजेक्ट का बिल्डर ने करीब 10 साल बाद भी पजेशन नहीं दिया है। आवंटियों का कहना है कि बिल्डर ने फ्लैट की पूरी कीमत लेने के साथ-साथ रजिस्ट्री भी करा दी है, लेकिन फ्लैट अभी तक भी तैयार नहीं कराया गया है। फ्लैट पर कब्जा न मिल पाने से आवंटियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वह न तो इन फ्लैट में खुद रह पा रहे हैं और न ही इन्हें बेच पा रहे हैं। क्रॉसिंग रिपब्लिक की कई सोसायटियों में भी अभी तक लोगों को फ्लैटों पर कब्जा नहीं मिल पाया है।