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दो साल से फंडिंग पैटर्न में फंसे दो मेट्रो प्रोजेक्ट
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दो साल से फंडिंग पैटर्न में फंसे दो मेट्रो प्रोजेक्ट
गाजियाबाद। दो साल की लंबी कवायद, दो संशोधित डीपीआर और फंडिंग पैटर्न को लेकर कई दौर की बैठक के बावजूद महानगर में मेट्रो के दोनों प्रोजेक्ट का अब तक फंडिंग पैटर्न तय नहीं हो पाया है। साल 2019 में दूसरी संसोधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होने के बावजूद वैशाली से मोहननगर मेट्रो फेज-तीन और नोएडा से साहिबाबाद फेज-चार प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। पहली डीपीआर में प्रोजेक्ट को पूरा होने की चार साल समयसीमा तय की गई थी, लेकिन प्रोजेक्ट शुरू होने की जगह तीन साल ऐसे ही जाया हो गए हैं।
विभिन्न प्रोजेक्टों की विस्तृत रिपोर्ट के साथ दी फंड की स्थिति
शासन स्तर पर दोनों मेट्रो प्रोजेक्ट की फंडिंग पैटर्न पर कई दौर की बातचीत होने के बाद भी बीते डेढ़ साल में प्रोजेक्ट एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है। 10 माह पहले शासन ने जीडीए से उनके जारी विभिन्न प्रोजेक्टों की विस्तृत रिपोर्ट के साथ फंड की स्थिति मांगी थी। जीडीए के रिपोर्ट भेजने के बावजूद प्रोजेक्ट में कोई प्रगति नहीं हुई है। रिपोर्ट में जीडीए ने मेट्रो के दोनों नए कॉरिडोर को पुराने फंडिंग पेटर्न पर बनाने से इंकार कर दिया था।
दोनों मेट्रो प्रोजेक्ट में राज्य सरकार से 50 फीसदी फंडिंग की मांग
दोनों मेट्रो कॉरिडोर की भेजी गई संशोधित डीपीआर में जीडीए ने 3325 करोड़ के मेट्रो प्रोजेक्ट में राज्य सरकार से 50 फीसदी फंडिंग की मांग की है। लेकिन शासन स्तर से अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। संशोधित डीपीआर में जीडीए ने मेट्रो के प्रोजेक्ट में प्रदेश सरकार से 50 फीसदी, जबकि बाकी 20 फीसदी अंशदान केंद्र और 30 फीसदी अंशदान जीडीए, आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी का प्रस्ताव दिया था। दोनों प्रोजेक्ट की खुद केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद वीके सिंह की ओर से शासन में पैरवी की जा रही है। दोनों प्रोजेक्ट में मुख्य पेंच फंडिंग पैटर्न को लेकर फंसा हुआ है। जीडीए ने पुराने फंडिंग पैटर्न पर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है।
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फेस-तीन कॉरिडोर की 1808 करोड़ और फेस-चार 1517 करोड़ है लागत
वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.04 किमी है। इस कॉरिडोर की कुल लागत 1808.22 करोड़ है। इस कॉरिडोर पर कुल चार स्टेशन में प्रहलाद गढ़ी, वसुंधरा सेक्टर-14, साहिबाबाद और मोहननगर शामिल हैं। दूसरी ओर नोएडा से साहिबाबाद मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.017 किमी है। इस कॉरिडोर की लागत 1517 करोड़ है। इस कॉरिडोर पर कुल पांच स्टेशन में वैभव खंड, इंदिरापुरम, शक्ति खंड और सेक्टर-पांचए वसुंधरा मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। मेट्रो फेज-तीन के दोनों कॉरिडोर में साहिबाबाद में बनने वाला स्टेशन अहम होगा। यहां वैशाली से मोहननगर और नोएडा से साहिबाबाद कॉरिडोर को जोड़ने के लिए जंक्शन बनेगा। यहीं से रैपिड रेल स्टेशन से कनेक्टिविटी दी जानी है।
डीएमआरसी ने फेज-तीन प्रोजेक्ट पर बढ़ने का दिया था सुझाव
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जीडीए सहित शासन को वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर पर आगे बढ़ने का सुझाव दिया था। डीएमआरसी का तर्क था कि इस प्रोजेक्ट से मेट्रो की ब्लू लाइन की मोहननगर पर रेड लाइन से कनेक्टिविटी हो जाएगी। दूसरी ओर मेट्रो की ब्लू लाइन की मदद से गाजियाबाद के लोग दिल्ली व नोएडा के किसी भी कोने में पहुंच सकेंगे।
पुराने फंडिंग पैटर्न पर आगे बढ़ाना मुश्किल
मेट्रो फेज-तीन और चार के फंडिंग पैटर्न को लेकर जीडीए की स्थिति साफ है। दोनों प्रोजेक्ट को पुराने फंडिंग पैटर्न पर आगे बढ़ाना मुश्किल है। - संतोष कुमार राय, सचिव, जीडीए
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गाजियाबाद। दो साल की लंबी कवायद, दो संशोधित डीपीआर और फंडिंग पैटर्न को लेकर कई दौर की बैठक के बावजूद महानगर में मेट्रो के दोनों प्रोजेक्ट का अब तक फंडिंग पैटर्न तय नहीं हो पाया है। साल 2019 में दूसरी संसोधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होने के बावजूद वैशाली से मोहननगर मेट्रो फेज-तीन और नोएडा से साहिबाबाद फेज-चार प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। पहली डीपीआर में प्रोजेक्ट को पूरा होने की चार साल समयसीमा तय की गई थी, लेकिन प्रोजेक्ट शुरू होने की जगह तीन साल ऐसे ही जाया हो गए हैं।
विभिन्न प्रोजेक्टों की विस्तृत रिपोर्ट के साथ दी फंड की स्थिति
शासन स्तर पर दोनों मेट्रो प्रोजेक्ट की फंडिंग पैटर्न पर कई दौर की बातचीत होने के बाद भी बीते डेढ़ साल में प्रोजेक्ट एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है। 10 माह पहले शासन ने जीडीए से उनके जारी विभिन्न प्रोजेक्टों की विस्तृत रिपोर्ट के साथ फंड की स्थिति मांगी थी। जीडीए के रिपोर्ट भेजने के बावजूद प्रोजेक्ट में कोई प्रगति नहीं हुई है। रिपोर्ट में जीडीए ने मेट्रो के दोनों नए कॉरिडोर को पुराने फंडिंग पेटर्न पर बनाने से इंकार कर दिया था।
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दोनों मेट्रो प्रोजेक्ट में राज्य सरकार से 50 फीसदी फंडिंग की मांग
दोनों मेट्रो कॉरिडोर की भेजी गई संशोधित डीपीआर में जीडीए ने 3325 करोड़ के मेट्रो प्रोजेक्ट में राज्य सरकार से 50 फीसदी फंडिंग की मांग की है। लेकिन शासन स्तर से अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। संशोधित डीपीआर में जीडीए ने मेट्रो के प्रोजेक्ट में प्रदेश सरकार से 50 फीसदी, जबकि बाकी 20 फीसदी अंशदान केंद्र और 30 फीसदी अंशदान जीडीए, आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी का प्रस्ताव दिया था। दोनों प्रोजेक्ट की खुद केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद वीके सिंह की ओर से शासन में पैरवी की जा रही है। दोनों प्रोजेक्ट में मुख्य पेंच फंडिंग पैटर्न को लेकर फंसा हुआ है। जीडीए ने पुराने फंडिंग पैटर्न पर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है।
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फेस-तीन कॉरिडोर की 1808 करोड़ और फेस-चार 1517 करोड़ है लागत
वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.04 किमी है। इस कॉरिडोर की कुल लागत 1808.22 करोड़ है। इस कॉरिडोर पर कुल चार स्टेशन में प्रहलाद गढ़ी, वसुंधरा सेक्टर-14, साहिबाबाद और मोहननगर शामिल हैं। दूसरी ओर नोएडा से साहिबाबाद मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.017 किमी है। इस कॉरिडोर की लागत 1517 करोड़ है। इस कॉरिडोर पर कुल पांच स्टेशन में वैभव खंड, इंदिरापुरम, शक्ति खंड और सेक्टर-पांचए वसुंधरा मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। मेट्रो फेज-तीन के दोनों कॉरिडोर में साहिबाबाद में बनने वाला स्टेशन अहम होगा। यहां वैशाली से मोहननगर और नोएडा से साहिबाबाद कॉरिडोर को जोड़ने के लिए जंक्शन बनेगा। यहीं से रैपिड रेल स्टेशन से कनेक्टिविटी दी जानी है।
डीएमआरसी ने फेज-तीन प्रोजेक्ट पर बढ़ने का दिया था सुझाव
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जीडीए सहित शासन को वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर पर आगे बढ़ने का सुझाव दिया था। डीएमआरसी का तर्क था कि इस प्रोजेक्ट से मेट्रो की ब्लू लाइन की मोहननगर पर रेड लाइन से कनेक्टिविटी हो जाएगी। दूसरी ओर मेट्रो की ब्लू लाइन की मदद से गाजियाबाद के लोग दिल्ली व नोएडा के किसी भी कोने में पहुंच सकेंगे।
पुराने फंडिंग पैटर्न पर आगे बढ़ाना मुश्किल
मेट्रो फेज-तीन और चार के फंडिंग पैटर्न को लेकर जीडीए की स्थिति साफ है। दोनों प्रोजेक्ट को पुराने फंडिंग पैटर्न पर आगे बढ़ाना मुश्किल है। - संतोष कुमार राय, सचिव, जीडीए