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बाहर से आकर बसे आठ लाख लोगों को लगेगी वैक्सीन, आधार जरूरी नहीं
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बाहर से आकर बसे आठ लाख लोगों को लगेगी वैक्सीन, आधार जरूरी नहीं
गाजियाबाद। दूसरे जिलों से आकर गाजियाबाद में रह रहे करीब आठ लाख बाहरी लोगों को भी अब कोरोनारोधी टीका लगने में दिक्कत नहीं होगी। आधार कार्ड न होने पर वह गाजियाबाद का बिजली बिल, बैंक पासबुक समेत अन्य दस्तावेज पते के सुबूत के तौर पर दे सकेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की डायरेक्टर ने इसके लिए सभी जिलों को आदेश भेजे हैं।
कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए टीकाकरण जरूरी है। इसके लिए अब सरकार ने 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण भी शुरू कर दिया है। गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के एनसीआर के शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो मूल निवासी किसी दूसरे राज्य या जिले के हैं। ऐसे में उनके पास गाजियाबाद का आधार कार्ड नहीं है। ऐसे लोगों को पंजीकरण कराने में दिक्कतें आ रही थीं। गाजियाबाद में करीब 7.5 से 8 लाख लोग ऐसे हैं जो गैर जनपदों या दूसरे राज्यों के हैं। इनमें श्रमिकों की बड़ी संख्या है। ऐसे में कोरोना संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए सभी को टीका लगाया जाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यूपी की डायरेक्टर अपर्णा उपाध्याय ने सभी जिलों में अब आधार की अनिवार्यता को खत्म कर अन्य प्रमाणपत्रों को भी पते के सुबूत के तौर पर मान्यता दी है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कहा है कि 18 से 44 वर्ष की आयु वर्ग के लोग टीकाकरण के लिए किरायानामा, लीज अनुबंध, बैंक पासबुक, संस्थानों द्वारा कर्मचारियों को जारी प्रमाणपत्र या आईडी कार्ड भी प्रमाण के रूप में दे सकते हैं। ऐसे में गाजियाबाद जिले के उन आठ लाख लोगों को भी टीका लग सकेगा, जिनके पास मूल निवास प्रमाणपत्र या आधार कार्ड गाजियाबाद जिले का नहीं है।
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गाजियाबाद। दूसरे जिलों से आकर गाजियाबाद में रह रहे करीब आठ लाख बाहरी लोगों को भी अब कोरोनारोधी टीका लगने में दिक्कत नहीं होगी। आधार कार्ड न होने पर वह गाजियाबाद का बिजली बिल, बैंक पासबुक समेत अन्य दस्तावेज पते के सुबूत के तौर पर दे सकेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की डायरेक्टर ने इसके लिए सभी जिलों को आदेश भेजे हैं।
कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए टीकाकरण जरूरी है। इसके लिए अब सरकार ने 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण भी शुरू कर दिया है। गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के एनसीआर के शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो मूल निवासी किसी दूसरे राज्य या जिले के हैं। ऐसे में उनके पास गाजियाबाद का आधार कार्ड नहीं है। ऐसे लोगों को पंजीकरण कराने में दिक्कतें आ रही थीं। गाजियाबाद में करीब 7.5 से 8 लाख लोग ऐसे हैं जो गैर जनपदों या दूसरे राज्यों के हैं। इनमें श्रमिकों की बड़ी संख्या है। ऐसे में कोरोना संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए सभी को टीका लगाया जाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यूपी की डायरेक्टर अपर्णा उपाध्याय ने सभी जिलों में अब आधार की अनिवार्यता को खत्म कर अन्य प्रमाणपत्रों को भी पते के सुबूत के तौर पर मान्यता दी है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कहा है कि 18 से 44 वर्ष की आयु वर्ग के लोग टीकाकरण के लिए किरायानामा, लीज अनुबंध, बैंक पासबुक, संस्थानों द्वारा कर्मचारियों को जारी प्रमाणपत्र या आईडी कार्ड भी प्रमाण के रूप में दे सकते हैं। ऐसे में गाजियाबाद जिले के उन आठ लाख लोगों को भी टीका लग सकेगा, जिनके पास मूल निवास प्रमाणपत्र या आधार कार्ड गाजियाबाद जिले का नहीं है।
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