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कोरोना वायरस: घर पर ऑक्सीजन लेने से थक रहे फेफड़े, रोज पांच पहुंच रहे अस्पताल, बढ़ रही मृत्युदर

Thu, 13 May 2021 11:33 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो राजीव शर्मा, अमर उजाला, गाजियाबाद
राजीव शर्मा, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: गाजियाबाद ब्यूरो Updated Thu, 13 May 2021 11:33 AM IST
सार

कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद अस्पतालों में बेड नहीं मिलने के कारण होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों पर ऑक्सीजन की डोज भारी पड़ रही है। घर पर डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन लेने की वजह से मरीजों के फेफड़े थक रहे हैं।

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Coronavirus infected taking oxygen at home tiring lungs each day 5 patients reaching hospitals
गाजियाबाद के इंदिरापुरम में सिख संगठन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे ऑक्सीजन का लाभ उठाता संक्रमित बच्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद अस्पतालों में बेड नहीं मिलने के कारण होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों पर ऑक्सीजन की डोज भारी पड़ रही है। घर पर डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन लेने की वजह से मरीजों के फेफड़े थक रहे हैं।

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ऑक्सीजन की ज्यादा डोज की वजह से अधिकांश लोगों की हालत सुधरने की बजाय बिगड़ रही है और मृत्यु दर बढ़ रही है। ऐसे में अब प्रशासन जगह-जगह लग रहे ऑक्सीजन लंगर के संचालकों से समन्वय स्थापित कर वहां आने वाले मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराएगा।
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में अप्रैल माह में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गाजियाबाद में कई दिन तक रोजाना 1200 से 1500 लोग संक्रमित मिले हैं। एक समय में एक्टिव केसों की संख्या 6800 तक पहुंच गई थी, जबकि गाजियाबाद जिले में कोविड के सामान्य बेड 3200 और आईसीयू बेड 773 हैं।
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यानी तीन हजार से ज्यादा बेड की कमी से जिला जूझ रहा था। सभी सरकारी और प्राइवेट कोविड अस्पतालों में बेड फुल हो गए। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को होम आइसोलेशन की इजाजत दे दी। यहां डॉक्टरों से टेलीमेडिसिन के जरिए इलाज कराया गया और ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर घर पर ही ऑक्सीजन देनी शुरू कर दी गई।

डॉक्टरों का कहना है कि बिना अनुभवी स्टाफ के ऑक्सीजन की डोज देने में भी कई गलतियां हुईं। लगातार ज्यादा डोज मिलने से लोगों के फेफड़े थक गए। कुछ घंटों तक तो उन्होंने रिस्पांस किया, इसके बाद फेफड़ों में संक्रमण बढ़ता गया और धीरे-धीरे यह ब्लॉक होते चले गए। जिसकी वजह से मरीज मौत के मुंह तक पहुंच गए।

क्या करें होम आइसोलेशन के मरीज

  1. डॉक्टर मिथिलेश कुमार के मुताबिक होम आइसोलेशन के मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टर के निरंतर संपर्क में बने रहना चाहिए।
  2. 94 से 90 फीसदी ऑक्सीजन लेवल तक अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर ऑक्सीजन की डोज देने से बचें। आपातकाल के लिए घर में ऑक्सीजन का प्रबंध कर सकते हैं।
  3. 90 फीसदी से नीचे ऑक्सीजन लेवल आने पर इलाज के लिए तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें और सलाह लेकर ऑक्सीजन देने की पूरी प्रक्रिया समझ लें।
  4. बिना चिकित्सीय सलाह के लंबे समय तक मरीज को ऑक्सीजन न दें। तीन-चार घंटे के भीतर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराएं।
  5. डायबिटीज, बीपी, ट्रांसप्लांट व 65 साल से ज्यादा आयु वाले मरीजों को 94 फीसदी से कम ऑक्सीजन लेवल पहुंचते ही अस्पताल में भर्ती कराएं।
  6. बिना डॉक्टरी सलाह के रेमडेसिविर का स्वयं घर पर उपयोग न करें। इसके साइड इफेक्ट भी हैं।


संक्रमण बढ़ने के संकेत हैं ऑक्सीजन की जरूरत
कोविड-19 के दौरान अस्पतालों में बेड की मॉनिटरिंग के लिए बनाए गए नोडल अधिकारी व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार का कहना है कि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ना इस बात के संकेत हैं कि संक्रमण बढ़ रहा है। शुरुआती दौर में जब मरीज को बाहर से ऑक्सीजन दी जाती है तो उसका ऑक्सीजन लेवल बढ़कर 97-98 तक आ जाता है। तब फेफड़े अच्छा रिस्पांस देते हैं। परिजनों को लगता है कि अब मरीज ठीक हो रहा है।

कुछ घंटों बाद जब बीमार फेफड़े जबरदस्ती काम करने से थक जाते हैं तो वह रिस्पांस कम करने लगते हैं और मरीज का ऑक्सीजन स्तर घटने लगता है। ऐसे में मरीज को तत्काल बेहतर इलाज दिलाए जाने की जरूरत होती है। घर पर ऑक्सीजन लगाकर संक्रमण ठीक होने का इंतजार करने की बजाय डॉक्टर से कंसल्ट करें और जरूरत हो तो दवा बदलें, ताकि संक्रमण ज्यादा बढ़ने से पहले काबू कर लिया जाए। संक्रमण की स्थिति देखकर दवा की डोज तय की जाती है।

केस हिस्ट्री से समझें पूरी बात

केस हिस्ट्री -1
भोपुरा स्थित डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले वीरपाल शर्मा परिवार के अन्य लोगों के कोविड पॉजिटिव होने पर बीमार हुए थे। बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल में बेड न मिलने की वजह से कड़कड़डूमा दिल्ली के एक डॉक्टर से टेलीमेडिसिन लेकर इलाज शुरू किया। अगले दिन उनकी हालत और बिगड़ गई और ऑक्सीजन लेवल 85 फीसदी पर पहुंच गया। ब्लैक में सिलिंडर लेकर ऑक्सीजन की डोज शुरू की। अगले दिन ऑक्सीजन का स्तर 75 फीसदी पर पहुंच गया। दोबारा ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतजाम कर डोज शुरू की गई। अगले दिन सुबह उनका निधन हो गया।

केस हिस्ट्री-2
नेहरू नगर निवासी 32 साल के एक युवक सनी ने कोविड पॉजिटिव होने पर होम आइसोलेशन में इलाज शुरू किया। दो दिन दवा लेने के बाद भी तबीयत बिगड़ती चली गई। अस्पताल में बेड न मिलने की वजह से सही इलाज नहीं मिला। ऑक्सीजन का स्तर 80 पर पहुंच जाने के बाद परिजनों ने सिलिंडर का इंतजाम किया और ऑक्सीजन देनी शुरू की। अगले दिन दोपहर बाद स्थिति और बिगड़ गई तो मेरठ के एक अस्पताल में सनी को भर्ती कराया गया। दो दिन बाद उसका निधन हो गया।

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