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हक लेकर ही बॉर्डर से लौटेंगे किसान
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यूपी गेट पर किसानों के साथ मौजूद राकेश टिकैत।
हक लेकर ही बॉर्डर से लौटेंगे किसान : टिकैत
साहिबाबाद। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान आंदोलन अगली सर्दी तक जाएगा। सरकार एक कॉल दूरी की बात करती है लेकिन मिल नहीं रही है। उन्होंने कहा कि उनके बंगाल जाने का मतलब चुनाव से नहीं है।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब लंबा चलने वाला है। ऐसा लगता है कि आंदोलन अब सर्दी तक जाएगा। उससे आगे भी चला जाए तो कोई बात नहीं, किसान थकने वाला नहीं है। हक लेकर ही यहां से उठेगा। सरकार की तरफ से बातचीत को लेकर काई न्योता नहीं मिला है। अगर किसी को सरकार मिले तो उन्हें बताए। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही पश्चिम बंगाल जाएंगे। वहां जाकर किसान मजदूर और युवाओं से मिलेंगे। तीनों कृषि कानून और एमएसपी को लेकर किसानों से बात करेंगे। हालांकि बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव से कोई मतलब नहीं है। वह किसानों की बात करने बंगाल जाएंगे।
टिकैत ने स्क्रीन पर देखा प्रियंका का गाना
यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन को सौ दिन से अधिक का समय हो गया है। गर्मी बढ़ने के साथ आंदोलन स्थल पर अब चहल पहल कम दिखती है। किसान अपने तंबू या फिर मंच के सामने पंडाल में बैठकर समय काटते नजर आ रहे हैं। मंगलवार दोपहर को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत मंच पर पहुंचे। उन्होंने मंच पर अनशन पर बैठे किसानों से बातचीत की। मंच पर पहुंचते ही हर कोई उनके साथ सेल्फी लेने को बेताब दिखाई दिए। इसके बाद वह मंच से उतरे और किसानों के बीच जाकर बैठ गए। उन्होंने किसानों के साथ बैठकर मंच के पास लगी स्क्रीन पर प्रियंका चौधरी द्वारा उन पर बनाए गाने को देखा। इस दौरान गौरव टिकैत द्वारा राकेश टिकैत का गाना देखता वीडियो बनाया गया। राकेश टिकैत ने कहा कि प्रियंका ने उनसे गाना देखने का अनुरोध किया था। उनके अनुरोध पर उन्होंने किसानों के साथ बैठकर गाना मंच के सामने लगी स्क्रीन पर देखा। जिसके बाद वहां से हरियाणा के लिए निकल गए।
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बदल गया रूटीन
आंदोलन स्थल पर किसानों का रूटीन बदल गया है। जहां पहले किसान दिनभर इधर से उधर टहलते नजर आते थे अब गर्मी बढ़ने के साथ ही नजारा बदल रहा है। किसान अब धूप से बचने के लिए या तो कैंप में बैठकर समय व्यतीत करते हैं या फिर मंच के सामने लगे पंडाल में बैठते हैं। शाम होते ही किसान तंबू से निकल जाते हैं और आंदोलन स्थल पर चहल पहल बढ़ जाती है।
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साहिबाबाद। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान आंदोलन अगली सर्दी तक जाएगा। सरकार एक कॉल दूरी की बात करती है लेकिन मिल नहीं रही है। उन्होंने कहा कि उनके बंगाल जाने का मतलब चुनाव से नहीं है।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब लंबा चलने वाला है। ऐसा लगता है कि आंदोलन अब सर्दी तक जाएगा। उससे आगे भी चला जाए तो कोई बात नहीं, किसान थकने वाला नहीं है। हक लेकर ही यहां से उठेगा। सरकार की तरफ से बातचीत को लेकर काई न्योता नहीं मिला है। अगर किसी को सरकार मिले तो उन्हें बताए। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही पश्चिम बंगाल जाएंगे। वहां जाकर किसान मजदूर और युवाओं से मिलेंगे। तीनों कृषि कानून और एमएसपी को लेकर किसानों से बात करेंगे। हालांकि बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव से कोई मतलब नहीं है। वह किसानों की बात करने बंगाल जाएंगे।
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टिकैत ने स्क्रीन पर देखा प्रियंका का गाना
यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन को सौ दिन से अधिक का समय हो गया है। गर्मी बढ़ने के साथ आंदोलन स्थल पर अब चहल पहल कम दिखती है। किसान अपने तंबू या फिर मंच के सामने पंडाल में बैठकर समय काटते नजर आ रहे हैं। मंगलवार दोपहर को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत मंच पर पहुंचे। उन्होंने मंच पर अनशन पर बैठे किसानों से बातचीत की। मंच पर पहुंचते ही हर कोई उनके साथ सेल्फी लेने को बेताब दिखाई दिए। इसके बाद वह मंच से उतरे और किसानों के बीच जाकर बैठ गए। उन्होंने किसानों के साथ बैठकर मंच के पास लगी स्क्रीन पर प्रियंका चौधरी द्वारा उन पर बनाए गाने को देखा। इस दौरान गौरव टिकैत द्वारा राकेश टिकैत का गाना देखता वीडियो बनाया गया। राकेश टिकैत ने कहा कि प्रियंका ने उनसे गाना देखने का अनुरोध किया था। उनके अनुरोध पर उन्होंने किसानों के साथ बैठकर गाना मंच के सामने लगी स्क्रीन पर देखा। जिसके बाद वहां से हरियाणा के लिए निकल गए।
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बदल गया रूटीन
आंदोलन स्थल पर किसानों का रूटीन बदल गया है। जहां पहले किसान दिनभर इधर से उधर टहलते नजर आते थे अब गर्मी बढ़ने के साथ ही नजारा बदल रहा है। किसान अब धूप से बचने के लिए या तो कैंप में बैठकर समय व्यतीत करते हैं या फिर मंच के सामने लगे पंडाल में बैठते हैं। शाम होते ही किसान तंबू से निकल जाते हैं और आंदोलन स्थल पर चहल पहल बढ़ जाती है।