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गाजियाबाद में भविष्य तलाश रहे दिल्ली-पंजाब के उद्यमी
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गाजियाबाद में भविष्य तलाश रहे दिल्ली-पंजाब के उद्यमी
गाजियाबाद। दिल्ली और पंजाब की लगभग 12 औद्योगिक इकाइयों ने जिले में उद्योग शुरू करने के लिए दिलचस्पी दिखाई है। अधिकारियों का कहना है कि इन उद्यमियों को कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि भी दिखाई गई है। इसके बाद उद्यमियों की ओर से जवाब आना है। जिला उद्योग केंद्र बाहरी राज्यों से आने वाले निवेश को लेकर उद्यमियों के संपर्क में है।
दिल्ली और पंजाब की रेडीमेड गारमेंट, अंडर गारमेंट की इकाईयों ने जिले में उद्योग स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाई। इनमें से एक इकाई करीब 50 से 60 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली इकाई भी है। जिला उद्योग केंद्र कुछ उद्यमियों को उपलब्ध भूखंड भी दिख चुका है। हापुड़-पिलखुवा में भी उद्यमियों को भूखंड दिखाए गए, लेकिन अधिक भूखंड न होने से अभी ज्यादा विकल्प नहीं दिखाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध भूखंडों को सूचीबद्ध किया गया है। सभी उद्यमियों को इसकी लगातार जानकारी दी जा रही है। दिल्ली-पंजाब की ये औद्योगिक इकाइयां अगर जिले में निवेश करती हैं तो हर इकाई में 20 से 30 व्यक्ति को रोजगार मिल सकता है। बड़ी इकाई में 100 से अधिक लोग रोजगार पा सकते हैं। जिला उद्योग केंद्र के आयुक्त बीरेंद्र कुमार, संयुक्त का कहना है कि लॉकडाउन के बाद जिले में इन इकाइयों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अन्य राज्यों के उद्योग जिले में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उनसे लगातार संपर्क किया जा रहा है। भूखंडों को लेकर भी सूची बनाई गई है। आने वाले दिनों में उद्यमियों द्वारा उद्योग स्थापना को लेकर विभाग से संपर्क करने की उम्मीद है।
साइकिल उद्योग ने भी पकड़ी रफ्तार
एक वक्त था कि रोजमर्रा की जिंदगी में साइकिल घर-घर जरूरत होती थी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अपने जरूरी काम के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। वक्त के साथ साइकिल की अहमियत कम हुई और इसके उत्पादन और बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ गई। साइकिल की धीमी रफ्तार को कोरोना काल में ग्राहक मिले और बिक्री में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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पिछले करीब 10 साल के मुकाबले कोरोना काल में साइकिल की बिक्री अधिक हुई। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक हुए। जिम, पार्क सहित अन्य जगह पाबंदी थी। ऐसे में साइकिल एक बेहतर फिटनेस विकल्प के तौर पर उभरा। दुकानदारों के मुताबिक सामान्य साइकिल के अलावा लोग अब हाई रेंज स्पोर्ट्स साइकिलों को भी पसंद कर रहे हैं।
मई के बाद बढ़ता गया उत्पादन
मई में लॉकडाउन खुलने के बाद साइकिल उत्पादन ने भी रफ्तार पकड़ी। जिले के करीब 70 उद्योगों में साइकिल के पार्ट्स तैयार होते हैं। रिंग्स उत्पादन करने वाले उद्यमी गौतम ने बताया कि शुरुआत में लेबर न होने से बड़ी चुनौती थी लेकिन कम लेबर के साथ काम शुरू किया और कोरोना काल में भी उत्पादन जारी रहा।
जमकर हुई बिक्री
2020 में 2500 से लेकर 3000 सामान्य साइकिल की बिक्री हुई। जबकि हाई रेंज साइकिल की बिक्री दो हजार के आसपास रही। बीते साल में एक से डेढ़ हजार साइकिलें ही बिकी थी।
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गाजियाबाद। दिल्ली और पंजाब की लगभग 12 औद्योगिक इकाइयों ने जिले में उद्योग शुरू करने के लिए दिलचस्पी दिखाई है। अधिकारियों का कहना है कि इन उद्यमियों को कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि भी दिखाई गई है। इसके बाद उद्यमियों की ओर से जवाब आना है। जिला उद्योग केंद्र बाहरी राज्यों से आने वाले निवेश को लेकर उद्यमियों के संपर्क में है।
दिल्ली और पंजाब की रेडीमेड गारमेंट, अंडर गारमेंट की इकाईयों ने जिले में उद्योग स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाई। इनमें से एक इकाई करीब 50 से 60 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली इकाई भी है। जिला उद्योग केंद्र कुछ उद्यमियों को उपलब्ध भूखंड भी दिख चुका है। हापुड़-पिलखुवा में भी उद्यमियों को भूखंड दिखाए गए, लेकिन अधिक भूखंड न होने से अभी ज्यादा विकल्प नहीं दिखाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध भूखंडों को सूचीबद्ध किया गया है। सभी उद्यमियों को इसकी लगातार जानकारी दी जा रही है। दिल्ली-पंजाब की ये औद्योगिक इकाइयां अगर जिले में निवेश करती हैं तो हर इकाई में 20 से 30 व्यक्ति को रोजगार मिल सकता है। बड़ी इकाई में 100 से अधिक लोग रोजगार पा सकते हैं। जिला उद्योग केंद्र के आयुक्त बीरेंद्र कुमार, संयुक्त का कहना है कि लॉकडाउन के बाद जिले में इन इकाइयों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अन्य राज्यों के उद्योग जिले में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उनसे लगातार संपर्क किया जा रहा है। भूखंडों को लेकर भी सूची बनाई गई है। आने वाले दिनों में उद्यमियों द्वारा उद्योग स्थापना को लेकर विभाग से संपर्क करने की उम्मीद है।
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साइकिल उद्योग ने भी पकड़ी रफ्तार
एक वक्त था कि रोजमर्रा की जिंदगी में साइकिल घर-घर जरूरत होती थी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अपने जरूरी काम के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। वक्त के साथ साइकिल की अहमियत कम हुई और इसके उत्पादन और बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ गई। साइकिल की धीमी रफ्तार को कोरोना काल में ग्राहक मिले और बिक्री में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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पिछले करीब 10 साल के मुकाबले कोरोना काल में साइकिल की बिक्री अधिक हुई। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक हुए। जिम, पार्क सहित अन्य जगह पाबंदी थी। ऐसे में साइकिल एक बेहतर फिटनेस विकल्प के तौर पर उभरा। दुकानदारों के मुताबिक सामान्य साइकिल के अलावा लोग अब हाई रेंज स्पोर्ट्स साइकिलों को भी पसंद कर रहे हैं।
मई के बाद बढ़ता गया उत्पादन
मई में लॉकडाउन खुलने के बाद साइकिल उत्पादन ने भी रफ्तार पकड़ी। जिले के करीब 70 उद्योगों में साइकिल के पार्ट्स तैयार होते हैं। रिंग्स उत्पादन करने वाले उद्यमी गौतम ने बताया कि शुरुआत में लेबर न होने से बड़ी चुनौती थी लेकिन कम लेबर के साथ काम शुरू किया और कोरोना काल में भी उत्पादन जारी रहा।
जमकर हुई बिक्री
2020 में 2500 से लेकर 3000 सामान्य साइकिल की बिक्री हुई। जबकि हाई रेंज साइकिल की बिक्री दो हजार के आसपास रही। बीते साल में एक से डेढ़ हजार साइकिलें ही बिकी थी।