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1.13 लाख भवनों के मालिकों ने एक बार भी नहीं दिया गृहकर
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1.13 लाख भवनों के मालिकों ने एक बार भी नहीं दिया गृहकर
गाजियाबाद। सड़क, सीवर, स्ट्रीट लाइट, पानी की सुविधाएं तो ली, लेकिन 113755 भवन मालिकों ने नगर निगम के गठन के बाद से एक बार भी गृहकर नहीं चुकाया। इन भवन मालिकों पर नगर निगम का 136 करोड़ रुपया बकाया है। बार-बार डिमांड नोटिस जारी करने के बाद भी गृहकर जमा नहीं किया गया तो अब निगम अधिकारी इन आवासीय भवनों पर सीलिंग के लिए शासन से इजाजत लेेंगे।
1995 में नगर निगम का गठन हुआ था। गठन के वक्त आसपास के 40 गांवों को निगम सीमा में शामिल किया गया था। शहरी क्षेत्र के भवन मालिकों ने तो निगम को गृहकर, जलकल और सीवर कर चुकाया, लेकिन ग्रामीण वार्डों समेत कई इलाके ऐसे हैं जिनसे नगर निगम को टैक्स नहीं मिल रहा। गृहकर न चुकाने वाले यह क्षेत्र वार्डों में शामिल हैं और इनमें पार्षद चुने जा रहे हैं, ऐसे में पार्षदों के प्रस्तावों पर इन क्षेत्रों में सड़क, सीवर, पानी, जल निकासी आदि सभी सुविधाएं विकसित भी की गई हैं। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने अब पूरे शहर के वार्डों में खर्च की गई रकम, उनसे मिलने वाले गृहकर और बकाया कर का आकलन कराया है। उनका कहना है कि शहर में कुल 5.60 लाख भवन गृहकर के दायरे में लाए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से 113755 भवन मालिक ऐसे हैं जिन्होंने एक बार भी टैक्स नहीं चुकाया है। इन भवनों पर बकाया गृहकर की 136 करोड़ की रकम नगर निगम को मिले तो सभी देनदारियां खत्म हो सकती हैं।
रिहाइशी भवनों पर सीलिंग की लेंगे इजाजत
नगर निगम गृहकर बकाया होने पर व्यावसायिक भवनों पर तो सीलिंग करता है, लेकिन रिहाइशी भवनों पर कार्रवाई नहीं हो रही। नगर आयुक्त का कहना है कि बार-बार नोटिस जारी करने पर भी रिहाइशी भवनों के मालिक बकाया रकम जमा नहीं करा रहे हैं। इस रकम की वसूली के लिए शासन से रिहायशी भवनों पर सीलिंग की इजाजत मांगी जाएगी। इसके लिए जल्द ही नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजेंगे। कार्रवाई होने पर ही इस रकम की वसूली हो सकती है।
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सरकारी विभाग भी दबाए बैठे सर्विस चार्ज
नगर निगम सरकारी विभागों से गृहकर की बजाय सर्विस चार्ज वसूलता है। मेट्रो, रेलवे, डाक विभाग, कलक्ट्रेट, गन्ना विभाग, शिक्षा विभाग, विद्युत निगम, पुलिस समेत निगम सीमा में आने वाले सरकारी भवनों से मिलने वाला सर्विस चार्ज भी निगम को वर्षों से नहीं मिला है। इन सरकारी विभागों पर निगम का 134 करोड़ रुपया बकाया है। इसमें से 43 करोड़ की वसूली के मामले विवादित हैं। निगम को सभी सरकारी और आवासीय भवनों से वसूली की जाए तो निगम को 270 करोड़ रुपये मिल जाएगा।
शहर में सर्वे कराकर उन भवनों को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने कभी गृहकर दिया ही नहीं। नगर निगम अधिनियम में व्यावसायिक भवनों पर सीलिंग तो अधिकार दिया गया है, लेकिन रिहायशी भवनों की सीलिंग का अधिकार नहीं है। शासन से इसके लिए इजाजत मांगी जाएगी, ताकि वसूली की जा सके। - महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त
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गाजियाबाद। सड़क, सीवर, स्ट्रीट लाइट, पानी की सुविधाएं तो ली, लेकिन 113755 भवन मालिकों ने नगर निगम के गठन के बाद से एक बार भी गृहकर नहीं चुकाया। इन भवन मालिकों पर नगर निगम का 136 करोड़ रुपया बकाया है। बार-बार डिमांड नोटिस जारी करने के बाद भी गृहकर जमा नहीं किया गया तो अब निगम अधिकारी इन आवासीय भवनों पर सीलिंग के लिए शासन से इजाजत लेेंगे।
1995 में नगर निगम का गठन हुआ था। गठन के वक्त आसपास के 40 गांवों को निगम सीमा में शामिल किया गया था। शहरी क्षेत्र के भवन मालिकों ने तो निगम को गृहकर, जलकल और सीवर कर चुकाया, लेकिन ग्रामीण वार्डों समेत कई इलाके ऐसे हैं जिनसे नगर निगम को टैक्स नहीं मिल रहा। गृहकर न चुकाने वाले यह क्षेत्र वार्डों में शामिल हैं और इनमें पार्षद चुने जा रहे हैं, ऐसे में पार्षदों के प्रस्तावों पर इन क्षेत्रों में सड़क, सीवर, पानी, जल निकासी आदि सभी सुविधाएं विकसित भी की गई हैं। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने अब पूरे शहर के वार्डों में खर्च की गई रकम, उनसे मिलने वाले गृहकर और बकाया कर का आकलन कराया है। उनका कहना है कि शहर में कुल 5.60 लाख भवन गृहकर के दायरे में लाए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से 113755 भवन मालिक ऐसे हैं जिन्होंने एक बार भी टैक्स नहीं चुकाया है। इन भवनों पर बकाया गृहकर की 136 करोड़ की रकम नगर निगम को मिले तो सभी देनदारियां खत्म हो सकती हैं।
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रिहाइशी भवनों पर सीलिंग की लेंगे इजाजत
नगर निगम गृहकर बकाया होने पर व्यावसायिक भवनों पर तो सीलिंग करता है, लेकिन रिहाइशी भवनों पर कार्रवाई नहीं हो रही। नगर आयुक्त का कहना है कि बार-बार नोटिस जारी करने पर भी रिहाइशी भवनों के मालिक बकाया रकम जमा नहीं करा रहे हैं। इस रकम की वसूली के लिए शासन से रिहायशी भवनों पर सीलिंग की इजाजत मांगी जाएगी। इसके लिए जल्द ही नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजेंगे। कार्रवाई होने पर ही इस रकम की वसूली हो सकती है।
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सरकारी विभाग भी दबाए बैठे सर्विस चार्ज
नगर निगम सरकारी विभागों से गृहकर की बजाय सर्विस चार्ज वसूलता है। मेट्रो, रेलवे, डाक विभाग, कलक्ट्रेट, गन्ना विभाग, शिक्षा विभाग, विद्युत निगम, पुलिस समेत निगम सीमा में आने वाले सरकारी भवनों से मिलने वाला सर्विस चार्ज भी निगम को वर्षों से नहीं मिला है। इन सरकारी विभागों पर निगम का 134 करोड़ रुपया बकाया है। इसमें से 43 करोड़ की वसूली के मामले विवादित हैं। निगम को सभी सरकारी और आवासीय भवनों से वसूली की जाए तो निगम को 270 करोड़ रुपये मिल जाएगा।
शहर में सर्वे कराकर उन भवनों को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने कभी गृहकर दिया ही नहीं। नगर निगम अधिनियम में व्यावसायिक भवनों पर सीलिंग तो अधिकार दिया गया है, लेकिन रिहायशी भवनों की सीलिंग का अधिकार नहीं है। शासन से इसके लिए इजाजत मांगी जाएगी, ताकि वसूली की जा सके। - महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त