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घर में शव छुपाने वाली महिला को पांच साल कारावास
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घर में शव छुपाने वाली महिला को पांच साल कारावास
गाजियाबाद। चार साल पहले पति द्वारा युवक की हत्या कर घर में शव दफन करने के बाद साक्ष्य छुपाने की दोषी पत्नी को अदालत ने पांच साल कारावास की सजा सुनाई है। हत्या का आरोपी पति सलीम की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो चुकी थी। सलीम को शक था कि उसकी पत्नी मोहसिना के संबंध साथ में काम करने वाले शकील से थे। एससी/एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद यादव ने दोषी पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। साक्ष्य के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया।
सहायक लोक अभियोजक संजीव कुमार ने बताया कि थाना पिलखुवा के मोहल्ला कृष्णा गंज में रहने वाले जावेद ने 23 जून 2009 को पिलखुवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जावेद ने बताया था कि पड़ोस में रहने वाला सलीम उसके भाई शकील को 10 जून 2009 को घर से बुलाकर ले गया था। इसके बाद शकील वापस नहीं आया। उसके भाई जाकिर ने पुलिस को बताया था कि 10 जून को सलीम के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर जाते हुए देखा था। दूसरी मोटरसाइकिल पर इनके साथी शब्बीर, उसका भाई इकराम और भतीजे अनीस को साथ जाते हुए देखा था। इसके बाद शकील वापस नहीं आया, जबकि उसकी मोटरसाइकिल दादरी के कोट लुहारली पुल के पास मिली थी। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर सलीम, इकराम, शब्बीर और मोहसिना को गिरफ्तार करके पूछताछ की। पूछताछ के दौरान सलीम ने शकील की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया। मोहसिना की निशानदेही पर पुलिस ने शकील का शव गुलावठी में एक घर के अंदर आंगन खोदकर कर बरामद किया था। इसके बाद सभी आरोपियों को जेल भेज दिया था। सोमवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मोहसिना को साक्ष्य छुपाने के मामले में दोषी पाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने बताया कि साक्ष्य के अभाव में मोहसिना के देवर इकराम, शब्बीर और भतीजे अनीस को बरी कर दिया।
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गाजियाबाद। चार साल पहले पति द्वारा युवक की हत्या कर घर में शव दफन करने के बाद साक्ष्य छुपाने की दोषी पत्नी को अदालत ने पांच साल कारावास की सजा सुनाई है। हत्या का आरोपी पति सलीम की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो चुकी थी। सलीम को शक था कि उसकी पत्नी मोहसिना के संबंध साथ में काम करने वाले शकील से थे। एससी/एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद यादव ने दोषी पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। साक्ष्य के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया।
सहायक लोक अभियोजक संजीव कुमार ने बताया कि थाना पिलखुवा के मोहल्ला कृष्णा गंज में रहने वाले जावेद ने 23 जून 2009 को पिलखुवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जावेद ने बताया था कि पड़ोस में रहने वाला सलीम उसके भाई शकील को 10 जून 2009 को घर से बुलाकर ले गया था। इसके बाद शकील वापस नहीं आया। उसके भाई जाकिर ने पुलिस को बताया था कि 10 जून को सलीम के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर जाते हुए देखा था। दूसरी मोटरसाइकिल पर इनके साथी शब्बीर, उसका भाई इकराम और भतीजे अनीस को साथ जाते हुए देखा था। इसके बाद शकील वापस नहीं आया, जबकि उसकी मोटरसाइकिल दादरी के कोट लुहारली पुल के पास मिली थी। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर सलीम, इकराम, शब्बीर और मोहसिना को गिरफ्तार करके पूछताछ की। पूछताछ के दौरान सलीम ने शकील की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया। मोहसिना की निशानदेही पर पुलिस ने शकील का शव गुलावठी में एक घर के अंदर आंगन खोदकर कर बरामद किया था। इसके बाद सभी आरोपियों को जेल भेज दिया था। सोमवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मोहसिना को साक्ष्य छुपाने के मामले में दोषी पाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने बताया कि साक्ष्य के अभाव में मोहसिना के देवर इकराम, शब्बीर और भतीजे अनीस को बरी कर दिया।
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