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एक पैन नंबर पर चल रही थीं 11 फर्म
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एक पैन नंबर पर चल रही थीं 11 फर्म
गाजियाबाद। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग ने खुलासा किया है कि एक पैन पर 11 फर्म चल रही थीं। अब तक हुई जांच में इनमें से 10 फर्म फर्जी निकली हैं। फर्म के पता पर छापा मारा गया तो वहां उनका अस्तित्व ही नहीं मिला। कहीं मकान तो कहीं प्लॉट था। इस तरह फर्जीवाड़ा करके राजस्व को सात करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया है। विभाग ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। दिसंबर 2020 में विभाग ने 99 करोड़ की टैक्स चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। पकड़ा गया आरोपी इस गिरोह का सदस्य है।
असिस्टेंट कमिश्नर पी कौर ने बताया कि 99 करोड़ की टैक्स चोरी में जांच के दौरान रूपम वशिष्ठ की फर्म के बारे में जानकारी मिली। रूपम रैकेट में शामिल फर्मों से खरीद-फरोख्त करने वालों में शामिल था। इसकी गाजियाबाद दिल्ली स्थित छह फर्मों पर आठ और नौ मार्च को जांच की गई। फर्म के नाम पर अधिकारियों को कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि रूपक के खिलाफ सीबीआई जांच भी चल रही हैं। विभाग ने इसकी 10 फर्म की जांच पूरी की है। सभी फर्म फर्जी निकली हैं। एक फर्म बिहार में पंजीकृत है, जिसकी जांच चल रही है। अधिकारियों को अंदेशा है कि बिहार में पंजीकृत फर्म भी बोगस हो सकती है। जबकि इन 11 फर्मों में प्रयोग मोबाइल नंबर और बैंक खातों पर करीब 50 फर्मों की जानकारी और मिली है। रूपम बिना माल की सप्लाई के फर्जी बिलों से सात करोड़ की टैक्स चोरी कर चुका है। दस मार्च को रूपम को संजयनगर से गिरफ्तार कर विशेष सीजेएम कोर्ट मेरठ में पेश किया गया, जहां से उसे 23 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
हर ट्रेड की फर्म, खुली और हुई बंद
असिस्टेंट कमिश्नर ने बताया कि लोहा, प्लास्टिक, गारमेंट सहित लगभग सभी ट्रेड में फर्म पंजीकृत कराने के बाद फर्जी बिल काटे गए। दिसंबर 2020 से मार्च 2022 तक आईटीसी का लाभ लेने के तुरंत बाद इस तरह की फर्म को आरोपियों ने बंद भी कर दिया। पेन कार्ड से अलग-अलग बैंक में खाते खुलवाकर फर्म के लिए आवेदन आरोपी करते हैं।
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628 करोड़ के फर्जी बिलिंग कर चुका है रैकेट
सीजीएसटी टीम ने दिसंबर 2020 में मैसर्स जय एंटरप्राइजेज की जांच की थी। इसमें 36 फर्म से करीब 628 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग करने वाला रैकेट सामने आया था। इसके आधार पर जांच पूरी होने के बाद रैकेट में शामिल नरेश कुमार को 21 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया था। नरेश कुमार ने अपने रैकेट के साथ 99 करोड़ की आईटीसी का लाभ विभाग से लिया था। इसी जांच में आगे कार्रवाई करते हुए रूपम की फर्मों की जांच की गई।
रडार पर 50 फर्म, पकडे़ जाएंगे अन्य आरोपी
जांच में सामने आईं 50 फर्म रडार पर हैं। जांच पूरी होने के बाद इस रैकेट में शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कराया जाएगा।
- राकेश गुप्ता, अपर आयुक्त, सीजीएसटी
जांच में मौके पर नहीं मिलता फर्म का अस्तित्व
केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर विभाग की जांच में जब फर्म पर छापा मारा जाता है तो मौके पर फर्म की बजाय घर, गैराज मिलते हैं। कई मामलों में लोगों को पता भी नहीं होता है कि उनके पते पर फर्जी फर्म चल रही है। रूपम के ठिकानों पर भी अधिकारियों को खाली प्लॉट और दुकानें ही मिली हैं।
पिछले साल 12 घंटे में हुई थी एक आरोपी की गिरफ्तारी
पिछले साल अगस्त माह में सीजीएसटी की टीम को राकेश मार्ग से टैक्स चोरी के एक आरोपी को गिरफ्तार करने में दस घंटे लग गए थे। सुबह छह अधिकारियों के आरोपी के मकान पर पहुंचने के बाद ड्रामा शुरू हो गया था। इसके बाद आरोपी ने खुद को बीमार बता कर भाटिया मोड़ स्थित एक अस्पताल में भर्ती करा लिया। अस्पताल में अधिकारियों ने सभी जांच पूरी होने के बाद शाम छह बजे तक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।
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गाजियाबाद। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग ने खुलासा किया है कि एक पैन पर 11 फर्म चल रही थीं। अब तक हुई जांच में इनमें से 10 फर्म फर्जी निकली हैं। फर्म के पता पर छापा मारा गया तो वहां उनका अस्तित्व ही नहीं मिला। कहीं मकान तो कहीं प्लॉट था। इस तरह फर्जीवाड़ा करके राजस्व को सात करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया है। विभाग ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। दिसंबर 2020 में विभाग ने 99 करोड़ की टैक्स चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। पकड़ा गया आरोपी इस गिरोह का सदस्य है।
असिस्टेंट कमिश्नर पी कौर ने बताया कि 99 करोड़ की टैक्स चोरी में जांच के दौरान रूपम वशिष्ठ की फर्म के बारे में जानकारी मिली। रूपम रैकेट में शामिल फर्मों से खरीद-फरोख्त करने वालों में शामिल था। इसकी गाजियाबाद दिल्ली स्थित छह फर्मों पर आठ और नौ मार्च को जांच की गई। फर्म के नाम पर अधिकारियों को कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि रूपक के खिलाफ सीबीआई जांच भी चल रही हैं। विभाग ने इसकी 10 फर्म की जांच पूरी की है। सभी फर्म फर्जी निकली हैं। एक फर्म बिहार में पंजीकृत है, जिसकी जांच चल रही है। अधिकारियों को अंदेशा है कि बिहार में पंजीकृत फर्म भी बोगस हो सकती है। जबकि इन 11 फर्मों में प्रयोग मोबाइल नंबर और बैंक खातों पर करीब 50 फर्मों की जानकारी और मिली है। रूपम बिना माल की सप्लाई के फर्जी बिलों से सात करोड़ की टैक्स चोरी कर चुका है। दस मार्च को रूपम को संजयनगर से गिरफ्तार कर विशेष सीजेएम कोर्ट मेरठ में पेश किया गया, जहां से उसे 23 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
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हर ट्रेड की फर्म, खुली और हुई बंद
असिस्टेंट कमिश्नर ने बताया कि लोहा, प्लास्टिक, गारमेंट सहित लगभग सभी ट्रेड में फर्म पंजीकृत कराने के बाद फर्जी बिल काटे गए। दिसंबर 2020 से मार्च 2022 तक आईटीसी का लाभ लेने के तुरंत बाद इस तरह की फर्म को आरोपियों ने बंद भी कर दिया। पेन कार्ड से अलग-अलग बैंक में खाते खुलवाकर फर्म के लिए आवेदन आरोपी करते हैं।
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628 करोड़ के फर्जी बिलिंग कर चुका है रैकेट
सीजीएसटी टीम ने दिसंबर 2020 में मैसर्स जय एंटरप्राइजेज की जांच की थी। इसमें 36 फर्म से करीब 628 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग करने वाला रैकेट सामने आया था। इसके आधार पर जांच पूरी होने के बाद रैकेट में शामिल नरेश कुमार को 21 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया था। नरेश कुमार ने अपने रैकेट के साथ 99 करोड़ की आईटीसी का लाभ विभाग से लिया था। इसी जांच में आगे कार्रवाई करते हुए रूपम की फर्मों की जांच की गई।
रडार पर 50 फर्म, पकडे़ जाएंगे अन्य आरोपी
जांच में सामने आईं 50 फर्म रडार पर हैं। जांच पूरी होने के बाद इस रैकेट में शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कराया जाएगा।
- राकेश गुप्ता, अपर आयुक्त, सीजीएसटी
जांच में मौके पर नहीं मिलता फर्म का अस्तित्व
केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर विभाग की जांच में जब फर्म पर छापा मारा जाता है तो मौके पर फर्म की बजाय घर, गैराज मिलते हैं। कई मामलों में लोगों को पता भी नहीं होता है कि उनके पते पर फर्जी फर्म चल रही है। रूपम के ठिकानों पर भी अधिकारियों को खाली प्लॉट और दुकानें ही मिली हैं।
पिछले साल 12 घंटे में हुई थी एक आरोपी की गिरफ्तारी
पिछले साल अगस्त माह में सीजीएसटी की टीम को राकेश मार्ग से टैक्स चोरी के एक आरोपी को गिरफ्तार करने में दस घंटे लग गए थे। सुबह छह अधिकारियों के आरोपी के मकान पर पहुंचने के बाद ड्रामा शुरू हो गया था। इसके बाद आरोपी ने खुद को बीमार बता कर भाटिया मोड़ स्थित एक अस्पताल में भर्ती करा लिया। अस्पताल में अधिकारियों ने सभी जांच पूरी होने के बाद शाम छह बजे तक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।